लॉरेंस बिश्नोई जेल इंटरव्यू:पॉलीग्राफ टेस्ट से मुकरे पुलिस मुलाजिम, मोहाली कोर्ट में दायर की याचिका, सुनवाई आज
वर्ष 2022 में पुलिस हिरासत से गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के इंटरव्यू मामले में नया मोड़ आ गया है। कुछ समय पहले पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए राजी हुए छह पुलिसकर्मी अब पीछे हट गए हैं। पुलिस वालों ने मोहाली कोर्ट में याचिका दायर की है।
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गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल में हुए इंटरव्यू के मामले में एक नया मोड़ आ गया है। जिन पुलिस मुलाजिमों ने पहले पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए सहमति दी थी, उन्होंने अब मोहाली के जिला अतिरिक्त एवं सेशन कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी सहमति वापस ले ली है। इसके बाद अदालत ने पॉलीग्राफ टेस्ट के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
अदालत ने इस मामले में पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और संबंधित थाना प्रभारी (एसएचओ) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके साथ निचली अदालत से इस मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड भी पेश करने को कहा गया है।
पुलिस मुलाजिमों की ओर से पैरवी कर रहे वकील सुल्तान सिंह संघा ने अदालत में तर्क दिया कि उनके मुवक्किलों के पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए सहमति वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के दबाव, धमकी और जबरदस्ती ली गई थी। उन्होंने बताया कि उनके मुवक्किलों को मामले की जांच के लिए 5 अप्रैल, 2025 को अदालत परिसर में विशेष जांच दल (एसआईटी) के समक्ष उपस्थित होने का नोटिस दिया गया था। संघा ने यह भी कहा कि जब सहमति ली गई, उस समय एडीजीपी रैंक का एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अदालत में मौजूद था, जिसके कारण पुलिसकर्मियों ने दबाव में आकर पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए हामी भरी थी। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि सहमति दर्ज करते समय पुलिसकर्मियों के साथ कोई वकील मौजूद नहीं था।
वकील ने अदालत को पांचों पुलिस मुलाजिमों की ओर से दायर हलफनामों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि उन्होंने अब पॉलीग्राफ टेस्ट से गुजरने की अपनी सहमति वापस ले ली है। उन्होंने कहा कि किसी भी झूठ पकड़ने वाले परीक्षण (लाई डिटेक्टर टेस्ट) के लिए आरोपी की सहमति आवश्यक है और आरोपी को यह विकल्प दिया जाना चाहिए कि वह इस तरह के परीक्षण का लाभ उठाना चाहता है या नहीं। यदि कोई आरोपी स्वेच्छा से इस परीक्षण के लिए आगे आता है, तो उसे एक वकील तक पहुंच प्रदान की जानी चाहिए और पुलिस और उसके वकील द्वारा उसे इस परीक्षण के शारीरिक, भावनात्मक और कानूनी निहितार्थों के बारे में समझाया जाना चाहिए। इन तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने पॉलीग्राफ टेस्ट के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
इन पुलिसकर्मियों ने जताई थी सहमति
इस मामले में छह पुलिसकर्मियों मुख्तियार सिंह, सिमरनजीत सिंह, हरप्रीत सिंह, बलविंदर सिंह, सतनाम सिंह और कांस्टेबल अमृतपाल सिंह ने पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने के लिए सहमति दी थी और उनके बयान दर्ज किए गए थे। जांच एजेंसियों को संदेह है कि जेल के अंदर लॉरेंस बिश्नोई का इंटरव्यू सुरक्षा व्यवस्था में अंदरूनी मिलीभगत के बिना संभव नहीं था। इसी संदेह के आधार पर यह पॉलीग्राफ टेस्ट यह पता लगाने के लिए कराया जाना था कि जेल स्टाफ या पुलिस मुलाजिमों में से किसी ने लॉरेंस बिश्नोई को मीडिया तक पहुंचाने में कोई मदद तो नहीं की।
डीएसपी समेत 6 पुलिस अधिकारियों को किया गया था निलंबित
जेल में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के इंटरव्यू का मामला सामने आने के बाद पंजाब सरकार हरकत में आई थी और डीएसपी गुरशेर सिंह संधू सहित छह पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। इन सभी को 3 अप्रैल, 2022 को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का इंटरव्यू करने का दोषी पाया गया था, जब वह सीआईए पुलिस स्टेशन खरड़ में बंद था। ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में इन सभी को निलंबित किया गया था। करीब डेढ़ साल बाद लॉरेंस का यह इंटरव्यू एक टीवी चैनल पर प्रसारित हुआ था, जो काफी वायरल हुआ था। निलंबित किए गए अन्य पुलिसकर्मियों में समर वनीत पीपीएस डीएसपी, सब इंस्पेक्टर रीना सीआईए खरड़, सब इंस्पेक्टर एलआर जगतपाल जग्गू एजीटीएफ, सब इंस्पेक्टर एलआर शगनजीत सिंह, एएसआई मुख्तियार सिंह और हेड कांस्टेबल ओम प्रकाश शामिल थे।
क्या होता है पॉलीग्राफ टेस्ट
पॉलीग्राफ टेस्ट, जिसे आमतौर पर झूठ डिटेक्टर टेस्ट के रूप में जाना जाता है।थ एक ऐसी तकनीक है जो किसी व्यक्ति से सवाल पूछे जाने पर उसके शरीर में होने वाले शारीरिक बदलावों को मापती है। यह उपकरण हृदय गति, रक्तचाप, सांस लेने की गति और त्वचा की नमी जैसे संकेतों को रिकॉर्ड करता है, जिनके बारे में माना जाता है कि झूठ बोलने पर इनमें बदलाव आता है। इस टेस्ट का उपयोग अक्सर आपराधिक जांचों में किया जाता है।