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पंजाब ने संभाला बिजली संकट, अब किसी भी सेक्टर पर पावरकट नहीं : सौंद
Mon, 14 Sep 2026 05:49 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
Updated Mon, 14 Sep 2026 05:49 PM IST
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मंत्री बोले-पंजाब में बिजली की मांग 16,600 मेगावाट पहुंची, फिर भी सप्लाई में कमी नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। पंजाब में धान सीजन के दौरान बिजली की मांग 16,600 मेगावाट तक पहुंच गई है। यह पिछले वर्षों के मुकाबले करीब 3,500 मेगावाट अधिक है। राज्य सरकार ने दावा किया है कि बिजली आपूर्ति में कोई कमी नहीं आई है।
बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने सोमवार को बताया कि 13 सितंबर सुबह सात बजे से प्रदेश में बिजली की कमी के कारण कोई कट नहीं लगाया गया है। वे लुधियाना डीसी कार्यालय में पत्रकारवार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को 24 घंटे बिजली मिल रही है। पिछले वर्षों में सितंबर में मांग करीब 13,100 मेगावाट रहती थी। इस बार यह बढ़कर 16,600 मेगावाट हो गई है। पीएसपीसीएल ने लगभग 3,500 मेगावाट की अतिरिक्त मांग को सफलतापूर्वक संभाला है। मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से कोयले में कटौती और पंजाब के हिस्से की करीब 1,000 मेगावाट बिजली नहीं मिलने जैसे कारण भी रहे हैं। इसके बावजूद बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तकनीकी खराबियां दूर कर आपूर्ति बहाल करने में भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि संकट टल चुका है।
किसानों को अतिरिक्त बिजली मिल रही
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देश पर 13 सितंबर से किसानों को सिंचाई के लिए दो घंटे अधिक बिजली मिल रही है। पहले किसानों को आठ घंटे बिजली मिलती थी, अब 10 घंटे आपूर्ति हो रही है। धान सीजन में दो निजी ताप विद्युत संयंत्रों में तकनीकी खराबी आई थी। पीएसपीसीएल की टीम ने दिन-रात काम कर इन खामियों को दूर किया और संयंत्रों को दोबारा चालू किया। एक अन्य निजी विद्युत संयंत्र से भी करीब 100 मेगावाट बिजली की आपूर्ति शुरू हो गई है। पंजाब में 10 सरकारी ताप विद्युत संयंत्र हैं। इनमें गुरु अमरदास ताप विद्युत संयंत्र भी है, जिसे भगवंत सिंह मान सरकार ने खरीदा। उन्होंने कहा कि यदि यह संयंत्र नहीं खरीदा होता तो बिजली के हालात मुश्किल हो सकते थे। सरकार की तैयारियों से राज्य के पास करीब 17,000 मेगावाट तक की मांग पूरी करने की क्षमता है।
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लुधियाना।
पंजाब में धान सीजन के बीच बिजली की मांग इस बार पिछले वर्षों के मुकाबले करीब 3,500 मेगावाट बढ़कर 16,600 मेगावाट तक पहुंच गई है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने बिजली आपूर्ति में कमी से होने वाले कटों पर काबू पाने का दावा किया है। बिजली मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने सोमवार को डीसी कार्यालय में बातचीत में कहा कि 13 सितंबर सुबह सात बजे से अब तक बिजली की कमी के कारण प्रदेश में कोई कट नहीं लगाया गया। उन्होंने दावा किया कि रेजिडेंशियल, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और एग्रीकल्चर सेक्टर को 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
मंत्री के अनुसार, पिछले वर्षों में सितंबर के दौरान बिजली की मांग करीब 13,100 मेगावाट रहती थी, जबकि इस बार यह बढ़कर 16,600 मेगावाट हो गई है। उन्होंने कहा कि लगभग 3,500 मेगावाट की अतिरिक्त मांग के बावजूद पीएसपीसीएल ने चुनौती को सफलतापूर्वक संभाला है। उन्होंने इसे पंजाब सरकार और बिजली विभाग की बड़ी उपलब्धि बताया।
तकनीकी खराबियों से दो-तीन दिन किसानों को हुई परेशानी
