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अब देश के छप्पड़ सीचेवाल मॉडल से होंगे साफ
Updated Sun, 23 Jul 2017 09:02 PM IST
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सीचेवाल मॉडल देखने पहुंचे 13 राज्यों के वैज्ञानिक
देश के गांवों के छप्पड़ों की सफाई के लिए आयोजित मुहिम की गांव सीचेवाल से शुरुआत
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला।
केंद्र सरकार के साइंस व टेक्नालॉजी विभाग की ओर से देश के गांवों के छप्पड़ों की सफाई के लिए चलाई जा रही मुहिम की शुरुआत गांव सीचेवाल से की गई। केंद्र सरकार के सहयोग से चल रही इस स्कीम के तहत 13 राज्यों के वैज्ञानिकों ने पर्यावरण माहिर संत बलबीर सिंह सीचेवाल की ओर से तैयार किए छप्पड़ का मॉडल देखा।
इस दौरान वैज्ञानिक डॉ. भूप सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार इस स्कीम के तहत धरती के निचले पानी के गिर रहे स्तर को ऊंचा उठाने के लिए देश भर में गांवों के छप्पड़ों को दोबारा साफ करना चाहती है ताकि धरती के नीचे पानी रिचार्ज हो सके। इस बारे में राज्य सरकार के सहयोग से लुधियाना खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिकों की वर्कशॉप रखी गई थी, वहीं सीचेवाल मॉडल का निरीक्षण करने का प्रोग्राम तैयार किया गया था।
उन्होंने कहा कि अपने 30 साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने सीचेवाल मॉडल जैसा काम असल में हुआ नहीं देखा था। इस मॉडल ने वैज्ञानिकों की आंखें खोल दी हैं कि कैसे एक छोटे से गांव के पानी को एक जगह इकट्ठा करने के बाद कुदरती विधि के साथ साफ कर खेती के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संत सीचेवाल की ओर से प्रयोग में लाए गए पानी को दोबारा प्रयोग में लाने का जो फार्मूला अपनाया गया है, वह पंजाब के लिए बहुत लाभदायक हो सकता है।
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खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डॉ. मनमोहनजीत सिंह ने बताया कि गांवों में छप्पड़ों को दोबारा साफ करने की मुहिम पंजाब के लिए लाभप्रद साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि पंजाब में पीने वाले पानी का बहुत ज्यादा दुरुपयोग हो रहा है। इस बारे में चेतना पैदा करने की जरूरत है। वैज्ञानिकों ने सुल्तानपुर लोधी के चंडीगढ़ मोहल्ला में सबसे सस्ते ट्रीटमेंट प्लांट को भी देखा और पवित्र काली बेईं की हुई सफाई के बारे में भी जानकारी हासिल की।
इस मौके पर संत सीचेवाल ने कहा कि गंदा पानी श्राप नहीं बल्कि वरदान साबित हो सकता है। सिर्फ इसे दोबारा प्रयोग में लाने की जरूरत है। सीचेवाल माडल को देखने बिहार, पश्चिमी बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और पंजाब के वैज्ञानिक आए थे।
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देश के गांवों के छप्पड़ों की सफाई के लिए आयोजित मुहिम की गांव सीचेवाल से शुरुआत
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला।
केंद्र सरकार के साइंस व टेक्नालॉजी विभाग की ओर से देश के गांवों के छप्पड़ों की सफाई के लिए चलाई जा रही मुहिम की शुरुआत गांव सीचेवाल से की गई। केंद्र सरकार के सहयोग से चल रही इस स्कीम के तहत 13 राज्यों के वैज्ञानिकों ने पर्यावरण माहिर संत बलबीर सिंह सीचेवाल की ओर से तैयार किए छप्पड़ का मॉडल देखा।
इस दौरान वैज्ञानिक डॉ. भूप सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार इस स्कीम के तहत धरती के निचले पानी के गिर रहे स्तर को ऊंचा उठाने के लिए देश भर में गांवों के छप्पड़ों को दोबारा साफ करना चाहती है ताकि धरती के नीचे पानी रिचार्ज हो सके। इस बारे में राज्य सरकार के सहयोग से लुधियाना खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिकों की वर्कशॉप रखी गई थी, वहीं सीचेवाल मॉडल का निरीक्षण करने का प्रोग्राम तैयार किया गया था।
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उन्होंने कहा कि अपने 30 साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने सीचेवाल मॉडल जैसा काम असल में हुआ नहीं देखा था। इस मॉडल ने वैज्ञानिकों की आंखें खोल दी हैं कि कैसे एक छोटे से गांव के पानी को एक जगह इकट्ठा करने के बाद कुदरती विधि के साथ साफ कर खेती के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संत सीचेवाल की ओर से प्रयोग में लाए गए पानी को दोबारा प्रयोग में लाने का जो फार्मूला अपनाया गया है, वह पंजाब के लिए बहुत लाभदायक हो सकता है।
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खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डॉ. मनमोहनजीत सिंह ने बताया कि गांवों में छप्पड़ों को दोबारा साफ करने की मुहिम पंजाब के लिए लाभप्रद साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि पंजाब में पीने वाले पानी का बहुत ज्यादा दुरुपयोग हो रहा है। इस बारे में चेतना पैदा करने की जरूरत है। वैज्ञानिकों ने सुल्तानपुर लोधी के चंडीगढ़ मोहल्ला में सबसे सस्ते ट्रीटमेंट प्लांट को भी देखा और पवित्र काली बेईं की हुई सफाई के बारे में भी जानकारी हासिल की।
इस मौके पर संत सीचेवाल ने कहा कि गंदा पानी श्राप नहीं बल्कि वरदान साबित हो सकता है। सिर्फ इसे दोबारा प्रयोग में लाने की जरूरत है। सीचेवाल माडल को देखने बिहार, पश्चिमी बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और पंजाब के वैज्ञानिक आए थे।