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दलित युवकों की मौत मामले में तीन काबू
Updated Sat, 10 Jun 2017 10:40 PM IST
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कत्ल नहीं किए गए थे, हादसे में मरे थे दोनों दलित युवक
गांव वड़िंग में दलित युवकों की मौत के मामले में तीन काबू
पानी लेने नहीं, बल्कि अवैध शराब बनाने का शीरा लेने फैक्टरी गए थे दोनों युवक
पुलिस के अनुसार, फैक्टरी में गैस चढ़ने से हुई थी दोनों की मौत
फैक्टरी के तीन कर्मियों ने शीरा चोरी होने के भय से ठिकाने लगा दिए शव
अमर उजाला ब्यूरो
मुक्तसर।
जिले के गांव वड़िंग के दो दलित युवकों के रजबाहे तले शव मिलने के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को काबू किया है। यह जानकारी शनिवार को एसएसपी सुशील कुमार ने दी। पुलिस प्रशासन की मानें तो यह केस हत्याकांड न होकर महज एक हादसा है। पुलिस के अनुसार पकड़े गए लोगों को शव खुर्द-बुर्द करने का आरोपी तो माना जा सकता है, लेकिन उन्हें हत्या का आरोपी नहीं माना जा सकता। फिलहाल पुलिस पकड़े गए आरोपियों को रिमांड पर लेकर अग्रिम कार्रवाई करने की बात कह रही है।
बीते दिनों गांव वड़िंग की पाइप फैक्टरी में काम करने वाले दो दलित युवकों हरदेव सिंह और जसकरण सिंह के शव गांव खोखर लिंक रोड स्थित रजबाहे के पुल तले मिले थे। घटना के बाद पुलिस ने मृतक हरदेव सिंह के पिता कृष्ण सिंह के बयानों पर थाना बरीवाला में मामला दर्ज किया था। इसमें अब पुलिस ने तीन लोगों को काबू किया है।
शनिवार को अपने कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एसएसपी सुशील कुमार जहां इस कांड को एक हादसे की तरह बयान कर रहे थे, वहीं पकड़े गए लोगों को कातिल भी कहे जा रहे थे। उनके अनुसार पांच जून की शाम को करीब साढ़े छह बजे हरदेव सिंह और जसकरण सिंह अपने घर से पानी लेकर आने की बात कहकर निकले थे लेकिन असल में दोनों कैनी में शराब निकालने में इस्तेमाल होना शीरा (गुड़ और चीनी का बचा हुआ अतिरिक्त तरल पदार्थ) लेने गए थे। दोनों चोरी-छिपे गांव वड़िंग में बरीवाला रोड स्थित राजिंदरा फीड नामक पशु खुराक फैक्टरी से शीरा लेने घुसे। वहां गैस चढ़ने से दोनों की मौत हो गई। फैक्टरी में मौजूद कर्मी बरीवाला निवासी नसीब सिंह, सराएनागा निवासी सुखचैन सिंह उर्फ चैना और वड़िंग निवासी बलवंत सिंह उर्फ लाखा ने शीरा चोरी होने के मामले में अपना नाम आने और मालिक से फटकार पड़ने के डर से शवों को रजबाहे तले फेंक दिया।
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सरायनागा बस स्टैंड से काबू किए तीनों आरोपी
पुलिस ने सराएनागा बस स्टैंड से फरार होने की ताक में खड़े आरोपियों को काबू करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार प्राथमिक पूछताछ में उन्होंने शव ठिकाने लगाने का जुर्म कबूला है, मगर हत्या न करने की बात कह रहे हैं। पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा और पूछताछ की जाएगी। इस मौके पर एसपी बलजीत सिंह, एसपी जसपाल सिंह, डीएसपी गुरतेज सिंह, थाना बरीवाला प्रभारी दरबारा सिंह, सीआईए स्टाफ के इंस्पेक्टर गुरिंदर जीत सिंह और पीआरओ जगसीर सिंह भी मौजूद थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर मौत के सही कारण का चलेगा पता
एसएसपी के अनुसार प्राथमिक जांच में फिलहाल यही बात सामने आई है। बाकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारण सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि तीनों आरोपियों ने मृतकों को फैक्टरी से बाहर निकाल शीरे की गंध दूर करने के लिए शवों को नहलाकर बोरी में डाल दिया। उसके बाद फैक्टरी में खड़ी मालिक की कार में डालकर रजबाहे तले फेंक आए। मृतकों के शरीर पर लगी चोटों के बारे में एसएसपी ने बताया कि आरोपियों के अनुसार शवों को खुर्द-बुर्द करते समय निकालने और नहलाते समय गिर जाने के चलते शवों पर निशान बन गए हैं। आरोपियों के अनुसार उस दिन इत्तेफाक से मालिक की कार फैक्टरी में ही खड़ी थी, क्योंकि फैक्टरी मालिक दिल्ली से ट्रेन के जरिए कोटकपूरा पहुंच रहा था और उन्हें लेने कार लेकर जाना था।
