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जालंधर में महिला वकीलों को पांच साल बाद भी नहीं मिला इंसाफ

Tue, 25 May 2021 08:30 PM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Tue, 25 May 2021 08:30 PM IST
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Women lawyers in Jalandhar did not get justice even after five years
जालंधर। इंटरनेट से कॉल कर जालंधर की महिला वकीलों को परेशान करने और धमकाने के मामले में पुलिस के हाथ खड़े हो गए हैं। महिला वकील दहशत के साये में जी रही हैं। पांच वर्षों से पुलिस उस सिरफिरे को तलाश नहीं पाई है। मामले में इंसाफ न मिलता देख बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान और नामवर वकील मंदीप सचदेवा ने केंद्रीय गृह मंत्रालय, पंजाब सरकार, डीजीपी, कमिश्नर पुलिस व डीसी जालंधर को लीगल नोटिस जारी कर कहा है कि इस मामले में पंजाब पुलिस कुछ नहीं कर पाई है, इसलिए केस को सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया जाए।
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जालंधर कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहीं महिला एडवोकेट संगीता सोनी व हरप्रीत कौर ने पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी थी कि उनके मोबाइल पर कोई अज्ञात पुरुष इंटरनेट कॉल कर रहा है। ऐसी कॉल काफी समय से आ रही हैं। सिरफिरा आधी आधी रात को लगातार इंटरनेट काल के जरिये परेशान करता व धमकाता है। शिकायत करने वाली महिला एडवोकेट संगीता ने कहा कि यह पहली बार नहीं हो रहा है, बल्कि यह सिलसिला 5-6 साल से चल रहा है। उन्होंने छह और महिला एडवोकेट्स के नाम दिए, जिनको आरोपी इंटरनेट के जरिए कॉल कर परेशान कर रहा है।
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मामले में पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज कर ली और मामला साइबर सेल को रेफर कर दिया, लेकिन सिरफिरे ने एसीपी साइबर सेल को भी फोन पर गालियां निकालनी शुरू कर दीं और धमकाया। पुलिस अभी तक आरोपी तक नहीं पहुंच पाई है। एडवोकेट मंदीप सचदेवा ने कहा कि महिला वकील दहशत में जी रही हैं। जालंधर में ही करीब 300 महिला वकील हैं, ऐसे में सिरफिरा काफी परेशान कर रहा है और महिला वकील अपना काम सही ढंग से नहीं कर पा रही हैं।
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जालंधर पुलिस दो मामले दर्ज कर चुकी है, लेकिन सिरफिरा काबू नहीं आया है, क्योंकि वह इंटरनेट कॉल करता है। ऐसे तो देश विरोधी गतिविधियों वाले लोगों को पुलिस कैसे गिरफ्तार करेगी? इसलिए केस को पंजाब के किसी बड़े साइबर एक्सपर्ट या फिर सीबीआई को भेजा जाए। मंदीप सचदेवा ने कहा कि उन्होंने मामला केंद्रीय गृहमंत्रालय तक उठाया है और अगर केस को ट्रांसफर नहीं किया गया तो वह हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे। बता दें कि महिला वकीलों को सिरफिरे द्वारा परेशान करने की घटना को अमर उजाला ने ही उठाया था और पुलिस को लगातार दो बार मामला दर्ज करना पड़ा था।
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