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मोहाली में लोग बोले- कोरोना के टीके पर पहला हक कोरोना योद्धाओं का, इन्होंने सबसे आगे लड़ी लड़ाई

Sun, 03 Jan 2021 02:11 AM IST
मोहाली ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब) Published by: मोहाली ब्‍यूरो Updated Sun, 03 Jan 2021 02:11 AM IST
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Front line commandos are the only people who are actually entitled to vaccination
कोरोना वैक्सीन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के मुफ्त टीकाकरण और पहले चरण में फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स को टीका लगाने के एलान के बाद खुशी का माहौल है।इसे फ्रंटलाइन में काम करने वाले सभी विभागों के लोग एक अच्छा प्रयास मान रहे हैं। उनका मानना है कि अदृश्य शत्रु कोरोना से फ्रंटलाइन योद्धाओं ने सबसे आगे होकर लड़ाई लड़ी है। इन लोगों के प्रयास से ही आज इस महामारी को काबू करने में काफी हद तक कामयाबी मिली है।

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सरकार का बढ़िया कदम
कोरोना वैक्सीन पहले चरण में हेल्थ केयर और फ्रंटलाइन में काम करने वाले कर्मचारियों को मुहैया करवाना सरकार का एक अच्छा कदम है। क्योंकि फ्रंटलाइन में काम करने वाले लोगों को महामारी का सबसे ज्यादा खतरा होता है। दूसरा वैक्सीन की टीका सभी को मुफ्त में लगाया जाएगा और इससे लोगों को काफी फायदा होगा। उम्मीद है कि जल्दी ही यह बीमारी काबू में होगी। - बलजिंदर सिंह मंड, इंचार्ज, पुलिस चौकी फेज-8।
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सफाई सेवकों ने निभाई थी अहम भूमिका
कोरोना जंग में सफाई मुलाजिम पहले दिन से फ्रंटलाइन योद्धाओं के रूप में उतरे थे। जब सभी लोग महामारी के चलते घरों में थे तो भी सफाई मुलाजिम अपना काम कर रहे थे। इतना ही नहीं उन घरों और उस इलाके में सफाई से लेकर सैनिटाइजेशन की जिम्मेदारी तक सफाई मुलाजिमों पर ही थी। ऐसे में फ्रंटलाइन योद्धाओं को कोरोना वैक्सीन मुहैया करवाना एक अच्छा फैसला है। - पवन गोडयाल- पंजाब सफाई मजदूर फेडरेशन के प्रदेश महासचिव।

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फ्रंटलाइन कमांडो तंदुरुस्त होंगे, तो ही देश रहेगा सुरक्षित

फ्रंटलाइन कमांडो किसी भी क्षेत्र के रहे हों, सबने अच्छा काम किया है। ऐसे में उनका हक भी बनता है कि वैक्सीन सबसे पहले उन्हें मिले। सरकार का यह अच्छा कदम है। जब फ्रंटलाइन कमांडो तंदुरुस्त रहेंगे तभी तो इस महामारी को खत्म किया जा सकेगा और देश सुरक्षित रहेगा - मोहन सिंह, सीनियर उप प्रधान, पंजाब सफाई मजदूर फेडरेशन।

कोरोना कमांडो को वैक्सीन की सबसे ज्यादा जरूरत
पिछले आठ-नौ महीनों से इमरजेंसी में ड्यूटी दे रही हूं। यहां सैकड़ों की गिनती में लोग आते हैं। जिनका हमें बिना सोचे समझे चेकअप करना होता है। इन्हें देखने के लिए पहले डॉक्टर और क्लास तीन के कर्मचारी ही सामने आते हैं। ऐसे में अगर किसी को कोरोना वैक्सीनेशन की जरूरत है तो वों इन्हीं दो वर्गों को सबसे ज्यादा होती है। क्योंकि इन लोगों के लिए मरीज को हर हालत में देखना जरूरी है, जो गंभीर अवस्था में यहां आया होता है। ऐसे में कुछ लोग कोरोना के चपेट में भी हो सकते हैं। मेरा मानना है कि डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को ही पहले कोरोना वैक्सीन मिलनी चाहिए। - डॉ. परमिंदर कौर, हेड नर्स, सिविल अस्पताल।

जिन्होंने संक्रमित लोगों के बीच काम किया, उनसे पहल जरूरी
नए साल की शुरुआत सकारात्मक रूप से हुई है। क्योंकि देश में वैक्सीन के आने की बात कहीं जा रही है और वैक्सीन ड्राइव की तैयारी देश के हर कोने में शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में हर वर्ग के स्वास्थ्य कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों जो दिन रात फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स रूप में काम करते आ रहे हैं। इन सभी कर्मचारियों ने अपना काम संक्रमित लोगों के बीच में रहकर किया है, इसलिए इनसे पहल करना जरूरी, ऐसे में इन्हें मुलाजिमों को सबसे पहले वैक्सीन मुहैया करवाने का फैसला सबसे बढ़िया है। - डॉ. ईशा अरोड़ा, मेडिकल ऑफिसर सिविल अस्पताल।

जान दांव पर लगाकर किया काम

कोविड-19 के दौरान अगर किसी ने अपनी जान दांव पर लगाकर काम किया है तो वो हैं सफाई कर्मचारी, जिन्होंने अपने परिवार की फिक्र किए बिना लोगों के घरों से कूड़ा एकत्रित करके शहर के अंदर सफाई व्यवस्था बहाल रखने में अहम भूमिका अदा की है। वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन की ओर से फ्रंटलाइन वॉरियर्स को मुफ्त में वैक्सीन प्रदान करने के फैसले का हम स्वागत करते हैं, क्योंकि सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं के अंदर दर्जा-4 वर्ग के तहत काम करने वाले कर्मचारी आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं है कि बाजार से वैक्सीन खरीद सकें। -रविंदरपाल सिंह, अध्यक्ष, कर्मचारी संघ, जीरकपुर।

परिवार की चिंता हुई, पर काम पर डटे
कोरोना काल में जीरकपुर का नोडल अधिकारी होने के नाते मेरे ऊपर जिम्मेदारी थी। कोई भी नया कोरोना का मरीज सामने आता था तो सबसे मुझे पहुंचना पड़ता था और मरीज को अस्पताल पहुंचाना पड़ता था। मेरी शादी को थोड़ा समय ही हुआ था और अपने माता-पिता और पत्नी के साथ ढकोली में रहता हूं। काम के दौरान परिवार की चिंता सताने लगती थी, लेकिन फ्रंटलाइन पर होने के कारण काम पर डटे रहना होता था। सबसे पहले कोरोना मरीज के संपर्क में आना पड़ता था। कोरोना ने हमारा रहन-सहन और खानपान भी बदल दिया है। इसलिए फ्रंटलाइन पर काम करने वालों को कोरोना वैक्सीन लगाने का सरकार का फैसला सही है। -डॉ. मेहताब बल, कोरोना काल के नोडल अधिकारी, जीरकपुर।

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