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‘बेटों को छोड़ने के लिए एसीपी, एसएचओ ने लिए तीन लाख’
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Sat, 16 Apr 2016 09:56 PM IST
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लुधियाना में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ रोष प्रर्दशन करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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थाना शिमलापुरी पुलिस ने दो दिन पहले लूट की योजना बनाते चार युवकों को गिरफ्तार किया था। उनमें शामिल दो भाइयों मनप्रीत सिंह और जगजीत सिंह के परिजनों ने एसीपी आत्मनगर हरिंदर सिंह, थाना शिमलापुरी के एसएचओ से लेकर पूरे थाने के मुलाजिमों पर तीन लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है।
परिजनों ने का आरोप था कि तीन लाख रुपये लेने के बाद भी उनके बच्चों को छोड़ने के बजाय उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज कर दिया गया। इस मामले में उन्होंने शनिवार को कमिश्नर दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। उन्होंने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर सभी पुलिस मुलाजिमों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। पुलिस कमिश्नर ने उन्हें आश्वासन दिया और मामले की जांच आईपीएस अधिकारी एडीसीपी टू संदीप गर्ग को सौंप दी।
मनप्रीत सिंह और जगजीत सिंह के मामा सतनाम ने बताया कि दस अप्रैल को मनप्रीत और जगजीत घर पर थे। इसी दौरान थाना शिमलापुरी की पुलिस उनके घर आई और दोनों को अपने साथ ले गई। पता चला कि उन्हें लूट के मामले में गिरफ्तार किया गया है। सतनाम ने आरोप लगाया कि पुलिस पार्टी ने जांच की, लेकिन कोई भी मामला सामने नहीं आया। उसके बाद एसीपी, एसएचओ, एएसआई समेत नौ मुलाजिमों ने उनसे पांच लाख रुपये की मांग की और कहा कि दोनों भाइयों को छोड़ दिया जाएगा।
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सतनाम ने आरोप लगाया कि उनसे तीन लाख रुपये इकट्ठा हुए जो उन्होंने पुलिस मुलाजिमों को दे दिए, लेकिन उनके भांजों को छोड़ने के बजाय पुलिस मुलाजिमों ने 14 अप्रैल को उनके खिलाफ मामला भी दर्ज कर दिया। उन्होंने पुलिस से बात की तो उल्टा उन्हें ही धमकियां दी गई। इलाके के लोग शनिवार को पुलिस कमिश्नर दफ्तर पहुंचे और प्रदर्शन किया।
इस मामले में एडीसीपी टू संदीप गर्ग ने कहा कि पैसे लेने वाला मामला गंभीर है। पीड़ित परिवार को पूरा इंसाफ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी मुलाजिम ने किसी केस में रिश्वत ली है तो उसके खिलाफ बनती कार्रवाई की जाएगी। किसी अधिकारी या फिर मुलाजिम को बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस ने सभी आरोपों को नकारा
एसएचओ शिमलापुरी इंस्पेक्टर बलविंदर सिंह ने प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को नकारा है। उन्होंने कहा कि जगदीप सिंह, मनप्रीत सिंह, अमनदीप सिंह और हरकीरत को 14 अप्रैल को उस समय काबू किया गया था, जब यह लोग किसी बड़ी डकैती की योजना बना रहे थे।
पुलिस को यह भी सूचना मिली थी कि इन लोगों ने कुछ दिन पहले ही माल रोड से एक कारोबारी से मारपीट कर उससे साढे़ पांच लाख रुपये लूटे हैं। पुलिस ने सूचना के आधार पर दबिश देकर चारों आरोपियों को काबू किया, जबकि एक आरोपी नवजोत भाग गया। लूट के सारे पैसे भी नवजोत के पास ही हैं।
पुलिस उसकी तलाश कर रही है। उन्होंने रिश्वत लेने के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि आलाधिकारियों को भी इस गिरोह के बारे में बताया गया था। कल पुलिस ने इनको रिमांड पर लिया था, जबकि आज इनको अदालत ने ज्यूडिशियल हिरासत में जेल भेज दिया है।
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परिजनों ने का आरोप था कि तीन लाख रुपये लेने के बाद भी उनके बच्चों को छोड़ने के बजाय उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज कर दिया गया। इस मामले में उन्होंने शनिवार को कमिश्नर दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। उन्होंने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर सभी पुलिस मुलाजिमों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। पुलिस कमिश्नर ने उन्हें आश्वासन दिया और मामले की जांच आईपीएस अधिकारी एडीसीपी टू संदीप गर्ग को सौंप दी।
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मनप्रीत सिंह और जगजीत सिंह के मामा सतनाम ने बताया कि दस अप्रैल को मनप्रीत और जगजीत घर पर थे। इसी दौरान थाना शिमलापुरी की पुलिस उनके घर आई और दोनों को अपने साथ ले गई। पता चला कि उन्हें लूट के मामले में गिरफ्तार किया गया है। सतनाम ने आरोप लगाया कि पुलिस पार्टी ने जांच की, लेकिन कोई भी मामला सामने नहीं आया। उसके बाद एसीपी, एसएचओ, एएसआई समेत नौ मुलाजिमों ने उनसे पांच लाख रुपये की मांग की और कहा कि दोनों भाइयों को छोड़ दिया जाएगा।
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सतनाम ने आरोप लगाया कि उनसे तीन लाख रुपये इकट्ठा हुए जो उन्होंने पुलिस मुलाजिमों को दे दिए, लेकिन उनके भांजों को छोड़ने के बजाय पुलिस मुलाजिमों ने 14 अप्रैल को उनके खिलाफ मामला भी दर्ज कर दिया। उन्होंने पुलिस से बात की तो उल्टा उन्हें ही धमकियां दी गई। इलाके के लोग शनिवार को पुलिस कमिश्नर दफ्तर पहुंचे और प्रदर्शन किया।
इस मामले में एडीसीपी टू संदीप गर्ग ने कहा कि पैसे लेने वाला मामला गंभीर है। पीड़ित परिवार को पूरा इंसाफ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी मुलाजिम ने किसी केस में रिश्वत ली है तो उसके खिलाफ बनती कार्रवाई की जाएगी। किसी अधिकारी या फिर मुलाजिम को बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस ने सभी आरोपों को नकारा
एसएचओ शिमलापुरी इंस्पेक्टर बलविंदर सिंह ने प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को नकारा है। उन्होंने कहा कि जगदीप सिंह, मनप्रीत सिंह, अमनदीप सिंह और हरकीरत को 14 अप्रैल को उस समय काबू किया गया था, जब यह लोग किसी बड़ी डकैती की योजना बना रहे थे।
पुलिस को यह भी सूचना मिली थी कि इन लोगों ने कुछ दिन पहले ही माल रोड से एक कारोबारी से मारपीट कर उससे साढे़ पांच लाख रुपये लूटे हैं। पुलिस ने सूचना के आधार पर दबिश देकर चारों आरोपियों को काबू किया, जबकि एक आरोपी नवजोत भाग गया। लूट के सारे पैसे भी नवजोत के पास ही हैं।
पुलिस उसकी तलाश कर रही है। उन्होंने रिश्वत लेने के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि आलाधिकारियों को भी इस गिरोह के बारे में बताया गया था। कल पुलिस ने इनको रिमांड पर लिया था, जबकि आज इनको अदालत ने ज्यूडिशियल हिरासत में जेल भेज दिया है।