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ऑपरेशन ब्लू स्टारः कहीं कैप्टन ने ही तो नहीं दी थी इंदिरा को सलाह!

Sun, 16 Feb 2014 01:19 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 16 Feb 2014 01:19 AM IST
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Opration Blus Star, Shiromani akali dal, Captain Amrinder singh, Sukhdev singh dhindhsa
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर कैप्टन अमरिंदर सिंह पर निशाना साधा है।
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इस मामले में उनकी भूमिका पर सवाल उठाते हुए अकाली नेता सुखदेव सिंह ढींढसा और बलविंदर सिंह भूंदड़ ने शनिवार को यहां कहा कि उस दौर में कैप्टन अमरिंदर सिंह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के मुख्य सलाहकारों में से एक थे।

उन्होंने कैप्टन से सवाल किए हैं कि कहीं ऑपरेशन ब्लू स्टार के संबंध में उन्होंने तो प्रधानमंत्री को सलाह नहीं दी थी? उनकी इस मामले में व्यक्तिगत भूमिका क्या थी? उस समय उनका कांग्रेस से इस्तीफा देने का स्टंट क्या सिखों को गुमराह करने की साजिश का एक हिस्सा था?
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पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि यदि वह ऑपरेशन ब्लू स्टार को सिखों के विरुद्ध अपराध मानते हैं, तो फिर वह कांग्रेस में वापस क्यों गए?
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उन्होंने कैप्टन से यह भी सवाल किया है कि क्या इंदिरा गांधी का ऑपरेशन ब्लू स्टार के लिए ब्रिटिश सहायता लेना सही था या गलत?

वह 1984 के सिख विरोधी दंगों को गलत मानते हैं या नहीं? अकाली नेताओं ने कहा कि यह तथ्य स्पष्ट हो चुके हैं कि इंदिरा गांधी ने शिअद और इसके नेताओं को किनारे लगाने के लिए श्री हरमंदिर साहिब पर सैन्य कार्रवाई से पहले पंजाब कांग्रेस के सिख नेताओं से सलाह ली थी।

कैप्टन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा और उनके पुत्र राजीव गांधी के मुख्य सलाहकार के रूप में जाने जाते रहे हैं। इसलिए लगता है कि गांधी के ऑपरेशन ब्लू स्टार से संबंधित फैसले पर अमरिंदर का प्रभाव था।

वहीं, उसके बाद उनका कांग्रेस से इस्तीफा देने का निर्णय पहले से निर्धारित राजनीतिक नाटक था, जिसका मुख्य उद्देश्य अकाली आंदोलन को खत्म करना था।

कैप्टन अमरिंदर को बताना चाहिए कि वह वापस उस कांग्रेस में क्यों गए, जिसने पावन अकाल तख्त साहिब और हरमिंदर साहिब पर हमला करवाया?

उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह अकालियों के खिलाफ आए दिन नए-नए कागज जारी करके केवल गांधी परिवार को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं।

पत्र में हस्ताक्षर लौंगोवाल के नहीं : ढींढसा
पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला के बाद शनिवार को राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींढसा ने भी कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह जिस पत्र को संत लौंगोवाल का बता रहे हैं, उस पर हस्ताक्षर लौंगोवाल के नहीं हैं।

कैप्टन ने कुछ दिन पहले एक पत्र जारी करके कहा था कि यह संत हरचंद सिंह लौंगोवाल का है, जो उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निजी सचिव को लिखा था।


यह बयान करता है कि संत लौंगोवाल और मुख्यमंत्री बादल को श्री हरमंदिर साहिब पर सैन्य कार्रवाई की जानकारी पहले से थी।

जत्थेदार करें हस्तक्षेप : खैहरा
पीपीसीसी प्रवक्ता सुखपाल सिंह खैहरा ने कहा है कि ब्लू स्टार मेमोरियल के मामले में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को हस्तक्षेप करना चाहिए।

उन्होंने यहां जारी एक बयान में कहा कि एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने कुछ दिन पहले कहा था कि मेमोरियल निर्माण पर उन्होंने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से परामर्श किया था, जबकि अब बादल ने इससे इंकार करते हुए मक्कड़ को झूठा करार दिया है।

इस प्रकार अब यह मामला सिख समुदाय की दो बड़ी हस्तियों के बीच का हो गया है और यह फैसला करना कठिन है कि कौन सच्चा है और कौन झूठा।

इसलिए जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब को हस्तक्षेप करके मसले का हल निकालना चाहिए।
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