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लुधियाना ब्लास्ट : लावारिस कार और मोबाइल के जरिए बम धमाके के आरोपियों तक पहुंचीं जांच एजेंसियां
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लुधियाना। अदालत परिसर में बम ब्लास्ट करने वाला आरोपी गगनदीप सिंह पहले ही दिन से जांच एजेंसियों के लिए सुराग छोड़ता चला गया। जांच के दौरान पहले लावारिस कार और बाद में वहां से मिले मोबाइल फोन और डोंगल के जरिए पुलिस आरोपी गगनदीप तक पहुंची और उसके तार सेंट्रल जेल तक पहुंचे। जिसके बाद आरोपियों को काबू किया गया।
जब अदालत परिसर में ब्लास्ट हुआ तो तुरंत जांच शुरु कर दी गई। कुछ समय बाद चंडीगढ़ और दिल्ली से केंद्रीय जांच एजेसियां भी पहुंच गई। पहले तो अलग अलग जांच एजेंसियों ने वहां से सबूत जुटाए। काफी समय तक शव को वहां से हटाया ही नहीं गया। जांच के दौरान पहले तो मृतक गगनदीप सिंह की दाई बाजू पर एक टैटू मिला। जिसके बाद पुलिस अधिकारियों ने जांच आगे बढ़ा दी गई।
ब्लास्ट के बाद पुलिस की तरफ से पार्किंग एरिया में खड़ी सभी कारों और दो पहिया वाहन को हटवा दिया गया। कुछ कारों को पुलिस ने खुद हटाया गया। लेकिन जांच दौरान एजेंसियों को देर रात पता चला कि एक कार नीचे लावारिस हालत में खड़ी है। जिसमें जांच की गई तो एजेंसियों को कुछ सुराग मिले। उसके बाद मृतक के पास मिले मोबाइल को देखा तो वह टूटा पड़ा था। डोंगल की जांच की गई तो पुलिस को नंबर मिले।
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सूत्र बताते हैं कि जब डोंगल की जांच की गई तो पता चला कि कुछ इंटरनेट कॉलिंग हुई है। जिसमें से चार से पांच कॉल्स देश में और बाकी विदेश में की गई है। जिसके बाद जांच एजेंसिया कड़ी दर कड़ी को जोड़ती गई और जांच एजेंसियों को पता चला कि मृतक गगनदीप सिंह है और जेल में उसकी आरोपियों से बात हुई है। आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस और एजेंसियों को लावारिस कार, मोबाइल फोन और डोंगल ने काफी मदद की।
परिवार वालों ने खुद पुलिस के साथ साधा था संपर्क!
बताया जा रहा है कि गगनदीप सिंह जब घर से निकला था तो उसने अपने परिवार वालों को बताया था कि वह कोर्ट कंप्लेक्स वकील से मिलने के लिए जा रहा है। कुछ समय बाद कोर्ट में ब्लास्ट होता है और परिवार वालों को जब सूचना मिलती है कि लुधियाना अदालत परिसर में बम ब्लास्ट हुआ है। गगन के परिवार वालों ने उससे संपर्क साधना शुरु कर दिया, लेकिन उससे संपर्क नहीं होौ सका उसका फोन भी बंद था।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार देर शाम तक जब गगन घर नहीं पहुंचा तो परिवारप वालों ने पुलिस के साथ संपर्क किया कि गगन वहां गया था और उसका कुछ पता नहीं चल पाया था। जिसके बाद पुलिस ने जांच की सुई उधर घुमाई और पता चला कि बम धमाके में मारा गया व्यक्ति आरोपी गगन ही है।
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जब अदालत परिसर में ब्लास्ट हुआ तो तुरंत जांच शुरु कर दी गई। कुछ समय बाद चंडीगढ़ और दिल्ली से केंद्रीय जांच एजेसियां भी पहुंच गई। पहले तो अलग अलग जांच एजेंसियों ने वहां से सबूत जुटाए। काफी समय तक शव को वहां से हटाया ही नहीं गया। जांच के दौरान पहले तो मृतक गगनदीप सिंह की दाई बाजू पर एक टैटू मिला। जिसके बाद पुलिस अधिकारियों ने जांच आगे बढ़ा दी गई।
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ब्लास्ट के बाद पुलिस की तरफ से पार्किंग एरिया में खड़ी सभी कारों और दो पहिया वाहन को हटवा दिया गया। कुछ कारों को पुलिस ने खुद हटाया गया। लेकिन जांच दौरान एजेंसियों को देर रात पता चला कि एक कार नीचे लावारिस हालत में खड़ी है। जिसमें जांच की गई तो एजेंसियों को कुछ सुराग मिले। उसके बाद मृतक के पास मिले मोबाइल को देखा तो वह टूटा पड़ा था। डोंगल की जांच की गई तो पुलिस को नंबर मिले।
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सूत्र बताते हैं कि जब डोंगल की जांच की गई तो पता चला कि कुछ इंटरनेट कॉलिंग हुई है। जिसमें से चार से पांच कॉल्स देश में और बाकी विदेश में की गई है। जिसके बाद जांच एजेंसिया कड़ी दर कड़ी को जोड़ती गई और जांच एजेंसियों को पता चला कि मृतक गगनदीप सिंह है और जेल में उसकी आरोपियों से बात हुई है। आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस और एजेंसियों को लावारिस कार, मोबाइल फोन और डोंगल ने काफी मदद की।
परिवार वालों ने खुद पुलिस के साथ साधा था संपर्क!
बताया जा रहा है कि गगनदीप सिंह जब घर से निकला था तो उसने अपने परिवार वालों को बताया था कि वह कोर्ट कंप्लेक्स वकील से मिलने के लिए जा रहा है। कुछ समय बाद कोर्ट में ब्लास्ट होता है और परिवार वालों को जब सूचना मिलती है कि लुधियाना अदालत परिसर में बम ब्लास्ट हुआ है। गगन के परिवार वालों ने उससे संपर्क साधना शुरु कर दिया, लेकिन उससे संपर्क नहीं होौ सका उसका फोन भी बंद था।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार देर शाम तक जब गगन घर नहीं पहुंचा तो परिवारप वालों ने पुलिस के साथ संपर्क किया कि गगन वहां गया था और उसका कुछ पता नहीं चल पाया था। जिसके बाद पुलिस ने जांच की सुई उधर घुमाई और पता चला कि बम धमाके में मारा गया व्यक्ति आरोपी गगन ही है।