मोहाली: आवारा कुत्तों के सामने नगर निगम बेबस, केंद्र के सख्त नियमों के कारण सिरे नहीं चढ़ा कुत्तों की नसबंदी का प्रोजेक्ट
साल 2021 में कुत्ते के काटने के मामलों ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इस दौरान 8840 से अधिक कुत्तों के काटने केस आए थे। इस बार जिस रफ्तार से केस बढ़ रहे हैं, उसके हिसाब से सारे रिकॉर्ड टूटने के आसार हैं।
विस्तार
मोहाली में आवारा कुत्तों का आतंक थम नहीं रहा है। कुत्तों की नसबंदी का प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के सख्त नियमों से सिरे नहीं चढ़ पाया है तो दूसरी तरफ दो महीनों में ही 1500 से अधिक कुत्तों के काटने के केस सामने आ चुके हैं। गर्मियां बढ़ने के साथ ही कुत्तों के काटने केस बढ़ रहे हैं। आए दिन 50 से 60 कुत्तों के काटने के मामले अस्पतालों में आ रहे हैं। हालत यह है कि लोग अब सुबह-शाम की सैर करने से पीछे हट रहे हैं। निगम अधिकारियों की मानें तो वे अपनी तरफ से प्रोजेक्ट को रफ्तार देने के लिए काम कर रहे हैं लेकिन कड़े नियम बाधा डाल रहे हैं।
जब कोरोना काल चल रहा था तो लोग घरों से कम निकल रहे थे लेकिन तब भी कुत्तों के काटने के मामले कम नहीं हुए थे। साल 2021 में कुत्ते के काटने के मामलों ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इस दौरान 8840 से अधिक कुत्तों के काटने केस आए थे। इस बार जिस रफ्तार से केस बढ़ रहे हैं, उसके हिसाब से सारे रिकॉर्ड टूटने के आसार हैं। इलाके में आवारा कुत्तों की संख्या 11 हजार से अधिक है। हालांकि नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कोई भी नया नियम लागू करने से पहले पूरी रणनीति बननी चाहिए।
कुत्तों के काटने के मामलों ने तोड़ा सारा रिकॉर्ड
अगर पांच साल के कुत्तों के काटने का रिकॉर्ड देखा जाए तो उससे यह साफ होता है कि कोरोना काल में कुत्तों ने जमकर कहर मचाया। 2017 में 1970 लोगों ने कुत्तों को काटा था, जबकि 2018 में यह संख्या 2340 हो गई। 2019 में 3532 लोगों को कुत्तों ने काटा था। इसके बाद कोरोनाकाल शुरू हुआ और सभी रिकॉर्ड टूट गए। साल 2020 में 4513, 2021 में 8845 और 2022 के दो महीनों में 1500 लोगों को अब तक कुत्ते काट चुके हैं।
नए और पुराने सेक्टरों में सबसे ज्यादा दिक्कत
आवारा कुत्तों का आतंक शहर के नए व पुराने सभी इलाकों में बढ़ता जा रहा है। फेज-पांच, छह, चार, नौ, दस, 3बी1, 3बी2, सेक्टर-76 से अस्सी और नगर निगम के गांवों में भी कुत्तों के काटने के मामले आते रहते हैं। इलाके के पूर्व पार्षद व समाजसेवी संस्थाओं ने इस मामले को लगातार अधिकारियों के समक्ष उठाया था। डीसी को भी इस बारे में कई बार पत्र लिखे हैं।
क्या कहते हैं लोग
सालों से चल रही है समस्या
आवारा कुत्तों का आतंक इलाके में काफी अधिक है। घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। वह इस मामले के खिलाफ सालों से आवाज उठा रहे हैं। नगर निगम को इस काम में गंभीरता दिखानी होगी। -अरुण शर्मा, पूर्व पार्षद
अन्य शहरों के मॉडल की करनी होगी स्टडी
आवारा कुत्तों से लोगों को राहत दिलाने के लिए नगर निगम को उन राज्यों के मॉडल की स्टडी करनी होगी, जहां पर इस समस्या पर काबू पा लिया गया है। कुछ वर्ष पहले इस चीज पर मंथन भी हुआ था लेकिन अभी तक यह प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया है। -अशोक झा, पूर्व पार्षद
कुत्तों की नसबंदी का टेंडर पांच सितंबर को खत्म हो गया था। हमने प्रोजेक्ट के लिए दो बार टेंडर कॉल किए थे, लेकिन किसी कंपनी ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। क्योंकि एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया ने शर्त रखी थी कि उसी कंपनी को काम दिया जाए। जिसके पास एनिमल वेलफेयर बोर्ड का सर्टिफिकेट हो। ऐसे में यह प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। केंद्र सरकार को इस नियम में राहत देने के लिए पत्र लिखा है। - कुलजीत सिंह बेदी, डिप्टी मेयर नगर निगम
आंकड़ों की नजर में
- 11000 से अधिक है शहर में आवारा कुत्तों की संख्या
- 50 से 60 कुत्तों के काटने के केस आ रहे हैं रोजाना
- 8840 से अधिक कुत्तों के काटने केस 2021 में आए थे