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पाई-पाई को मोहताज किसान सड़क पर उतरने को तैयार

Sat, 16 Apr 2016 10:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना Updated Sat, 16 Apr 2016 10:03 PM IST
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farmers, wait for crop money in ludhiana, wait in ludhiana
‌किसानाों का इंतजार
मंडी में जैसे तैसे अपनी फसल बेच पेमेंट की आस लगाए बैठा किसान अब भी पाई-पाई को मोहताज है। गुजारा करने के लिए आढ़ती की मिन्नत करके कुछ रकम जुटा रहा है। केंद्र सरकार के अड़ंगे के कारण अब गेहूं खरीद के लिए आवश्यक कैश क्रेडिट लिमिट जारी नहीं हो पाई है। सरकार की नीतियों से परेशान किसान अब आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। दो तीन दिन में आढ़ती, किसान और मजदूर जत्थेबंदियों की अलग अलग बैठकों में आंदोलन की रणनीति को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
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पिछले साल गेहूं और धान की खरीद के वक्त भी केंद्र सरकार ने कैश क्रेडिट लिमिट को काफी मशक्कत के बाद जारी किया था, तब भी सूबे के कई किसानों को दो-तीन माह बाद पेमेंट जारी हुई थी। पेमेंट के लिए किसानों और आढ़तियों को सड़क पर उतरना पड़ा था। एक तरफ दिनों दिन मंडियों में गेहूं की आमद बढ़ रही है, वहीं किसान को पेमेंट न होने से सरकार, अधिकारियों और आढ़तियों की दिक्कतें बढ़ रही हैं।
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फेडरेशन ऑफ आढ़ती एसोसिएशन ऑफ पंजाब के प्रधान विजय कालरा का कहना है कि हरियाणा में जिन किसानों ने सात अप्रैल को गेहूं बेचा, उनको आठ अप्रैल को पेमेंट हो गई। पंजाब में पंद्रह दिन से एक भी पैसे की अदायगी नहीं हुई है। किसानों की मजबूरी समझते हुए आढ़ती अपने पास से कुछ पेमेंट कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि पंजाब की मंडियों में स्थिति लगातार विस्फोटक हो रही है। हालात यह है कि पिछले सीजन की मजदूरी भी मजदूरों को अभी तक नहीं मिली है। पंजाब में यह रकम करीब अस्सी करोड़ रुपये बनती है। आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए एसोसिएशन की 21 अप्रैल को खन्ना में बैठक बुलाई गई है। 

भारतीय किसान यूनियन एकता के महासचिव सुखदेव सिंह ने भी सरकार की नीति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहले से कर्ज में डूबा किसान पेमेंट में देरी बर्दाश्त नहीं कर सकता। अभी तक एक भी किसान को पेमेंट नहीं मिली है। हालात पर चर्चा और आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए रविवार को यूनियन की बैठक बुलाई गई है।


आढ़तिया एसोसिएशन ऑफ पंजाब के महासचिव जसविंदर सिंह राणा का तर्क है कि कैश क्रेडिट लिमिट की लड़ाई सूबा सरकार को केंद्र से वक्त रहते लड़नी चाहिए थी। पिछली दो खरीद में भी लिमिट देर से जारी हुई थी, लेकिन सरकार ने इससे कोई सबक नहीं लिया। उन्होंने कहा कि यदि दो तीन दिन में मामला न सुलझा तो एसोसिएशन की बैठक बुलाकर संघर्ष का एलान किया जाएगा।
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