धान के सीजन में बिजली की मांग बढ़ने के बीच राज्य के दो निजी थर्मल प्लांटों में तकनीकी खराबी आने से पिछले दो-तीन दिनों में किसानों को बिजली आपूर्ति में दो से तीन घंटे की कटौती का सामना करना पड़ा था। सौंद ने बताया कि पीएसपीसीएल की टीम ने दिन-रात काम करके दोनों प्लांटों की तकनीकी खामियां दूर कर उन्हें दोबारा चालू कर दिया है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देश पर 13 सितंबर से किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पहले के मुकाबले दो घंटे अधिक बिजली देने का फैसला किया गया है। जहां पहले किसानों को आठ घंटे बिजली मिल रही थी, अब वहां 10 घंटे बिजली आपूर्ति शुरू कर दी गई है।
निजी प्लांट से भी मिलने लगी 100 मेगावाट बिजली
सौंद ने कहा कि एक अन्य निजी पावर प्लांट से भी अच्छी खबर मिली है। प्लांट दोबारा चालू हो गया है और वहां से करीब 100 मेगावाट बिजली की आपूर्ति शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों और उद्योगपतियों पर पिछले कुछ दिनों में आया बिजली संकट का दबाव कम हुआ है।
मंत्री ने कहा कि पिछले दिनों उन्हें उद्योगपतियों और किसान संगठनों की ओर से बिजली कटौती को लेकर फोन आए थे। उन्होंने दोहराया कि मौजूदा स्थिति के पीछे केंद्र सरकार की ओर से कोयले में की गई कटौती और पंजाब के हिस्से की करीब 1,000 मेगावाट बिजली नहीं मिलने जैसे कारण भी रहे हैं। इसके बावजूद बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तकनीकी खराबियां दूर कर आपूर्ति बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गुरु अमरदास थर्मल प्लांट खरीदना संकट में बना सहारा
बिजली मंत्री ने कहा कि पंजाब में 10 सरकारी थर्मल प्लांट हैं। इनमें गुरु अमरदास थर्मल प्लांट भी शामिल है, जिसे मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने खरीदा था। उनके अनुसार, यदि सरकार ने यह प्लांट नहीं खरीदा होता तो मौजूदा परिस्थितियों में पंजाब में बिजली के हालात काफी नाजुक हो सकते थे।
सौंद ने दावा किया कि सरकार की तैयारियों के कारण इस बार करीब 17,000 मेगावाट तक की बिजली मांग को पूरा करने की क्षमता राज्य के पास रही और सभी 10 सरकारी थर्मल प्लांट अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने उद्योगपतियों और किसानों को भरोसा दिलाया कि पिछले दिनों पैदा हुआ संकट अब टल चुका है। इस मौके पर विधायक चौधरी मदन लाल बग्गा और विधायक रजिंदरपाल कौर छीना भी मौजूद रहे।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -राजीव
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संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। पंजाब में धान सीजन के दौरान बिजली की मांग 16,600 मेगावाट तक पहुंच गई है। यह पिछले वर्षों के मुकाबले करीब 3,500 मेगावाट अधिक है। राज्य सरकार ने दावा किया है कि बिजली आपूर्ति में कोई कमी नहीं आई है।
बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने सोमवार को बताया कि 13 सितंबर सुबह सात बजे से प्रदेश में बिजली की कमी के कारण कोई कट नहीं लगाया गया है। वे लुधियाना डीसी कार्यालय में पत्रकारवार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को 24 घंटे बिजली मिल रही है। पिछले वर्षों में सितंबर में मांग करीब 13,100 मेगावाट रहती थी। इस बार यह बढ़कर 16,600 मेगावाट हो गई है। पीएसपीसीएल ने लगभग 3,500 मेगावाट की अतिरिक्त मांग को सफलतापूर्वक संभाला है। मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से कोयले में कटौती और पंजाब के हिस्से की करीब 1,000 मेगावाट बिजली नहीं मिलने जैसे कारण भी रहे हैं। इसके बावजूद बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तकनीकी खराबियां दूर कर आपूर्ति बहाल करने में भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि संकट टल चुका है।
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किसानों को अतिरिक्त बिजली मिल रही
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देश पर 13 सितंबर से किसानों को सिंचाई के लिए दो घंटे अधिक बिजली मिल रही है। पहले किसानों को आठ घंटे बिजली मिलती थी, अब 10 घंटे आपूर्ति हो रही है। धान सीजन में दो निजी ताप विद्युत संयंत्रों में तकनीकी खराबी आई थी। पीएसपीसीएल की टीम ने दिन-रात काम कर इन खामियों को दूर किया और संयंत्रों को दोबारा चालू किया। एक अन्य निजी विद्युत संयंत्र से भी करीब 100 मेगावाट बिजली की आपूर्ति शुरू हो गई है। पंजाब में 10 सरकारी ताप विद्युत संयंत्र हैं। इनमें गुरु अमरदास ताप विद्युत संयंत्र भी है, जिसे भगवंत सिंह मान सरकार ने खरीदा। उन्होंने कहा कि यदि यह संयंत्र नहीं खरीदा होता तो बिजली के हालात मुश्किल हो सकते थे। सरकार की तैयारियों से राज्य के पास करीब 17,000 मेगावाट तक की मांग पूरी करने की क्षमता है।
