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सिनों ने दूसरे दिन भी हड़ताल रखी जारी
Updated Sat, 02 Jun 2018 09:15 PM IST
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लुधियाना में मंडियां वीरान, फल-सब्जियों के दाम बढ़े
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। देशव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन शनिवार को लुधियाना-राहों रोड पर गांव गोंसगढ़ के निकट किसानों ने भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के नेतृत्व में जाम लगाया है। वहीं मंडियां भी वीरान नजर आई। किसानों के इस प्रदर्शन से सब्जियों व फलो के दामों के दोगुना उछाल आया है।
किसान नेताओं ने स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू करने की मांग की है। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की भी आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि हम किसी को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन शहर के लोगों को दूध व सब्जी खरीदनी है तो उन्हें गांव में आना होगा। हड़ताल 1 से 10 जून तक जारी रहेगी। हरजिंदर सिंह लक्खोवाल के अनुसार सूबे के किसानों ने दस दिनों तक सब्जियां, फल व डेयरी उत्पादों को शहरों में न लेकर जाने का फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय किसान महासंघ के 130 से अधिक संगठनों ने एकजुटमहानगरों व शहरों में खाद्य पदार्थों की सप्लाई न करने की घोषणा करके केंद्र सरकार के खिलाफ संघर्ष का बिगुल बजाया है। दूसरे दिन भी किसानों ने ग्रामीण इलाकों से शहरों को जाने वाली दूध सप्लाई रोकने का काफी प्रयास किया। हालांकि उन्हें इस प्रयास में अधिक सफलता नहीं मिली। फल व सब्जियों की कीमत दुगनी होने की सूचना है।
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अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। देशव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन शनिवार को लुधियाना-राहों रोड पर गांव गोंसगढ़ के निकट किसानों ने भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के नेतृत्व में जाम लगाया है। वहीं मंडियां भी वीरान नजर आई। किसानों के इस प्रदर्शन से सब्जियों व फलो के दामों के दोगुना उछाल आया है।
किसान नेताओं ने स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू करने की मांग की है। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की भी आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि हम किसी को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन शहर के लोगों को दूध व सब्जी खरीदनी है तो उन्हें गांव में आना होगा। हड़ताल 1 से 10 जून तक जारी रहेगी। हरजिंदर सिंह लक्खोवाल के अनुसार सूबे के किसानों ने दस दिनों तक सब्जियां, फल व डेयरी उत्पादों को शहरों में न लेकर जाने का फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय किसान महासंघ के 130 से अधिक संगठनों ने एकजुटमहानगरों व शहरों में खाद्य पदार्थों की सप्लाई न करने की घोषणा करके केंद्र सरकार के खिलाफ संघर्ष का बिगुल बजाया है। दूसरे दिन भी किसानों ने ग्रामीण इलाकों से शहरों को जाने वाली दूध सप्लाई रोकने का काफी प्रयास किया। हालांकि उन्हें इस प्रयास में अधिक सफलता नहीं मिली। फल व सब्जियों की कीमत दुगनी होने की सूचना है।
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