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परंपरागत कथा-कहानियों को नए अंदाज में पेश करना जरूरत : गीता हरीहरन
पटियाला
Updated Fri, 03 Mar 2017 03:12 PM IST
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पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी में आयोजित समारोह मौके जानी-मानी लेखिका गीता हरीहरन को सम्मानित करते यूनिवर्सिटी के डीन अकादमिक मामले डा. गुरनाम सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
पंजाबी यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी विभाग की ओर से आयोजित प्रोफेसर बीआर राओ मेमोरियल लेक्चर में जानी-मानी लेखिका गीता हरीहरन ने कहा कि पढ़ना और हमारी परंपरागत कथा-कहानियों को नए अंदाज में पेश करना समय की जरूरत है।
उन्होंने विचारों के खुले आदान-प्रदान के लिए यूनिवर्सिटियों की पवित्रता की रक्षा करने की जरूरत पर जोर दिया। अपने लेक्चर में उन्होंने महिला के शरीर को सदियों से राजसी शक्ति हासिल करने के लिए एक युद्ध के मैदान के तौर पर इस्तेमाल करने पर ध्यान केंद्रित किया।
द्रौपदी की बात करते हुए उन्होंने आज के समय में बंगाली लेखिका महाश्वेता देवी, मनीपुर थियेटर शख्सियत हेसनाम कन्हाईलाल और उड़ीसा लेखिका प्रतिभा रेअ की ओर से नए अंदाज में पेश की गई इस पुरातन कथा की व्याख्या की।
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गीता हरीहरन ने श्रोताओं से अपील की कि वह विश्व परिपेक्ष में एक ऐसा माहौल सृजित करने में मदद करें जिससे नैतिकता और अपनी जिम्मेदारियों को समझने की भावना को बल मिले। गीता हरीहरन कामनवेल्थ पुरस्कार विजेता नावल दि थाउजैंड फेसेज आफ नाइट की लेखिका हैं। समारोह की प्रधानगी पंजाबी यूनिवर्सिटी के डीन अकादमिक मामले डा. गुरनाम सिंह ने की।
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उन्होंने विचारों के खुले आदान-प्रदान के लिए यूनिवर्सिटियों की पवित्रता की रक्षा करने की जरूरत पर जोर दिया। अपने लेक्चर में उन्होंने महिला के शरीर को सदियों से राजसी शक्ति हासिल करने के लिए एक युद्ध के मैदान के तौर पर इस्तेमाल करने पर ध्यान केंद्रित किया।
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द्रौपदी की बात करते हुए उन्होंने आज के समय में बंगाली लेखिका महाश्वेता देवी, मनीपुर थियेटर शख्सियत हेसनाम कन्हाईलाल और उड़ीसा लेखिका प्रतिभा रेअ की ओर से नए अंदाज में पेश की गई इस पुरातन कथा की व्याख्या की।
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गीता हरीहरन ने श्रोताओं से अपील की कि वह विश्व परिपेक्ष में एक ऐसा माहौल सृजित करने में मदद करें जिससे नैतिकता और अपनी जिम्मेदारियों को समझने की भावना को बल मिले। गीता हरीहरन कामनवेल्थ पुरस्कार विजेता नावल दि थाउजैंड फेसेज आफ नाइट की लेखिका हैं। समारोह की प्रधानगी पंजाबी यूनिवर्सिटी के डीन अकादमिक मामले डा. गुरनाम सिंह ने की।