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लुधियाना।
पंजाब में धान सीजन के बीच बिजली की मांग इस बार पिछले वर्षों के मुकाबले करीब 3,500 मेगावाट बढ़कर 16,600 मेगावाट तक पहुंच गई है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने बिजली आपूर्ति में कमी से होने वाले कटों पर काबू पाने का दावा किया है। बिजली मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने सोमवार को डीसी कार्यालय में बातचीत में कहा कि 13 सितंबर सुबह सात बजे से अब तक बिजली की कमी के कारण प्रदेश में कोई कट नहीं लगाया गया। उन्होंने दावा किया कि रेजिडेंशियल, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और एग्रीकल्चर सेक्टर को 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
मंत्री के अनुसार, पिछले वर्षों में सितंबर के दौरान बिजली की मांग करीब 13,100 मेगावाट रहती थी, जबकि इस बार यह बढ़कर 16,600 मेगावाट हो गई है। उन्होंने कहा कि लगभग 3,500 मेगावाट की अतिरिक्त मांग के बावजूद पीएसपीसीएल ने चुनौती को सफलतापूर्वक संभाला है। उन्होंने इसे पंजाब सरकार और बिजली विभाग की बड़ी उपलब्धि बताया।
तकनीकी खराबियों से दो-तीन दिन किसानों को हुई परेशानी
धान के सीजन में बिजली की मांग बढ़ने के बीच राज्य के दो निजी थर्मल प्लांटों में तकनीकी खराबी आने से पिछले दो-तीन दिनों में किसानों को बिजली आपूर्ति में दो से तीन घंटे की कटौती का सामना करना पड़ा था। सौंद ने बताया कि पीएसपीसीएल की टीम ने दिन-रात काम करके दोनों प्लांटों की तकनीकी खामियां दूर कर उन्हें दोबारा चालू कर दिया है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देश पर 13 सितंबर से किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पहले के मुकाबले दो घंटे अधिक बिजली देने का फैसला किया गया है। जहां पहले किसानों को आठ घंटे बिजली मिल रही थी, अब वहां 10 घंटे बिजली आपूर्ति शुरू कर दी गई है।
निजी प्लांट से भी मिलने लगी 100 मेगावाट बिजली
सौंद ने कहा कि एक अन्य निजी पावर प्लांट से भी अच्छी खबर मिली है। प्लांट दोबारा चालू हो गया है और वहां से करीब 100 मेगावाट बिजली की आपूर्ति शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों और उद्योगपतियों पर पिछले कुछ दिनों में आया बिजली संकट का दबाव कम हुआ है।
मंत्री ने कहा कि पिछले दिनों उन्हें उद्योगपतियों और किसान संगठनों की ओर से बिजली कटौती को लेकर फोन आए थे। उन्होंने दोहराया कि मौजूदा स्थिति के पीछे केंद्र सरकार की ओर से कोयले में की गई कटौती और पंजाब के हिस्से की करीब 1,000 मेगावाट बिजली नहीं मिलने जैसे कारण भी रहे हैं। इसके बावजूद बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तकनीकी खराबियां दूर कर आपूर्ति बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गुरु अमरदास थर्मल प्लांट खरीदना संकट में बना सहारा
बिजली मंत्री ने कहा कि पंजाब में 10 सरकारी थर्मल प्लांट हैं। इनमें गुरु अमरदास थर्मल प्लांट भी शामिल है, जिसे मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने खरीदा था। उनके अनुसार, यदि सरकार ने यह प्लांट नहीं खरीदा होता तो मौजूदा परिस्थितियों में पंजाब में बिजली के हालात काफी नाजुक हो सकते थे।
सौंद ने दावा किया कि सरकार की तैयारियों के कारण इस बार करीब 17,000 मेगावाट तक की बिजली मांग को पूरा करने की क्षमता राज्य के पास रही और सभी 10 सरकारी थर्मल प्लांट अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने उद्योगपतियों और किसानों को भरोसा दिलाया कि पिछले दिनों पैदा हुआ संकट अब टल चुका है। इस मौके पर विधायक चौधरी मदन लाल बग्गा और विधायक रजिंदरपाल कौर छीना भी मौजूद रहे।