{"_id":"c6baa9ee68b57c6cc0a8dc3a10d8e678","slug":"hail-mother-city-after-another-defense-land-scam-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जय मां नगर के बाद एक और रक्षा भूमि घोटाला","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
जय मां नगर के बाद एक और रक्षा भूमि घोटाला
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर
Updated Wed, 20 May 2015 10:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
छावनी क्षेत्र में एक और रक्षा भूमि घोटाला सामने आया है। रक्षा मंत्रालय ने जो पत्र कैंटोनमेंट बोर्ड को भेजकर रक्षा भूमि से संबंधी रिपोर्ट मांगी है उसमें एक और रक्षा भूमि घोटाले की बात लिखी है।
बताया जा रहा है कि यह भूमि (5.41 एकड़) छावनी बस स्टैंड के सामने बनी मार्केट वाली है। रक्षा भूमि पर बनी जय मां नगर और उक्त मार्केट 1993 के बाद बसी है। रक्षा भूमि पर हुए दोनों निर्माण की किसी ने भी अनुमति नहीं ली है। रक्षा भूमि घोटाले की जांच रक्षा मंत्रालय के सीवीओ (चीफ विजिलेंस आफिसर) हिमांशु कुमार कर रहे हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार बस स्टैंड के सामने रक्षा भूमि पर दुकानें, होटल, साइकिल स्टैंड और स्कूल बने हैं। ये सब 1993 के बाद बनने शुरू हुए हैं।
इनके निर्माण को रोकने के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिकारियों ने कोई प्रयास नहीं किया। बस स्टैंड के सामने वाली जमीन भी मुसलमानों को मुस्लिम कब्रगाह के लिए केंद्रीय सरकार ने दी थी।
विज्ञापन
यहां पर कच्ची व पक्की कब्रें बनी थीं, आज भी कुछेक पक्की कब्रें बनी हैं। कच्ची कब्रों का कुछ नहीं पता। यही नहीं राजनीतिक नेताओं ने भी अपनी वोटों के खातिर यहां पर विकास कार्य करवाए हैं।
सूत्रों ने बताया कि कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिकारियों को रक्षा मंत्रालय से जो पत्र भेज रिपोर्ट मांगी है उसमें बस स्टैंड के सामने वाली जमीन का भी जिक्र है। यह जमीन भी रक्षा विभाग की है।
उधर, डीईओ (डिफेंस एस्टेट आफिसर जालंधर सर्किल) पहले ही कह चुका है कि रक्षा भूमि पर अवैध निर्माण की उन्हें कोई जानकारी नहीं है और न ही उनसे किसी ने लीज पर जमीन ली है।
यह कह कर डीईओ विभाग ने सारी जिम्मेदारी कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिकारियों पर डाल दी है। दूसरी तरफ जब इस बाबत कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिकारी बातचीत करने को तैयार नहीं हैं।
विज्ञापन
बताया जा रहा है कि यह भूमि (5.41 एकड़) छावनी बस स्टैंड के सामने बनी मार्केट वाली है। रक्षा भूमि पर बनी जय मां नगर और उक्त मार्केट 1993 के बाद बसी है। रक्षा भूमि पर हुए दोनों निर्माण की किसी ने भी अनुमति नहीं ली है। रक्षा भूमि घोटाले की जांच रक्षा मंत्रालय के सीवीओ (चीफ विजिलेंस आफिसर) हिमांशु कुमार कर रहे हैं।
विज्ञापन
विभागीय सूत्रों के अनुसार बस स्टैंड के सामने रक्षा भूमि पर दुकानें, होटल, साइकिल स्टैंड और स्कूल बने हैं। ये सब 1993 के बाद बनने शुरू हुए हैं।
इनके निर्माण को रोकने के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिकारियों ने कोई प्रयास नहीं किया। बस स्टैंड के सामने वाली जमीन भी मुसलमानों को मुस्लिम कब्रगाह के लिए केंद्रीय सरकार ने दी थी।
विज्ञापन
यहां पर कच्ची व पक्की कब्रें बनी थीं, आज भी कुछेक पक्की कब्रें बनी हैं। कच्ची कब्रों का कुछ नहीं पता। यही नहीं राजनीतिक नेताओं ने भी अपनी वोटों के खातिर यहां पर विकास कार्य करवाए हैं।
सूत्रों ने बताया कि कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिकारियों को रक्षा मंत्रालय से जो पत्र भेज रिपोर्ट मांगी है उसमें बस स्टैंड के सामने वाली जमीन का भी जिक्र है। यह जमीन भी रक्षा विभाग की है।
उधर, डीईओ (डिफेंस एस्टेट आफिसर जालंधर सर्किल) पहले ही कह चुका है कि रक्षा भूमि पर अवैध निर्माण की उन्हें कोई जानकारी नहीं है और न ही उनसे किसी ने लीज पर जमीन ली है।
यह कह कर डीईओ विभाग ने सारी जिम्मेदारी कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिकारियों पर डाल दी है। दूसरी तरफ जब इस बाबत कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिकारी बातचीत करने को तैयार नहीं हैं।