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Updated Tue, 02 Oct 2018 10:25 PM IST
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अध्यापक यूनियन ने सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा। रेगुलर करने और वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर मंगलवार को 5178 अध्यापक यूनियन की ओर से शहर में रोष मार्च निकाल कर सूबा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। इस रोष मार्च में सैकड़ों अध्यापकों ने शिरकत की।
यूनियन नेता रेशम सिंह और जसविंदर सिंह ने बताया कि 5178 अध्यापक यूनियन के अध्यापक सारी शर्तें पूरी करते हैं। अध्यापकों ने टेस्ट पास किया है। नवंबर 2014 से लेकर अगले तीन साल तक ठेके पर काम करते हुए अध्यापकों को सरकार ने मात्र छह हजार रुपये प्रति माह वेतन दिया है। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग ने अक्तूबर 2017 में अध्यापकों को रेगुलर करने के लिए अध्यापकों की फाइलें भी मंगवा ली गई थी। अब तक उनको रेगुलर नहीं किया गया बल्कि जो छह हजार रुपये प्रति माह मिलते थे। अध्यापकों ने शिक्षा विभाग के मंत्री एवं अधिकारियों से मांग की कि जल्द से जल्द उन्हें रेगुलर किया जाए और उनको सरकारी तौर पर सभी लाभ दिए जाएं। अध्यापकों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार व शिक्षा विभाग ने उनकी मांगों को न माना तो वह आने वाले दिनों में बडे़ स्तर पर संघर्ष करेंगे ।
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अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा। रेगुलर करने और वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर मंगलवार को 5178 अध्यापक यूनियन की ओर से शहर में रोष मार्च निकाल कर सूबा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। इस रोष मार्च में सैकड़ों अध्यापकों ने शिरकत की।
यूनियन नेता रेशम सिंह और जसविंदर सिंह ने बताया कि 5178 अध्यापक यूनियन के अध्यापक सारी शर्तें पूरी करते हैं। अध्यापकों ने टेस्ट पास किया है। नवंबर 2014 से लेकर अगले तीन साल तक ठेके पर काम करते हुए अध्यापकों को सरकार ने मात्र छह हजार रुपये प्रति माह वेतन दिया है। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग ने अक्तूबर 2017 में अध्यापकों को रेगुलर करने के लिए अध्यापकों की फाइलें भी मंगवा ली गई थी। अब तक उनको रेगुलर नहीं किया गया बल्कि जो छह हजार रुपये प्रति माह मिलते थे। अध्यापकों ने शिक्षा विभाग के मंत्री एवं अधिकारियों से मांग की कि जल्द से जल्द उन्हें रेगुलर किया जाए और उनको सरकारी तौर पर सभी लाभ दिए जाएं। अध्यापकों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार व शिक्षा विभाग ने उनकी मांगों को न माना तो वह आने वाले दिनों में बडे़ स्तर पर संघर्ष करेंगे ।
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