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जंगली सूअरों के आंतक से गन्ना किसान हुये परेशान

Thu, 16 Jan 2020 10:42 PM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 16 Jan 2020 10:42 PM IST
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Suggarcane farmers upset by wild boar terror
सर्दियों के मौसम में जंगली जानवरों खासकर जंगली सूअरों का मैदानी इलाकों की ओर रुख करने से गन्ने और गेहूं की फसलों को हो रहे नुकसान के कारण पंजाब के किसानों की रातों की नींद हराम हो चुकी है। कड़ाके की ठंड और धुंध के कारण जंगली सुअर, सांभर, नील गाय और अन्य हिंसक जानवर भटक कर शहरी और ग्रामीण इलाकों में पहुंच रहे हैं।
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सरकार द्वारा शिकार पर लगाए प्रतिबंध के कारण पंजाब के कंडी, मालवा और सीमावर्ती इलाकों के साथ अब जालंधर में भी जंगली जानवरों की आबादी काफी बढ़ गई है, जो फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। पंजाब के आनंदपुर साहिब, फिरोजपुर, नवांशहर, पटियाला, रोपड़, संगरूर, मनसा, लुधियाना और शिवालिक की तलहटी से सटे जिले सबसे ज्यादा पीड़ित हैं। जिला जालंधर के गांव रानी भट्टी, दमुहा, अमलोह, सीतलपुर, सत्तोवाली, कराड़ी, निजामदीनपुर, रसूलपुर, दोदे, तलवंडी, गोपालपुर, संघवाल, गढ़ी बक्श, कदालागुरु, चकराणा और मुस्तफापुर के गांव जंगली सूअरों के आंतक से परेशान हैं।
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रानी भट्टी के गन्ना किसान राजेश चंद्र और जगजीत सिंह ने बताया कि सूअरों के आंतक से उन्होंने सुबह और शाम की सैर करने के अलावा देर शाम तक खेतों में काम करना बंद कर दिया है। वन संरक्षित क्षेत्रों के अंदर जंगली सूअरों के लिए पर्याप्त भोजन न होने के कारण वे गांवों में घुसकर मानव आवासों के पास तक पहुंच रहे हैं। सूअरों सहित अन्य जंगली जानवर भी गन्ने के खेतों में छिपे रहते हैं, जिन्हें ढूंढ कर भगाना किसानों के लिए संभव नहीं है। पंजाब में पारंपरिक शिकारियों की कमी के चलते सूअरों के आंतक में दिनों दिन बढ़ोतरी हो रही है। वहीं सूअरों द्वारा किए गए नुकसान का मुआवजा प्राप्त करना भी एक कठिन प्रक्रिया है।
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जिला उपायुक्त वरिन्दर कुमार शर्मा और जिला वन अधिकारी (डीएफओ) खुशविंदर सिंह ने बताया कि प्रभावित किसानों द्वारा मांग करने पर वन्यजीव विभाग जंगली जानवरों को मारने के लिए विशेष परमिट जारी करता है। उन्होंने बताया कि साल 2018-19 में विभाग ने ऐसे सौ परमिट जारी किए थे। परमिट लेकर किसान अपने लाइसेंस हथियार से जंगली सूअरों को मार सकता है। अगर किसी किसान के पास अपना हथियार नहीं है तो वे किसी पंजीकृत शिकारी का सहारा ले सकता है जिसके लिए उसे विभाग को सूचना देनी होगी। खुशविंदर सिंह ने बताया कि जंगली जानवरों द्वारा फसलों को हुए नुकसान के लिए जिला जालंधर में गत वर्ष चार लाख रुपये का मुआवजा दिया गया था। उन्होंने कहा कि वन संरक्षित क्षेत्रों के अंदर जंगली सूअरों को रोकने के लिए विभाग द्वारा सभी प्रयास किए जाते हैं ताकि वे मानव आवासों के नजदीक ना पहुंच पाएं।
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