मोगा में एक ही दिन में 17 पॉजिटिव मिले, जिले में कुल पीड़ितों की संख्या पहुंची 55
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मोगा में कोरोना वायरस की चेन लगातार बढ़ती ही जा रही है। मंगलवार को मोगा में 10 नए करोना पीड़ित मरीजों की पुष्टि हुई थी। इसके बाद बुधवार की सुबह फिर से 17 नए लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जिसके बाद जिले में अब तक कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 55 पहुंच गई है।
इसकी पुष्टि करते हुए सहायक सिविल सर्जन डॉ. जसवंत सिंह ने बताया कि बुधवार की सुबह पॉजिटिव आने वाले 17 मरीजों में से तीन मरीज गांव दौलेवाला, एक गांव राऊके, एक संगतपुरा, एक ढुडीके, तीन चूहड़चक्क, दो ठठी भाई, एक गांव मंदर, एक समाध भाई व दो अन्य गांवों से संबंधित है।
वहीं इनमें से एक मरीज मोगा शहर के मोहल्ला लाहौरियां वाला का रहने वाला है। मरीजों की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी पीड़ित मरीजों के परिवारों को घरों में क्वारंटीन करने के बाद उनके सैंपल जुटाने शुरू कर दिए हैं।
कोरोना पीड़ितों के लिए कम पड़ रहे प्रबंध
बता दें कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए मोगा जिला प्रशासन ने सिविल अस्पताल में 48 बेड का आइसोलेश्न वार्ड बनाया था लेकिन एक दम से कोरोना के संदिग्ध मरीजों की संख्या में इजाफा होने के चलते सिविल अस्पताल में बने आइसोलेश्न वार्ड में जगह नहीं बची।
बुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने 17 पॉजिटिव आए मरीजों को बाघापुराना के आइसोलेश्न वार्ड में शिफ्ट किया। प्रशासन द्वारा बनाए गए क्वारंटीन केंद्रों में कोरोना के पॉजिटिव व संदिग्ध मरीजों को खाने समेत अन्य प्रकार की सुविधाएं पूरी तरह नही मुहैया करवाई जा पा रही।
प्रशासनिक आदेशों को तार-तार कर रहे लोग
जिला मजिस्ट्रेट के आदेश मुताबिक बुधवार को जिले में मोबाइल की दुकानें खोली जानी थीं। बुधवार सुबह करीब सात बजे जब शहर के मेजिस्टिक रोड स्थित मोबाइल शाप की मार्केट खुली तो वहां पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटने लगी।
बताया जा रहा है कि इस दौरान वहां पर बहुत से पुलिसकर्मी भी अपना काम करवाने पहुंचे। डीसी संदीप हंस का कहना था कि मामला उनके ध्यान में नही है, एसएसपी को कर्फ्यू के आदेश सख्ती से लागू करवाने को कहा गया है।
महाराष्ट्र से साइकिल पर लौटे 7 मजदूर
महाराष्ट्र में शिरडी के पास एक गांव में गेहूं काटने गए मोगा जिले के गांव लंडेके निवासी लॉकडाउन के कारण वहीं फंस गए थे। काम बंद होने के कारण उनके पास पैसों की कमी भी आने लगी, जिसके चलते योजना के तहत सभी सातों मजदूरों ने वहां से 7 नई साइकिल खरीदीं और इन्हीं पर वहां से मोगा तक का 1800 किलोमीटर का सफर किया।
रास्ते में मध्य प्रदेश, राजस्थान व अन्य प्रदेशों के बार्डर पर उनसे पूछताछ की जाती तो मजदूर मोगा में कुछ पत्रकारों व अपने पहचान के पुलिस वालों से सिफारिश करवाकर वहां से निकल लेते। 5 मई को सभी सातों मजदूर अपने गांव पहुंचे तो लोगों ने एतराज जाहिर करते हुए सभी लोगों को अस्पताल में भर्ती होने को कहा।
सूत्रों के अनुसार कुछ गांव वासियों के साथ मजदूरों की हाथापाई भी हुई, जिसके बाद मौके पर थाना सिटी पुलिस को बुलाया गया। ऐसे में पुलिस ने भी सभी सातों लोगों को अपने साथ लेकर जाने के बजाय वहीं उनके घरों में छोड़ते हुए मामला ठंडा कर दिया।
सुबह होने पर जब बात आला अधिकारियों तक पहुंची तो थाना सिटी में पुलिस की ओर से सभी सातों लोगों को उनके घरों से साइकिलों समेत उठाकर थाने लाया गया और फिर उन्हें स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में निजी स्कूल में क्वारंटीन कर दिया गया। थाना प्रभारी इंस्पेक्टर गुरप्रीत सिंह का कहना था कि जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।