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कनाडा में पक्के होने का सपना टूटा: आठ साल की मेहनत और टैक्स के बावजूद जालंधर का परिवार डिपोर्ट
Thu, 10 Sep 2026 01:45 PM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
Published by: Nivedita
Updated Thu, 10 Sep 2026 01:45 PM IST
सार
हरीश साल 2018 में भारत से कनाडा पहुंचे थे, जहां उन्होंने दावा किया था कि भारत में किराना दुकान चलाते समय 12 से 19 अगस्त 2017 के दौरान हुई कथित गैर-कानूनी हिरासत और जान के खतरे के बाद उन्हें अपना देश छोड़ना पड़ा था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Freepik
विस्तार
कनाडा की धरती पर बेहतर भविष्य का सपना लेकर गए एक भारतीय परिवार के लिए 8 साल की कड़ी मेहनत आखिरकार निराशा में बदल गई है। पंजाब के जालंधर जिले के गोराया से ताल्लुक रखने वाले हरीश और उनके परिवार की शरणार्थी अर्जी खारिज होने के बाद कनाडा सरकार ने उन्हें वापस भारत भेज दिया है।
गौरतलब है कि हरीश साल 2018 में भारत से कनाडा पहुंचे थे, जहां उन्होंने दावा किया था कि भारत में किराना दुकान चलाते समय 12 से 19 अगस्त 2017 के दौरान हुई कथित गैर-कानूनी हिरासत और जान के खतरे के बाद उन्हें अपना देश छोड़ना पड़ा था। कनाडा के क्यूबेक प्रांत में रहते हुए हरीश ने ट्रक ड्राइवर के तौर पर काम किया और उनके परिवार ने वर्षों तक ईमानदारी से काम करते हुए सरकार को बकायदा टैक्स भी चुकाया।
हालांकि, 4 सितंबर को परिवार को सूचित किया गया कि उनका शरणार्थी दावा खारिज हो चुका है और 7 सितंबर को उन्हें देश छोड़ना होगा। विमान में सवार किए जाने से ठीक पहले परिवार द्वारा मानवीय आधार पर कनाडा में रहने के लिए लगाई गई आखिरी अपील भी खारिज कर दी गई।
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इस मामले पर कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी के अधिकारी ने बताया कि जब किसी विदेशी नागरिक को देश छोड़ने का अंतिम आदेश जारी हो जाता है, तो एजेंसी के पास नियमों के तहत वापस भेजने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे हजारों अन्य मामले भी कतार में हैं, जिनमें डिपोर्टेशन की प्रक्रिया चल रही है। इस कार्रवाई ने विदेश में बसने की आस लगाए बैठे हजारों प्रवासियों और भारतीय परिवारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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गौरतलब है कि हरीश साल 2018 में भारत से कनाडा पहुंचे थे, जहां उन्होंने दावा किया था कि भारत में किराना दुकान चलाते समय 12 से 19 अगस्त 2017 के दौरान हुई कथित गैर-कानूनी हिरासत और जान के खतरे के बाद उन्हें अपना देश छोड़ना पड़ा था। कनाडा के क्यूबेक प्रांत में रहते हुए हरीश ने ट्रक ड्राइवर के तौर पर काम किया और उनके परिवार ने वर्षों तक ईमानदारी से काम करते हुए सरकार को बकायदा टैक्स भी चुकाया।
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हालांकि, 4 सितंबर को परिवार को सूचित किया गया कि उनका शरणार्थी दावा खारिज हो चुका है और 7 सितंबर को उन्हें देश छोड़ना होगा। विमान में सवार किए जाने से ठीक पहले परिवार द्वारा मानवीय आधार पर कनाडा में रहने के लिए लगाई गई आखिरी अपील भी खारिज कर दी गई।
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इस मामले पर कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी के अधिकारी ने बताया कि जब किसी विदेशी नागरिक को देश छोड़ने का अंतिम आदेश जारी हो जाता है, तो एजेंसी के पास नियमों के तहत वापस भेजने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे हजारों अन्य मामले भी कतार में हैं, जिनमें डिपोर्टेशन की प्रक्रिया चल रही है। इस कार्रवाई ने विदेश में बसने की आस लगाए बैठे हजारों प्रवासियों और भारतीय परिवारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।