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दो सौ नई बसें खरीदेगी पीआरटीसी
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला
Updated Thu, 15 May 2014 10:13 PM IST
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पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन जल्द ही विभिन्न रूटों पर बड़ी संख्या में नई बसें उतारने जा रहा है। वर्तमान में कारपोरेशन के बेड़े में काफी बसें कंडम हालत में हैं। जिनमें सफर करना सवारियों के लिए सुरक्षित नहीं है। कारपोरेशन ने इस संबंध में प्रपोजल भेजकर पंजाब सरकार से आर्थिक मदद मांगी है। पैसा मिलते ही चेसिस खरीद कर बसों की बॉडी फैब्रिकेशन का काम शुरू कर दिया जाएगा।
पीआरटीसी के बेड़े में इस समय कुल 1075 बसें हैं, जिनमें 350 बसें खस्ताहाल में हैं। यह बसें आठ साल से ज्यादा पुरानी हैं और साढ़े सात लाख किलोमीटर का सफर भी तय कर चुकी हैं। तय नियमों के मुताबिक इन बसों को काफी पहले ही कंडम कर देना चाहिए था। लेकिन नई बसें न खरीदने के चलते पीआरटीसी इन खस्ताहाल बसों से ही काम चला रही है।
इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखकर कॉरपोरेशन ने 200 नई बसें खरीदने का फैसला लिया है। यह सभी बसें साधारण होंगी, जिनकी चेसिस बाहर से खरीदी जाएगी और बॉडी फैब्रिकेशन कॉरपोरेशन खुद अपनी वर्कशॉप में कराएगा। फैब्रिकेशन खुद करने से कारपोरेशन को प्रति बस 20 लाख रुपये की पड़ेगी, जबकि बाहर से कराने पर बस 21 लाख रुपये तक पड़ जाती है। नई बसें डालने के लिए कॉरपोरेशन ने सरकार को प्रस्ताव भेजकर 35 करोड़ की ग्रांट मांगी है। ज्यादातर नई बसें लंबे रूटों पर डाली जाएंगी। क्योंकि अकसर पुरानी बसें लंबे रूटों पर रास्ते में ही दम तोड़ जाती हैं, जिससे सवारियों को काफी परेशानी होती है।
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एमडी भूपिंदर सिंह ने बताया कि सोमवार को उनकी सेक्रेटरी ट्रांसपोर्ट से इस मामले में बैठक है। उम्मीद है सरकार पीआरटीसी के वित्तीय संकट को देखते हुए और सवारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर नई बसें खरीदने के लिए जरूर आर्थिक मदद देगी।
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पीआरटीसी के बेड़े में इस समय कुल 1075 बसें हैं, जिनमें 350 बसें खस्ताहाल में हैं। यह बसें आठ साल से ज्यादा पुरानी हैं और साढ़े सात लाख किलोमीटर का सफर भी तय कर चुकी हैं। तय नियमों के मुताबिक इन बसों को काफी पहले ही कंडम कर देना चाहिए था। लेकिन नई बसें न खरीदने के चलते पीआरटीसी इन खस्ताहाल बसों से ही काम चला रही है।
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इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखकर कॉरपोरेशन ने 200 नई बसें खरीदने का फैसला लिया है। यह सभी बसें साधारण होंगी, जिनकी चेसिस बाहर से खरीदी जाएगी और बॉडी फैब्रिकेशन कॉरपोरेशन खुद अपनी वर्कशॉप में कराएगा। फैब्रिकेशन खुद करने से कारपोरेशन को प्रति बस 20 लाख रुपये की पड़ेगी, जबकि बाहर से कराने पर बस 21 लाख रुपये तक पड़ जाती है। नई बसें डालने के लिए कॉरपोरेशन ने सरकार को प्रस्ताव भेजकर 35 करोड़ की ग्रांट मांगी है। ज्यादातर नई बसें लंबे रूटों पर डाली जाएंगी। क्योंकि अकसर पुरानी बसें लंबे रूटों पर रास्ते में ही दम तोड़ जाती हैं, जिससे सवारियों को काफी परेशानी होती है।
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एमडी भूपिंदर सिंह ने बताया कि सोमवार को उनकी सेक्रेटरी ट्रांसपोर्ट से इस मामले में बैठक है। उम्मीद है सरकार पीआरटीसी के वित्तीय संकट को देखते हुए और सवारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर नई बसें खरीदने के लिए जरूर आर्थिक मदद देगी।