प्रदूषण : मुंबई, लुधियाना से अधिक प्रदूषित बना मंडी गोबिंदगढ़, रात के अंधेरे में काला धुआं छोड़ रहीं चिमनियां
- मंडी गोबिंदगढ़ का एक्यूआई पहुंचा 157
- लुधियाना का एक्यूआई 119 और मुंबई का एक्यूआई 139 दर्ज
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पंजाब की लोहा नगरी के तौर पर प्रसिद्ध मंडी गोबिंदगढ़ की जहर उगलती चिमनियों ने शहर की आबोहवा को प्रदूषित कर दिया है। इन दिनों के एक्यूआई लेवल को देखें तो मंडी गोबिंदगढ़ मुंबई और लुधियाना से अधिक प्रदूषित शहर बन चुका है। रात के अंधेरे में काला धुआं उगल रहीं ये चिमनियां लोगों को कार्बन डाई आक्साइड परोस रही हैं। इससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
सेंट्रल प्रदूषण नियंत्रण विभाग से मिले 3 अप्रैल 2021 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मंडी गोबिंदगढ़ शहर का हवा गुणवत्ता सूचकांक शाम सात बजे तक 157 एक्यूआई दर्ज किया गया। मंडी गोबिंदगढ़ पंजाब के सबसे बड़े औद्योगिक शहर लुधियाना और महानगर मुंबई से भी अधिक प्रदूषित हो गया है।
तीन अप्रैल को लुधियाना का हवा गुणवत्ता सूचकांक 199 एक्यूआई था, जबकि मुंबई में सिर्फ 139 एक्यूआई दर्ज किया गया। जबकि अमृतसर में यह 94 व दिल्ली में 159 रिकार्ड किया गया। जून से नवंबर तक गोबिंदगढ़ का एक्यूआई बहुत गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है और इन दिनों में शहर की करीब डेढ़ लाख आबादी का पाला हर रोज दमघोंटू धुएं से पड़ता है।
पांच इकाइयां की गई बंद, 110 करोड़ बैंक गारंटी
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के एक्सईएन विजय कुमार ने बताया कि वित्त वर्ष 2020-21 में विभाग द्वारा धुंआ उगलने वाली औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई करते हुए पांच इकाइयां बंद की गई हैं और कुछ मिल मालिकों से विभाग ने 110 करोड़ की बैंक गारंटी ली है। विभाग ने उनको मानवीय सेहत से खिलवाड़ न करने की चेतावनी दे रखी है।
50 इकाइयां पीएनजी पर, 200 का टारगेट
उन्होंने बताया कि अकेले मंडी गोबिंदगढ़ में 50 लोहा इकाइयों को गैस पर किया गया है, ताकि धुआं खत्म किया जा सके। चालू वर्ष में 200 से अधिक उद्योगों को प्रदूषण की रोकथाम के लिए पीएनजी पर किया जा रहा है। कारण कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की नजर भी अक्सर मंडी गोबिंदगढ़ की आबोहवा पर बनी रहती है।