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Mohali: ढाई गुना बढ़ाया था मेंटेनेंस चार्ज, उपभोक्ता अदालत ने लगाया 25 हजार रुपये का जुर्माना
Tue, 17 Jan 2023 11:11 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 17 Jan 2023 11:11 AM IST
सार
कंपनी एवं उपभोक्ता के बीच में हुए करार के अनुसार इसमें लिखा गया था कि इस करार को किसी भी प्रकार से बदला नहीं जा सकता है। इसमें 2010 में कंपनी की तरफ से उपभोक्ता को 10690 रुपये का एक मेंटेनेंस का बिल भी दिया गया था।
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(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मोहाली उपभोक्ता अदालत ने टीडीआई इंफ्राटेक लिमिटेड पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए बढ़ाए हुए मेंटेनेंस चार्ज वापस करने के आदेश दिए हैं। बिल्डर ने एक रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से करार करने के बाद उपभोक्ता को ढाई रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से मेंटेनेंस चार्ज का बिल भेजा था। चंडीगढ़ की सेक्टर 30 निवासी मनीषा बंसल की शिकायत पर उपभोक्ता अदालत मोहाली ने यह आदेश जारी किए हैं।
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जानकारी के अनुसार मनीषा बंसल ने टीडीआई इंफ्राटेक लिमिटेड से 243.83 वर्ग गज का टीडीआई सिटी फेस वन सेक्टर 117-119 मोहाली में प्लॉट नंबर 147 खरीदा था। इसकी अलॉटमेंट कंपनी की तरफ से 4 सितंबर 2012 को की गई थी। इस प्लाट के लिए 20 फरवरी 2010 को करार किया था। इसके मुताबिक कंपनी ने टीडीआई फैसिलिटी एंड मैनेजमेंट लिमिटेड कंपनी को मेंटेनेंस के रूप में ठेका दिया हुआ था। इसमें मेंटेनेंस कंपनी को नियमित तौर पर सोसाइटी में पानी की सप्लाई, मरम्मत, एडमिनिस्ट्रेशन जैसे काम करने थे। इस कंपनी के साथ 28 सितंबर 2011 को एक अलग से उपभोक्ता ने करार भी किया हुआ था।
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कंपनी एवं उपभोक्ता के बीच में हुए करार के अनुसार इसमें लिखा गया था कि इस करार को किसी भी प्रकार से बदला नहीं जा सकता है। इसमें 2010 में कंपनी की तरफ से उपभोक्ता को 10690 रुपये का एक मेंटेनेंस का बिल भी दिया गया था। बाद में 2015 में कंपनी की तरफ से उपभोक्ता को एक दूसरा पत्र जारी किया गया। इसमें मेंटेनेंस चार्ज बढ़ाकर ढाई रुपये प्रति वर्ग गज कर दिया गया।
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इसके मुताबिक अप्रैल 2015 में 47 हजार 73 रुपये का एक बिल बनाकर उपभोक्ता को भेज दिया गया। इस पर पीड़ित ने अदालत से मांग की थी कि कंपनी द्वारा भेजे गए 47 हजार 73 रुपये के बिल को वापस लिया जाए। इसके साथ ही बढ़ाए गए मेंटेनेंस चार्ज भी वापस लिया जाए। साथ ही उसे हुई मानसिक परेशानी के लिए एक लाख 33 हजार रुपये दिए जाएं। इस पर कंपनी की तरफ से जवाब दिया गया कि यह एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है। इसमें आवासीय एवं व्यवसाय दोनों तरह के प्रोजेक्ट लगाए गए हैं। बढ़ती महंगाई को देखते हुए समय-समय पर दरें बदली जाती हैं।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आदेश दिया कि एग्रीमेंट के हिसाब से जो एक रुपये प्रति वर्ग गज मेंटेनेंस चार्ज तय हुआ है, वह ही लिया जाए। कंपनी द्वारा जारी किए गए नोटिस रद्द किए जाएं। वहीं पीड़ित को जुर्माने के तौर पर 25 हजार रुपये देने के आदेश दिए।