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गांव वड़िंग में दलित युवकों की मौत के मामले में तीन काबू
पानी लेने नहीं, बल्कि अवैध शराब बनाने का शीरा लेने फैक्टरी गए थे दोनों युवक
पुलिस के अनुसार, फैक्टरी में गैस चढ़ने से हुई थी दोनों की मौत
फैक्टरी के तीन कर्मियों ने शीरा चोरी होने के भय से ठिकाने लगा दिए शव
अमर उजाला ब्यूरो
मुक्तसर।
जिले के गांव वड़िंग के दो दलित युवकों के रजबाहे तले शव मिलने के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को काबू किया है। यह जानकारी शनिवार को एसएसपी सुशील कुमार ने दी। पुलिस प्रशासन की मानें तो यह केस हत्याकांड न होकर महज एक हादसा है। पुलिस के अनुसार पकड़े गए लोगों को शव खुर्द-बुर्द करने का आरोपी तो माना जा सकता है, लेकिन उन्हें हत्या का आरोपी नहीं माना जा सकता। फिलहाल पुलिस पकड़े गए आरोपियों को रिमांड पर लेकर अग्रिम कार्रवाई करने की बात कह रही है।
बीते दिनों गांव वड़िंग की पाइप फैक्टरी में काम करने वाले दो दलित युवकों हरदेव सिंह और जसकरण सिंह के शव गांव खोखर लिंक रोड स्थित रजबाहे के पुल तले मिले थे। घटना के बाद पुलिस ने मृतक हरदेव सिंह के पिता कृष्ण सिंह के बयानों पर थाना बरीवाला में मामला दर्ज किया था। इसमें अब पुलिस ने तीन लोगों को काबू किया है।
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शनिवार को अपने कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एसएसपी सुशील कुमार जहां इस कांड को एक हादसे की तरह बयान कर रहे थे, वहीं पकड़े गए लोगों को कातिल भी कहे जा रहे थे। उनके अनुसार पांच जून की शाम को करीब साढ़े छह बजे हरदेव सिंह और जसकरण सिंह अपने घर से पानी लेकर आने की बात कहकर निकले थे लेकिन असल में दोनों कैनी में शराब निकालने में इस्तेमाल होना शीरा (गुड़ और चीनी का बचा हुआ अतिरिक्त तरल पदार्थ) लेने गए थे। दोनों चोरी-छिपे गांव वड़िंग में बरीवाला रोड स्थित राजिंदरा फीड नामक पशु खुराक फैक्टरी से शीरा लेने घुसे। वहां गैस चढ़ने से दोनों की मौत हो गई। फैक्टरी में मौजूद कर्मी बरीवाला निवासी नसीब सिंह, सराएनागा निवासी सुखचैन सिंह उर्फ चैना और वड़िंग निवासी बलवंत सिंह उर्फ लाखा ने शीरा चोरी होने के मामले में अपना नाम आने और मालिक से फटकार पड़ने के डर से शवों को रजबाहे तले फेंक दिया।
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सरायनागा बस स्टैंड से काबू किए तीनों आरोपी
पुलिस ने सराएनागा बस स्टैंड से फरार होने की ताक में खड़े आरोपियों को काबू करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार प्राथमिक पूछताछ में उन्होंने शव ठिकाने लगाने का जुर्म कबूला है, मगर हत्या न करने की बात कह रहे हैं। पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा और पूछताछ की जाएगी। इस मौके पर एसपी बलजीत सिंह, एसपी जसपाल सिंह, डीएसपी गुरतेज सिंह, थाना बरीवाला प्रभारी दरबारा सिंह, सीआईए स्टाफ के इंस्पेक्टर गुरिंदर जीत सिंह और पीआरओ जगसीर सिंह भी मौजूद थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर मौत के सही कारण का चलेगा पता
एसएसपी के अनुसार प्राथमिक जांच में फिलहाल यही बात सामने आई है। बाकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारण सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि तीनों आरोपियों ने मृतकों को फैक्टरी से बाहर निकाल शीरे की गंध दूर करने के लिए शवों को नहलाकर बोरी में डाल दिया। उसके बाद फैक्टरी में खड़ी मालिक की कार में डालकर रजबाहे तले फेंक आए। मृतकों के शरीर पर लगी चोटों के बारे में एसएसपी ने बताया कि आरोपियों के अनुसार शवों को खुर्द-बुर्द करते समय निकालने और नहलाते समय गिर जाने के चलते शवों पर निशान बन गए हैं। आरोपियों के अनुसार उस दिन इत्तेफाक से मालिक की कार फैक्टरी में ही खड़ी थी, क्योंकि फैक्टरी मालिक दिल्ली से ट्रेन के जरिए कोटकपूरा पहुंच रहा था और उन्हें लेने कार लेकर जाना था।