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मोहल्ले में हुई मारपीट के बाद जंग का मैदान बना सिविल अस्पताल
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मोहल्ले में हुई मारपीट के बाद जंग का मैदान बना सिविल अस्पताल
रास्ता न मिलने को लेकर शिवाजी नगर में हुई थी दो पक्षों में मारपीट
इमरजेंसी के शीशे तोड़े, डाक्टरों ने भाग कर बचाई अपनी जान
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। रास्ता न मिलने को लेकर शिवाजी नगर में दो पक्षों में रविवार देर रात मारपीट हो गई। उसके बाद एक गुट सिविल अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचद्म तो दूसरे गुट ने वहां पर भी हमला कर दिया। दोनों तरफ से कुर्सियां चली। जिससे सिविल अस्पताल की इमरजेंसी के शीशे टूट गए। वहां इलाज कराने आए मरीजों के रिश्तेदारों और अस्पताल स्टाफ ने भाग कर अपनी जान बचाई। जब लोग सिविल अस्पताल के अंदर बनी चौकी में पहुंचे तो सोए पुलिस मुलाजिम उठे ही नहीं। इसके बाद लोग थाना डिवीजन दो में पहुंचे और थाना डिवीजन दो से मुलाजिम पहुंचे जिन्होंने सोए पुलिस मुलाजिमों को उठाया और आरोपियों को काबू किया।
जानकारी के अनुसार शिवाजी नगर की गली नंबर 12 में रहने वाले मनमोहन सिंह (50) रविवार देर रात अपनी एक्टिवा पर बेटे दमनप्रीत सिंह (15) के साथ घर जा रहे थे। गली के बाहर एक व्यक्ति फोन पर किसी से बात कर रहा था। जब मनमोहन ने हार्न देकर साइड मांगी तो व्यक्ति ने अनसुना कर दिया। इसके बाद मनमोहन ने साइड से एक्टिवा निकालने की कोशिश की तो एक्टिवा युवक को लग गई। इसी बात को लेकर युवक ने अपने साथियों को बुला कर दोनों की पिटाई कर दी। दोनों बाप बेटा सिविल अस्पताल पहुंचे तो हमलावर वहां पर भी पहुंच गए। वहां कहासुनी के दौरान लोगों के बीच बचाव करा दिया। इसके बाद मनमोहन और दमनप्रीत डाक्टर रुम के बाहर खड़े थे तो हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। उन पर कुर्सियां फेंकी जिससे इमरजेंसी का शीशा टूट गया। वहां भगदड़ मच गई तो डाक्टरों ने भाग कर अपनी जान बचाई।
नींद से नहीं उठा सिविल अस्पताल चौकी का कोई मुलाजिम
हमले से घबराए लोग सिविल अस्पताल के अंदर बनी चौकी में पहुंचे तो दोनों दरवाजे बंद थे और अंदर मुलाजिम सो रहे थे। लोगों ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन मुलाजिम नहीं जागे। इसके बाद लोग थाना डिवीजन दो पहुंचे और वहां से आए मुलाजिमों ने हमलावरों को काबू किया। सिविल अस्पताल चौकी इंचार्ज एएसआई धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि सूचना मिलते ही उनके मुलाजिम पहुंच गए थे। दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। उन्होंने कहा कि डाक्टरों की तरफ से भी उनके पास शिकायत आई थी, लेकिन जिन लोगों ने शीशे तोड़े थे उन्होंने ठीक कराने का कह दिया है जिसके बाद डाक्टरों ने शिकायत वापस ले ली है।
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मुलाजिमों के न आने की बात अधिकारियों को बताई
सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में ड्यूटी देने वाले डाक्टरों ने बताया कि सिविल अस्पताल में बनी चौकी सिर्फ नाम की है। देर रात को अगर कोई पंगा होता है तो मुलाजिम सोतेे रहते हैं। दो दिन पहले भी यहां मारपीट हुई थी, लेकिन कोई मुलाजिम नहीं पहुंचा। उन्होंने इसके बारे में अपने सीनियर और पुलिस अधिकारियों को भी बता दिया है।
