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राजीव गांधी की प्रतिमा पर कालिख पोतने वाले जेल से रिहा
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राजीव गांधी की प्रतिमा पर कालिख पोतने वाले जेल से रिहा
अकाली दल ने गोशा और दुगरी को लेकर निकाली रैली
अमर उजाल ब्यूरो
लुधियाना। राजीव गांधी की प्रतिमा पर कालिख पोतने के आरोपी गुरदीप गोशा और मीत पाल सिंह दुगरी बुधवार बाद दोपहर जेल से बाहर आ गए। जेल के बाहर पहले से मौजूद अकाली नेताओं ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। वही से दोनों नेताओं को जीप में खड़ा कर शहर में रैली निकाली गई। जो देर शाम को गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब पर आकर खत्म हुई। यहां पर दोनों नेताओं ने गुरुद्वारा साहिब में नतमस्तक होकर आशीर्वाद लिया। बता दें कि अदालत ने मंगलवार को दोनों नेताओं को जमानत दे दी थी, लेकिन छुट्टी के कारण उन्हें बुधवार को जेल से रिहा किया गया।
भावुक होकर पोती कालिख
शिअद यूथ विंग नेता गोशा और दुगरी ने कहा कि 34 साल बाद दंगा पीड़ितों को कुछ न्याय मिला है। इतना लंबा समय सिर्फ इसलिए लगा कि कांग्रेस पार्टी उनका बचाव करने में जुटी थी। सिखों की भावनाओं से हो रहे खिलवाड़ को देखते उन्होंने प्रतिमा पर कालिख पोती थी। ताकी कांग्रेसियों को पता चल सके कि किसी की भावना से खिलवाड़ करने का नतीजा क्या होता है। उन्होंने कहा कि नगर निगम ने जो उनके भाई की इमारत को तोड़ा है, उससे उन्हें वित्तीय नुकसान जरूर हुआ है। कोई बात नहीं सरकार आने पर इसका जवाब जरूर दिया जाएगा। वही पुलिस ने पुलिस रिमांड और न्यायिक हिरासत के दौरान कांग्रेस नेताओं का सत्ता का लाभ लेते उन्हें हर तरह से टार्चर किया।
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अकाली दल ने गोशा और दुगरी को लेकर निकाली रैली
अमर उजाल ब्यूरो
लुधियाना। राजीव गांधी की प्रतिमा पर कालिख पोतने के आरोपी गुरदीप गोशा और मीत पाल सिंह दुगरी बुधवार बाद दोपहर जेल से बाहर आ गए। जेल के बाहर पहले से मौजूद अकाली नेताओं ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। वही से दोनों नेताओं को जीप में खड़ा कर शहर में रैली निकाली गई। जो देर शाम को गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब पर आकर खत्म हुई। यहां पर दोनों नेताओं ने गुरुद्वारा साहिब में नतमस्तक होकर आशीर्वाद लिया। बता दें कि अदालत ने मंगलवार को दोनों नेताओं को जमानत दे दी थी, लेकिन छुट्टी के कारण उन्हें बुधवार को जेल से रिहा किया गया।
भावुक होकर पोती कालिख
शिअद यूथ विंग नेता गोशा और दुगरी ने कहा कि 34 साल बाद दंगा पीड़ितों को कुछ न्याय मिला है। इतना लंबा समय सिर्फ इसलिए लगा कि कांग्रेस पार्टी उनका बचाव करने में जुटी थी। सिखों की भावनाओं से हो रहे खिलवाड़ को देखते उन्होंने प्रतिमा पर कालिख पोती थी। ताकी कांग्रेसियों को पता चल सके कि किसी की भावना से खिलवाड़ करने का नतीजा क्या होता है। उन्होंने कहा कि नगर निगम ने जो उनके भाई की इमारत को तोड़ा है, उससे उन्हें वित्तीय नुकसान जरूर हुआ है। कोई बात नहीं सरकार आने पर इसका जवाब जरूर दिया जाएगा। वही पुलिस ने पुलिस रिमांड और न्यायिक हिरासत के दौरान कांग्रेस नेताओं का सत्ता का लाभ लेते उन्हें हर तरह से टार्चर किया।
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