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Ludhiana: भक्ति कोई प्रदर्शन नहीं, यह तो अंतर का भाव है, जब मन निर्मल होता है, तभी भगवान कृपा करते हैं
Sun, 09 Nov 2025 12:41 PM IST
अंकेश ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Sun, 09 Nov 2025 12:41 PM IST
सार
पंजाब के लुधियाना में दंडी स्वामी महाराज के आशीर्वाद से सिद्धपीठ दंडी स्वामी ट्रस्ट, सेवा परिकर और राधा गोविंद संकीर्तन मंडल (सेवक सिद्धपीठ) की ओर से 75वें हरिनाम संकीर्तन एवं गौलोकवासी पंडित जगदीश चंद्र कोमल महाराज के 25वें वरदान दिवस के पावन अवसर पर पंडित राज कुमार शर्मा की अध्यक्षता में 38 दिवसीय महासंकीर्तन की शुरुआत शनिवार से हुई।
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इंद्रेश उपाध्याय महाराज
- फोटो : संवाद
विस्तार
दंडी स्वामी महाराज के आशीर्वाद से सिद्धपीठ दंडी स्वामी ट्रस्ट, सेवा परिकर और राधा गोविंद संकीर्तन मंडल (सेवक सिद्धपीठ) की ओर से 75वें हरिनाम संकीर्तन एवं गौलोकवासी पंडित जगदीश चंद्र कोमल महाराज के 25वें वरदान दिवस के पावन अवसर पर पंडित राज कुमार शर्मा की अध्यक्षता में 38 दिवसीय महासंकीर्तन की शुरुआत शनिवार से हुई। 15 दिसंबर तक चलने वाले इस महासंकीर्तन की शुरुआत भारत वर्ष में प्रसिद्ध इंद्रेश उपाध्याय महाराज (श्री धाम वृंदावन) ने अपने भजनों एवं प्रवचनों से की। जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर अमृतमयी वाणी का श्रवण किया।
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सर्वप्रथम पंडित राजकुमार शर्मा व समस्त सेवकों ने इंद्रेश महाराज का स्वागत किया। इसके बाद इंद्रेश महाराज दंडी स्वामी महाराज के दरबार में नतमस्तक हुए और आशीर्वाद प्राप्त किया।
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अपने संबोधन में इंद्रेश महाराज ने कहा कि प्रथम बार सिद्धपीठ दंडी स्वामी महाराज के यहां सेवा करने का सुअवसर प्राप्त हुआ है। 2 दिन की सेवा हमें 10 वर्षो की कथा करने के फल के रूप में मिली है। 10 वर्षो से कथा कर रहे हैं, इसके फल के रूप में हमें श्री दंडी स्वामी जी ने महाराज ने दो दिन की सेवा के लिए बुलाया है। इसके बाद इंद्रेश महाराज ने ब्रजभाषा में अपने प्रवचन प्रस्तुत करते हुए ऐसा भक्तिमय वातावरण बनाया कि उपस्थित जनसमूह भाव-विभोर हो उठा। हर कोई उनके दर्शनों एवं प्रवचनों को लेकर लालायित दिखा। महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचन में श्री नारद जी एवं उनके शिष्यों के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्री नारद जी के तीन भक्त हुए हैं। ध्रुव, प्रह्लाद और चंद्रहास जिन्हें नारद जी ने दीक्षा प्रदान की है। ऐसे तो अनेक भक्त हुए हैं नारद के, लेकिन वह इन तीनों को ही अपना शिष्य बताते थे।
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उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थिति सभी के जीवन में आती है, बस उस परिस्थिति में ठाकुर जी का त्याग मत करो। कष्ट संसार में है, संसार को दुखालय कहा जाता है। यहां दुख शाश्वत रूप से रहता है उसको कोई नहीं मिटा सकता, पर उसका अनुभव होना बंद हो जाता है भगवत आश्रितों को। उसकी अनुभूति होनी, उससे मिलने वाली पीड़ा बंद हो जाती है। भक्ति एनेसथीसिया का इंजेक्शन है, जितनी विपत्ति आए, कष्ट आए पर अनुभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि मनुष्य तभी सच्चे अर्थो में जीवन का आनंद अनुभव कर सकता है, जब वह अहंकार का त्याग कर ईश्वर की शरण में आए। भक्ति कोई प्रदर्शन नहीं, यह तो अंतर का भाव है। जब मन निर्मल होता है, तभी भगवान कृपा करते हैं। उन्होंने कहा कि संसार का सुख क्षणिक है, परंतु भक्ति और सेवा का आनंद शाश्वत है। प्रेम ही परमात्मा का साक्षात रूप है और जो प्रेम में लीन है, वही सच्चा भक्त है। मनुष्य जब तक प्रेम और भक्ति के मार्ग पर नहीं चलता, तब तक उसका जीवन अधूरा रहता है।
महोत्सव में विशेष रूप से निगम बोध महाराज, पुनीत भक्तमाली महाराज, आप हल्का नॉर्थ विधायक चौधरी मदन लाल बग्गा, पार्षद अमन बग्गा, पार्षद पुष्पिंदर भनोट,अनिल शर्मा,श्यामा चितकारा, श्री बांके बिहारी सेवा परिवार के सविनय गर्ग डिम्पी, नरेश गुप्ता, श्री गोविंद गौधाम से अशोक धवन, सुंदर दास धमीजा, अनूप सग्गड़, बसंत कुमार, जतिन्द्र अरोड़ा, ल जुनेजा सोनू, कपिल जुनेजा मोनू, केवल बुद्धिराजा, पंकज बुद्धिराजा आदि ने शिरकत की।