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रेपो रेट में वृद्धि से उद्यमी परेशान
अमर उजाला, लुधियाना
Updated Tue, 29 Oct 2013 11:13 PM IST
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भारतीय रिजर्व बैंक (आईबीआई) ने मंगलवार को रेपो रेट में .25 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि कर दी है। इसके साथ ही होम लोन, ऑटो लोन समेत अन्य सभी तरह के ऋणों पर ब्याज महंगा होने की आशंका है।
उधर उद्योग जगत एवं माहिरों ने आरबीआई के इस कदम की आलोचना की है। उद्यमियों का कहना है कि महंगे ब्याज से उद्योग को ओवरसीज मार्केट में टिकना लगातार कठिन हो रहा है। महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी पर ब्याज का और बोझ बढ़ेगा।
बैंक अधिकारी के अनुसार यदि किसी ने पंद्रह साल के लिए बीस लाख रुपये का लोन लिया है तो उसकी मासिक किश्त तीन सौ रुपये बढ़ जाएगी। लेकिन शर्त यह है कि बैंक रेपो रेट का सारा बोझ ग्राहक पर पासऑन कर दें।
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उधर फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट्स आर्गेनाइजेशन (फियो) के रीजनल चेयरमैन एससी रल्हन का कहना है कि सरकारी नीतियों के कारण देश की आर्थिक ग्रोथ की दर नौ फीसदी के उच्चतम स्तर से फिसल कर 4.8 फीसदी पर पहुंच चुकी है। सरकार और आरबीआई नए प्रयोग कर रहे हैं।
इन प्रयोगों से देश का मैन्यूफैक्चरिंग बेस चरमरा रहा है, निर्यात के मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ रही हैं। निर्यातक को आठ से दस फीसदी तक ब्याज दर पर लोन मिल रहा है। विदेशों में यह जीरो से पांच फीसदी के बीच है। रेपो रेट बढ़ने से लोन और महंगा हो जाएगा, इसका सीधा असर निर्यात की ग्रोथ पर होगा।
इंडियन बाईसाइकिल मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान सतीश ढांडा कहते हैं कि महंगे ब्याज के दौर में इंडस्ट्री के लिए टफ-टाइम है। इसे मैनेज करना मुश्किल हो रहा है। उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि ओवरसीज मार्के ट की आर्थिक सुस्ती से मुकाबला करना मुश्किल हो रहा है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट सुशील भक्कू का कहना है कि रेपो रेट बढ़ने से बैंकों को आरबीआई से लोन लेना महंगा हो जाएगा। अब देखना यह है कि बैंक इस बोझ को सहन करते हैं या ग्राहक पर डालते हैं।
यदि बैंकों ने ब्याज की दरें बढ़ाईं तो इससे लोगों की जेब पर बोझ बढ़ेगा। उधर कंपनी सेक्रेटरी एवं आरसीएस लिमिटेड के डायरेक्टर आरसी सिंघल ने कहा कि इससे कर्ज लेना और महंगा हो जाएगा।
क्या है रेपो रेट
रेपो रेट वह दर है, जिस पर बैंक केंद्रीय बैंक से छोटी अवधि के लिए कर्ज लेते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में .25 बेसिस प्वाइंट (आधार अंक) की इसमें वृद्धि की है। इसके साथ ही अब रेपो रेट की दर 7.75 फीसदी हो गई है। बैंक हर रोज केंद्रीय बैंकों से तकरीबन एक लाख करोड़ के ऋण छोटी अवधि के लिए लेते हैं। अब उन पर ब्याज की दर बढ़ जाएगी। काबिलेजिक्र है कि पिछले दो माह में आरबीआई ने दो बार रेपो रेट में इजाफा किया है। इससे पहले सितंबर में .25 फीसदी रेपो रेट बढ़ाया था।
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उधर उद्योग जगत एवं माहिरों ने आरबीआई के इस कदम की आलोचना की है। उद्यमियों का कहना है कि महंगे ब्याज से उद्योग को ओवरसीज मार्केट में टिकना लगातार कठिन हो रहा है। महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी पर ब्याज का और बोझ बढ़ेगा।
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बैंक अधिकारी के अनुसार यदि किसी ने पंद्रह साल के लिए बीस लाख रुपये का लोन लिया है तो उसकी मासिक किश्त तीन सौ रुपये बढ़ जाएगी। लेकिन शर्त यह है कि बैंक रेपो रेट का सारा बोझ ग्राहक पर पासऑन कर दें।
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उधर फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट्स आर्गेनाइजेशन (फियो) के रीजनल चेयरमैन एससी रल्हन का कहना है कि सरकारी नीतियों के कारण देश की आर्थिक ग्रोथ की दर नौ फीसदी के उच्चतम स्तर से फिसल कर 4.8 फीसदी पर पहुंच चुकी है। सरकार और आरबीआई नए प्रयोग कर रहे हैं।
इन प्रयोगों से देश का मैन्यूफैक्चरिंग बेस चरमरा रहा है, निर्यात के मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ रही हैं। निर्यातक को आठ से दस फीसदी तक ब्याज दर पर लोन मिल रहा है। विदेशों में यह जीरो से पांच फीसदी के बीच है। रेपो रेट बढ़ने से लोन और महंगा हो जाएगा, इसका सीधा असर निर्यात की ग्रोथ पर होगा।
इंडियन बाईसाइकिल मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान सतीश ढांडा कहते हैं कि महंगे ब्याज के दौर में इंडस्ट्री के लिए टफ-टाइम है। इसे मैनेज करना मुश्किल हो रहा है। उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि ओवरसीज मार्के ट की आर्थिक सुस्ती से मुकाबला करना मुश्किल हो रहा है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट सुशील भक्कू का कहना है कि रेपो रेट बढ़ने से बैंकों को आरबीआई से लोन लेना महंगा हो जाएगा। अब देखना यह है कि बैंक इस बोझ को सहन करते हैं या ग्राहक पर डालते हैं।
यदि बैंकों ने ब्याज की दरें बढ़ाईं तो इससे लोगों की जेब पर बोझ बढ़ेगा। उधर कंपनी सेक्रेटरी एवं आरसीएस लिमिटेड के डायरेक्टर आरसी सिंघल ने कहा कि इससे कर्ज लेना और महंगा हो जाएगा।
क्या है रेपो रेट
रेपो रेट वह दर है, जिस पर बैंक केंद्रीय बैंक से छोटी अवधि के लिए कर्ज लेते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में .25 बेसिस प्वाइंट (आधार अंक) की इसमें वृद्धि की है। इसके साथ ही अब रेपो रेट की दर 7.75 फीसदी हो गई है। बैंक हर रोज केंद्रीय बैंकों से तकरीबन एक लाख करोड़ के ऋण छोटी अवधि के लिए लेते हैं। अब उन पर ब्याज की दर बढ़ जाएगी। काबिलेजिक्र है कि पिछले दो माह में आरबीआई ने दो बार रेपो रेट में इजाफा किया है। इससे पहले सितंबर में .25 फीसदी रेपो रेट बढ़ाया था।