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रास्ता न मिलने को लेकर शिवाजी नगर में हुई थी दो पक्षों में मारपीट
इमरजेंसी के शीशे तोड़े, डाक्टरों ने भाग कर बचाई अपनी जान
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। रास्ता न मिलने को लेकर शिवाजी नगर में दो पक्षों में रविवार देर रात मारपीट हो गई। उसके बाद एक गुट सिविल अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचद्म तो दूसरे गुट ने वहां पर भी हमला कर दिया। दोनों तरफ से कुर्सियां चली। जिससे सिविल अस्पताल की इमरजेंसी के शीशे टूट गए। वहां इलाज कराने आए मरीजों के रिश्तेदारों और अस्पताल स्टाफ ने भाग कर अपनी जान बचाई। जब लोग सिविल अस्पताल के अंदर बनी चौकी में पहुंचे तो सोए पुलिस मुलाजिम उठे ही नहीं। इसके बाद लोग थाना डिवीजन दो में पहुंचे और थाना डिवीजन दो से मुलाजिम पहुंचे जिन्होंने सोए पुलिस मुलाजिमों को उठाया और आरोपियों को काबू किया।
जानकारी के अनुसार शिवाजी नगर की गली नंबर 12 में रहने वाले मनमोहन सिंह (50) रविवार देर रात अपनी एक्टिवा पर बेटे दमनप्रीत सिंह (15) के साथ घर जा रहे थे। गली के बाहर एक व्यक्ति फोन पर किसी से बात कर रहा था। जब मनमोहन ने हार्न देकर साइड मांगी तो व्यक्ति ने अनसुना कर दिया। इसके बाद मनमोहन ने साइड से एक्टिवा निकालने की कोशिश की तो एक्टिवा युवक को लग गई। इसी बात को लेकर युवक ने अपने साथियों को बुला कर दोनों की पिटाई कर दी। दोनों बाप बेटा सिविल अस्पताल पहुंचे तो हमलावर वहां पर भी पहुंच गए। वहां कहासुनी के दौरान लोगों के बीच बचाव करा दिया। इसके बाद मनमोहन और दमनप्रीत डाक्टर रुम के बाहर खड़े थे तो हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। उन पर कुर्सियां फेंकी जिससे इमरजेंसी का शीशा टूट गया। वहां भगदड़ मच गई तो डाक्टरों ने भाग कर अपनी जान बचाई।
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नींद से नहीं उठा सिविल अस्पताल चौकी का कोई मुलाजिम
हमले से घबराए लोग सिविल अस्पताल के अंदर बनी चौकी में पहुंचे तो दोनों दरवाजे बंद थे और अंदर मुलाजिम सो रहे थे। लोगों ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन मुलाजिम नहीं जागे। इसके बाद लोग थाना डिवीजन दो पहुंचे और वहां से आए मुलाजिमों ने हमलावरों को काबू किया। सिविल अस्पताल चौकी इंचार्ज एएसआई धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि सूचना मिलते ही उनके मुलाजिम पहुंच गए थे। दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। उन्होंने कहा कि डाक्टरों की तरफ से भी उनके पास शिकायत आई थी, लेकिन जिन लोगों ने शीशे तोड़े थे उन्होंने ठीक कराने का कह दिया है जिसके बाद डाक्टरों ने शिकायत वापस ले ली है।
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मुलाजिमों के न आने की बात अधिकारियों को बताई
सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में ड्यूटी देने वाले डाक्टरों ने बताया कि सिविल अस्पताल में बनी चौकी सिर्फ नाम की है। देर रात को अगर कोई पंगा होता है तो मुलाजिम सोतेे रहते हैं। दो दिन पहले भी यहां मारपीट हुई थी, लेकिन कोई मुलाजिम नहीं पहुंचा। उन्होंने इसके बारे में अपने सीनियर और पुलिस अधिकारियों को भी बता दिया है।