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करोड़ों रुपये के विकास कार्य के मामले ने पकड़ा तूल

Fri, 20 Mar 2020 03:00 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 20 Mar 2020 03:00 AM IST
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Case of development work worth crores caught
मोहाली। शहर में नगर निगम की ओर से करोड़ों रुपये की लागत से होने वाले विकास कार्यों को पूरा नहीं करने का मामला एक बार फिर से गर्मा गया है। इस मामले को लेकर वीरवार को अकाली-बीजेपी के पार्षदों ने वीरवार को नगर निगम के कमिश्नर से मुलाकात की और उन्हेें अपनी समस्याएं बताई। पार्षदों का आरोप है कि निगम कमिश्नर शहर के विकास कार्य करवाने को लेकर गंभीर नहीं है। वहीं, उन्होंने स्थानीय निकाय विभाग के डायरेक्टर से मांग की है कि निगम कमिश्नर का तबादला कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है जब कोई निगम कमिश्नर काम रुकवा रहा है। हालांकि कमिश्नर हाउस की मीटिंग में सभी पार्षदों, अधिकारियों और मीडिया के सामने यह बात साफ कर चुके हैं कि निगम के पास उक्त कामों के लिए फंड नहीं है। इससे पहले यहां जो अधिकारी तैनात थे उन अधिकारियों ने प्रस्ताव बनाते समय फंड को देखा नहीं है। जिसके चलते यह हालत पैदा हुए हैं।
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मिली जानकारी के मुताबिक वीरवार को पार्षद परमिंदर सिंह सोहाना, आरपी शर्मा, अरूण कुमार शर्मा, कुलदीप कौर की अगुवाई में पार्षदों ने नगर निगम के कमिश्नर से मुलाकात कर उन्हें बताया कि उनके इलाके के विकास कार्य रुके हुए हैं। जिससे उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। जबकि अब चुनाव में कुछ ही दिन रह गए हैं। इस पर कमिश्नर ने उन्हें साफ शब्दों में कह दिया है कि वह शहर का विकास नहीं करवा सकते है और उन पर राजनीतिक दवाब बहुत ज्यादा है।
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उन्होंने कहा कि शहर की सड़कों पर घूमते लावारिस पशुओं का मामला गंभीर है और पशुओं की वजह से आए दिन हादसे हो रहे हैं। इसके साथ ही मांग की थी कि इस टीम से डिफाल्टर लोगों को हटाया जाए। केवल उन्हीं लोगों को टीम में रखा जाए, जोकि काम करने में सक्षम हैं। इसके अलावा उन्होंने सड़कों पर पड़े खड्ढों का मुद्दा भी गंभीरता से उठाया। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि इसके चलते शहर में सड़क हादसे होते हैं। लेकिन इसके बाद भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। बता दें कि करोड़ों रुपये के विकास कार्य नगर निगम के पास उचित फंड नहीं होने के चलते अटके हुए हैं। जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। यह मामला हाउस की मीटिंग तक में उठ चुका है और इसके बाद फंड मुहैया करवाने के लिए अकाउंट हेड तक बदले गए थे।
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