{"_id":"576c10454f1c1b5964b4936d","slug":"verdict-10-lakh-fine-on-two-doctors-bhatinda-verdict","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्राइवेट अस्पताल के दो डॉक्टरों को 10 लाख जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्राइवेट अस्पताल के दो डॉक्टरों को 10 लाख जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा
Updated Thu, 23 Jun 2016 10:11 PM IST
विज्ञापन
supreme court
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले की उपभोक्ता अदालत ने इलाज के दौरान महिला की मौत के मामले में शहर के प्राइवेट अस्पताल के दो डॉक्टरों को 10 लाख जुर्माना पीड़ित परिवार को 45 दिनों में अदा करने के आदेश दिए हैं।
पीड़ित पक्ष के वकील बंसी लाल सचदेवा ने बताया कि जुलाई 2013 में नेशनल कॉलोनी बठिंडा निवासी कत्तर सिंह की पत्नी सरबजीत कौर ने शहर के 80 फुट रोड पर स्थित छाबड़ा अस्पताल से किडनी से स्टोन का ऑपरेशन डॉ. विकास छाबड़ा और डॉ. डीके शर्मा से करवाया था। इसके बाद 19 जुलाई 2013 में सरबजीत कौर की हालत ज्यादा खराब हो गई।
डॉक्टरों ने उसे लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में रेफर कर दिया। इसके बाद उसकी वहां इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्होंने बताया कि महिला की मौत होने के बाद परिजनों ने उक्त दोनों डॉक्टरों पर इलाज के दौरान कोताही करने का आरोप लगाया था। उन्होंने डिप्टी कमिश्नर को एक शिकायत दी।
विज्ञापन
इस मामले मेें पीड़ित परिवार को फरीदकोट के अस्पताल भेज दिया था, जहां पर फरीदकोट अस्पताल प्रशासन ने इस मामले की जांच के लिए सिविल अस्पताल बठिंडा के डॉ. एसएस रोमाणा, डॉ. मनिंदरपाल और डॉ. परमिंदर बांसल का पैनल गठित किया गया था। उन्होंने महिला मरीज की मेडिकल रिपोर्ट देखे बिना ही उक्त दोनों डॉक्टरों की ओर से बताई गई बातों पर डॉक्टरों के हक में ही रिपोर्ट तैैयार कर दी।
वकील सचदेवा ने बताया कि पीड़ित परिवार ने डॉक्टरों के पैनल की रिपोर्ट पर भी संदेह जताते हुए उक्त दोनों डॉक्टरों के खिलाफ दिसंबर 2014 को उपभोक्ता अदालत में केस दायर कर दिया था।
उन्होंने बताया कि अदालत ने तीनों सरकारी डॉक्टरों की रिपोर्ट को नकारते हुए 15 जून को पीड़ित परिवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए डॉ. विकास छाबड़ा और डॉ. डीके शर्मा को आदेश दिए कि वह 45 दिनों के अंदर पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का जुर्माना अदा करें।
विज्ञापन
पीड़ित पक्ष के वकील बंसी लाल सचदेवा ने बताया कि जुलाई 2013 में नेशनल कॉलोनी बठिंडा निवासी कत्तर सिंह की पत्नी सरबजीत कौर ने शहर के 80 फुट रोड पर स्थित छाबड़ा अस्पताल से किडनी से स्टोन का ऑपरेशन डॉ. विकास छाबड़ा और डॉ. डीके शर्मा से करवाया था। इसके बाद 19 जुलाई 2013 में सरबजीत कौर की हालत ज्यादा खराब हो गई।
विज्ञापन
डॉक्टरों ने उसे लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में रेफर कर दिया। इसके बाद उसकी वहां इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्होंने बताया कि महिला की मौत होने के बाद परिजनों ने उक्त दोनों डॉक्टरों पर इलाज के दौरान कोताही करने का आरोप लगाया था। उन्होंने डिप्टी कमिश्नर को एक शिकायत दी।
विज्ञापन
इस मामले मेें पीड़ित परिवार को फरीदकोट के अस्पताल भेज दिया था, जहां पर फरीदकोट अस्पताल प्रशासन ने इस मामले की जांच के लिए सिविल अस्पताल बठिंडा के डॉ. एसएस रोमाणा, डॉ. मनिंदरपाल और डॉ. परमिंदर बांसल का पैनल गठित किया गया था। उन्होंने महिला मरीज की मेडिकल रिपोर्ट देखे बिना ही उक्त दोनों डॉक्टरों की ओर से बताई गई बातों पर डॉक्टरों के हक में ही रिपोर्ट तैैयार कर दी।
वकील सचदेवा ने बताया कि पीड़ित परिवार ने डॉक्टरों के पैनल की रिपोर्ट पर भी संदेह जताते हुए उक्त दोनों डॉक्टरों के खिलाफ दिसंबर 2014 को उपभोक्ता अदालत में केस दायर कर दिया था।
उन्होंने बताया कि अदालत ने तीनों सरकारी डॉक्टरों की रिपोर्ट को नकारते हुए 15 जून को पीड़ित परिवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए डॉ. विकास छाबड़ा और डॉ. डीके शर्मा को आदेश दिए कि वह 45 दिनों के अंदर पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का जुर्माना अदा करें।