{"_id":"5601454761347b63d5217d49019acc4e","slug":"drug-case-racket-investigation-government-punjab-international-scandal","type":"story","status":"publish","title_hn":"ड्रग रैकेट जांच केस: जांच के मुद्दे पर सरकार में मतभेद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ड्रग रैकेट जांच केस: जांच के मुद्दे पर सरकार में मतभेद
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 26 Nov 2013 06:29 PM IST
विज्ञापन
पंजाब में सात सौ करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट के खुलासे के बाद अब इसकी निष्पक्ष जांच को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
विज्ञापन
उधर, राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने सीबीआई जांच की पेशकश कर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के उस दावे की हवा निकाल दी है जिसमें उन्होंने पंजाब पुलिस की जांच को विश्वसनीय करार देते हुए अन्य किसी एजेंसी से जांच कराने से साफ इनकार किया था।
विज्ञापन
बादल के इस रुख से सरकार में मतभेद उभरकर सामने आ गया है।
ड्रग रैकेट में सत्ताधारियों के नाम सामने आने के बाद कांग्रेस ने सीबीआई जांच की मांग की और पांचों सिंह साहिबान ने भी इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
बावजूद इसके मुख्यमंत्री ने किसी अन्य एजेंसी से जांच की मांग को ठुकरा दिया। इसके एक दिन बाद ही राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने सीबीआई जांच की पेशकश कर बादल के दावे की हवा निकाल दी।
विज्ञापन
सरकार की दुविधा का आलम यह है कि इस गंभीर मसले पर सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे नेताओं की अलग-अलग राय है और उनमें तालमेल की कमी है।
ड्रग रैकेट की जांच के दौरान यूथ अकालीदल के प्रदेश महासचिव मनिंदर सिंह औलख की गिरफ्तारी और मास्टरमाइंड जगदीश भोला के सामने आमने-सामने बिठाकर हुई पूछताछ में शिअद सांसद रतन सिंह अजनाला और उनके विधायक बेटे बोनी अजनाला की ओर इशारा किया जाने से मामला बेहद संगीन हो गया है।
आरोप लगने के बाद दोनों पिता-पुत्र ने अभी तक इन आरोपों का खंडन नहीं किया है और दोनों चुप्पी साधे हैं। ड्रग तस्करी से हासिल काली कमाई से लग्जरी कारों की खरीद और उसका उपयोग सत्ताधारी अकालीदल के नेताओं द्वारा किए जाने के खुलासे राज्य सरकार की छवि को तार-तार कर दिया है।