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लुधियानाः दुष्कर्म के बाद नाबालिग की हत्या करने वाले मामा-भांजा गिरफ्तार, मां के कारण खुला राज
Thu, 06 Feb 2020 01:34 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना(पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना(पंजाब)
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 06 Feb 2020 01:34 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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परिजनों के साथ रंजिश निकालने के लिए लाडोवाल में करीब एक साल पहले 12 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद गला दबा कर की गई। मामले में थाना लाडोवाल की पुलिस ने मामा-भांजे को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान गांव लाडोवाल के रहने वाले गुरमीत सिंह मीता और उसके भांजे रिंकू उर्फ लवली के रूप में हुई है। काफी लंबी चली जांच के बाद थाना लाडोवाल पुलिस दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने में कामयाब हुई है।
आरोपियों ने खुद को बचाने के लिए कई बार कई ड्रामे रचे और एक साल बाद भी खुद को बचा नहीं सके। दो दिन पहले जब आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया तो उनके परिजनों ने चंडीगढ़ वारंट अफसर को शिकायत कर दी। वारंट अफसर ने देर रात थाने में रेड की तो वहां आरोपियों पर मामला दर्ज के कागजात दिखाए तो वारंट अफसर वहां से चले गए। पुलिस आरोपियों से पूछताछ करने में जुटी है।
थाना लाडोवाल के एसएचओ सब इंस्पेक्टर बलविंदर सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों के पड़ोस में एक प्रवासी मजदूर का परिवार रहता था। जनवरी 2019 में आरोपियों ने पीछे से बिना किसी को बताए पेड़ काट दिया था। जमीन मालिक ने आकर पूछताछ तो पता चला कि आरोपियों ने पेड़ काटा है। जिसके बाद दोनों आरोपियों को माफी मांगनी पड़ी। आरोपियों ने दिल में रंजिश रख ली कि प्रवासी मजदूरों की वजह से उन्हें माफी मांगनी पड़ी। आरोपी कोई मौका देख रहे थे, ताकि प्रवासी मजदूरों को दबा सके।
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प्रवासी मजदूर और उसकी पत्नी दिहाड़ी पर काम करने के लिए पास के खेतों में चले जाते थे, जबकि बच्ची स्कूल चली जाती थी। कुछ समय बाद बच्ची ने पढ़ाई छोड़ दी और घर पर ही रहने लगी थी। बच्ची के परिजन काम पर चले जाते थे और बच्ची पीछे से अकेली घर पर रहती थी। आरोपी मामा भांजा ने प्रवासी मजदूर परिवार से रंजिश निकालने के लिए प्लानिंग बनाई। आरोपियों ने मौका देख कर घर में घुस गए और बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। बच्ची जब तड़प तड़प कर बेहोश हो गई तो आरोपियों ने खुद को बचाने के लिए गला दबा कर उसकी हत्या कर दी।
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आरोपियों ने खुद को बचाने के लिए कई बार कई ड्रामे रचे और एक साल बाद भी खुद को बचा नहीं सके। दो दिन पहले जब आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया तो उनके परिजनों ने चंडीगढ़ वारंट अफसर को शिकायत कर दी। वारंट अफसर ने देर रात थाने में रेड की तो वहां आरोपियों पर मामला दर्ज के कागजात दिखाए तो वारंट अफसर वहां से चले गए। पुलिस आरोपियों से पूछताछ करने में जुटी है।
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थाना लाडोवाल के एसएचओ सब इंस्पेक्टर बलविंदर सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों के पड़ोस में एक प्रवासी मजदूर का परिवार रहता था। जनवरी 2019 में आरोपियों ने पीछे से बिना किसी को बताए पेड़ काट दिया था। जमीन मालिक ने आकर पूछताछ तो पता चला कि आरोपियों ने पेड़ काटा है। जिसके बाद दोनों आरोपियों को माफी मांगनी पड़ी। आरोपियों ने दिल में रंजिश रख ली कि प्रवासी मजदूरों की वजह से उन्हें माफी मांगनी पड़ी। आरोपी कोई मौका देख रहे थे, ताकि प्रवासी मजदूरों को दबा सके।
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प्रवासी मजदूर और उसकी पत्नी दिहाड़ी पर काम करने के लिए पास के खेतों में चले जाते थे, जबकि बच्ची स्कूल चली जाती थी। कुछ समय बाद बच्ची ने पढ़ाई छोड़ दी और घर पर ही रहने लगी थी। बच्ची के परिजन काम पर चले जाते थे और बच्ची पीछे से अकेली घर पर रहती थी। आरोपी मामा भांजा ने प्रवासी मजदूर परिवार से रंजिश निकालने के लिए प्लानिंग बनाई। आरोपियों ने मौका देख कर घर में घुस गए और बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। बच्ची जब तड़प तड़प कर बेहोश हो गई तो आरोपियों ने खुद को बचाने के लिए गला दबा कर उसकी हत्या कर दी।
