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यूक्रेन से लौटी छात्रा ने बताई आपबीती: दो दिन मेट्रो स्टेशन तो दो दिन फ्लैट के बेसमेंट में गुजारे, जिंदगी भर नहीं भूलेगा वहां का मंजर
Sun, 06 Mar 2022 11:41 AM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sun, 06 Mar 2022 11:41 AM IST
सार
सलेम टाबरी इलाके में रहने वाले गुरलीन कौर ने बताया कि जंग शुरू होने के तुरंत बाद उन्हें मेट्रो स्टेशन के बेसमेंट में भेज दिया गया। दो दिन वहां रहने के बाद वह दो दिन फ्लैटों के नीचे बेसमेंट में रहे।
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लुधियाना में अपने घर लौटीं गुरलीन कौर।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
रूस और यूक्रेन की बीच चल रही जंग के कारण छात्रों में वापस लौटने के बाद भी काफी खौफ है। छात्र अपने आप को काफी खुशकिस्मत समझ रहे हैं कि वह वापस लौट पाए। शुक्रवार की देर रात को यूक्रेन से लुधियाना पहुंची छात्रा ने आप बीती सुनाई, जिसे सुनकर सभी हैरान रह गए।
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सलेम टाबरी इलाके में रहने वाले गुरलीन कौर ने बताया कि जंग शुरू होने के तुरंत बाद उन्हें मेट्रो स्टेशन के बेसमेंट में भेज दिया गया। दो दिन वहां रहने के बाद वह दो दिन फ्लैटों के नीचे बेसमेंट में रहे। किसी तरह से वहां से निकले और ट्रेन के जरिये रोमानिया बॉर्डर तक पहुंच पाए। वहां से फ्लाइट मिली और दिल्ली पहुंचे।
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गुरलीन कौर ने बताया कि वह चार साल पहले एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए यूक्रेन के खारकीव गई थी। पहले ही उन्हें पता चल गया था कि हालात खराब हो रहे हैं। 23 फरवरी की सुबह जैसे ही जंग शुरू हुई तो वह सभी साथी मिल वहां की सुपर मार्केट गए। वहां से खाने पीने का सामान लिया और वापस लौटे। खाने का दस दिन का सामान अंदर रख लिया था। जब दोबारा गए तो सुपर मार्केट में सामान ही खत्म हो चुका था। उसके बाद उन्हें मेट्रो स्टेशन के अंदर बेसमेंट में भेज दिया ताकि सुरक्षित रहे। उसके बाद दो दिन वहां रहे और दो दिन उन्हें फ्लैट के बेसमेंट में रहना पड़ा। खाना भी सोच समझ कर खाना पड़ता था कि सामान खत्म न हो जाए।
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गुरलीन ने कहा कि इस समय यूक्रेन में काफी दिक्कत में है। अब खारकीव में ट्रेन भी सील कर दी गई हैं, कोई ट्रेन नहीं चल रही। अब उनकी मेडिकल शिक्षा में काफी दिक्कत आएगी। अगर केंद्र सरकार कोई हल करेगी तो कुछ हो सकता है, नहीं तो उनका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। बाकी अभी कई और लोग भी हैं जो वहां फंसे हुए हैं। यूक्रेन में मौजूद इंडियन एंबेसी कोई मदद नहीं कर रही। वहां से सिर्फ यह कहा जा रहा है कि वह दूसरे देश के बार्डर तक पहुंच जाएं वहां से आगे ले जाना उनकी जिम्मेदारी होगी।