हत्या के बाद लटका दिया बच्ची का शव, ताकि लगे आत्महत्या
आरोपी इतने शातिर थे कि उन्होंने बच्ची की हत्या के बाद शव को बाहर लाकर लोहे की तार के साथ लटका दिया, लेकिन शव पूरी तरह से लटका नहीं था और जमीन पर पैर लग रहे थे। उसके बाद आरोपी खेतों में काम करने लगे कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं। दोपहर में बच्ची की मां खाना लेने के लिए घर आई तो बच्ची का शव लटकता देख उसके होश उड़ गए। उसके चिल्लाने पर आरोपी भी भाग कर पास में आ गए और ड्रामा किया बच्ची को उतार कर खुद ही अस्पताल ले गए। जहां पता चला कि बच्ची की माौत हो गई। पोस्टमार्टम के दौरान डाक्टरों ने उसके स्वैब भी जांच के लिए भेज दिए थे।
मां को हुआ शक तो हुआ पर्दाफाश
बच्ची की मां को शक हुआ कि उसकी बच्ची की हत्या आरोपियों ने की है। कुछ दिन बीतने के बाद बच्ची की मां ने इसकी शिकायत पुलिस को दी। जब पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ करनी चाही तो आरोपियों ने खुद को बचाने के लिए धरने प्रदर्शन किए। काफी दिन तक पुलिस कार्रवाई का विरोध हुआ। जिस कारण पुलिस को भी चुप करना पड़ा। कुछ समय बाद पुलिस के पास पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई। जिसमें पता चला कि दुष्कर्म के बाद गला दबा बच्ची की हत्या की गई है। पुलिस ने इस मामले में जून में परचा दर्ज कर लिया।
आरोपियों से पूछताछ कि तो आरोपियों ने रमन नाम के प्रवासी मजदूर का नाम बता दिया। पुलिस ने रमन का बिहार का सारा एड्रेस पता कराया और उसे काबू कर पूछताछ की। रमन ने पुलिस को बताया कि आरोपी बच्ची के परिजनों द्वारा की जा रही कार्रवाई से उससे पूछताछ करते थे। पुलिस ने पहले रमन को नामजद किया और बाद में खुद ही उसे मामले से निकाल दिया। जब आरोपियों को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया तो आरोपियों की मां गांव के सरपंच के पास चली गई। रास्ते में उसकी हादसे में मौत हो गई।
फिर आरोपियों ने खुद को बचाने के लिए पुलिस कार्रवाई पर आरोप लगाए कि उनकी वजह से परेशान मां की हादसे में मौत हो गई। पुलिस एक बार फिर चुप बैठ गई, लेकिन पुलिस अंदर खाते अपनी कार्रवाई में जुटी रही। दो महीने बाद पुलिस ने फिर आरोपियों से पूछताछ की तो आरोपी मामा गुरमीत मीता ने सारी कहानी पुलिस को बताई। लेकिन आरोपियों ने खुद को बचाने के लिए थाने में वारंट अफसर की रेड करवा दी, लेकिन पुलिस ने दोनों आरोपियों की हत्या मामले में गिरफ्तारी डाल रखी थी, जिस कारण वारंट अफसर को जांच के बाद लौटना पड़ा।
मां को हुआ शक तो हुआ पर्दाफाश
बच्ची की मां को शक हुआ कि उसकी बच्ची की हत्या आरोपियों ने की है। कुछ दिन बीतने के बाद बच्ची की मां ने इसकी शिकायत पुलिस को दी। जब पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ करनी चाही तो आरोपियों ने खुद को बचाने के लिए धरने प्रदर्शन किए। काफी दिन तक पुलिस कार्रवाई का विरोध हुआ। जिस कारण पुलिस को भी चुप करना पड़ा। कुछ समय बाद पुलिस के पास पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई। जिसमें पता चला कि दुष्कर्म के बाद गला दबा बच्ची की हत्या की गई है। पुलिस ने इस मामले में जून में परचा दर्ज कर लिया।
आरोपियों से पूछताछ कि तो आरोपियों ने रमन नाम के प्रवासी मजदूर का नाम बता दिया। पुलिस ने रमन का बिहार का सारा एड्रेस पता कराया और उसे काबू कर पूछताछ की। रमन ने पुलिस को बताया कि आरोपी बच्ची के परिजनों द्वारा की जा रही कार्रवाई से उससे पूछताछ करते थे। पुलिस ने पहले रमन को नामजद किया और बाद में खुद ही उसे मामले से निकाल दिया। जब आरोपियों को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया तो आरोपियों की मां गांव के सरपंच के पास चली गई। रास्ते में उसकी हादसे में मौत हो गई।
फिर आरोपियों ने खुद को बचाने के लिए पुलिस कार्रवाई पर आरोप लगाए कि उनकी वजह से परेशान मां की हादसे में मौत हो गई। पुलिस एक बार फिर चुप बैठ गई, लेकिन पुलिस अंदर खाते अपनी कार्रवाई में जुटी रही। दो महीने बाद पुलिस ने फिर आरोपियों से पूछताछ की तो आरोपी मामा गुरमीत मीता ने सारी कहानी पुलिस को बताई। लेकिन आरोपियों ने खुद को बचाने के लिए थाने में वारंट अफसर की रेड करवा दी, लेकिन पुलिस ने दोनों आरोपियों की हत्या मामले में गिरफ्तारी डाल रखी थी, जिस कारण वारंट अफसर को जांच के बाद लौटना पड़ा।