लुधियाना गैस हादसा: दुनिया देखने से पहले ही उजड़ा आर्यन का संसार, दो दिन से मौसी के पास रह रहा आठ माह का मासूम
माधुरी ने बताया कि आठ महीने पहले जब आर्यन का जन्म हुआ तो परिवार काफी खुश था। हमने इलाके के लोगों के साथ मिलकर जश्न मनाया था। मगर हादसे ने आर्यन का संसार ही उजाड़ कर रख दिया। उसे माता-पिता और दादी की गोद की आदत थी।
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लुधियाना गैस हादसे में बाल-बाल बचे आठ माह के बच्चे आर्यन अभी दुनिया देखने लायक भी नहीं हुआ था, लेकिन इससे पहले ही उसका संसार उजड़ गया। आर्यन ने इस हादसे में अपने माता-पिता और दादी को खो दिया। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के रहने वाले इस परिवार में आर्यन और उसके ताया गौरव गोयल ही बचे हैं। परिवार में कोई महिला नहीं है, इसलिए आर्यन का पालन-पोषण इलाके में ही रहने वाली उसकी मौसी माधुरी देवी करेंगी।
माता पिता और दादी को हादसे में खोया, परिवार में नहीं है कोई महिला
माधुरी बच्चे को गोद में उठाए घर के बाहर बैठी रहती हैं। इलाके के लोग परिवार को सांत्वना देने आ रहे हैं। मासूम बच्चे को देख कर हर एक व्यक्ति की आंख में आंसू आ जाते हैं। आर्यन भी जब नींद से जागता है तो मां को ढूंढने लगता है। नहीं मिलते पर रोने लगता है। किसी तरह से उसकी मौसी उसे संभालने में लगी है। माधुरी का कहना है कि अब वही उसका पालन-पोषण करेगी और आर्यन को किसी को नहीं देगी। आर्यन ही उसकी छोटी बहन की निशानी है, जो हमेशा यह अहसास दिलाएगा कि मेरी बहन मेरे पास ही है।
आर्यन की देख भाल करने के लिए कोई महिला नहीं
माधुरी ने बताया कि आठ महीने पहले जब आर्यन का जन्म हुआ तो परिवार काफी खुश था। हमने इलाके के लोगों के साथ मिलकर जश्न मनाया था। मगर हादसे ने आर्यन का संसार ही उजाड़ कर रख दिया। उसे माता-पिता और दादी की गोद की आदत थी। अब किसी के पास टिक नहीं पा रहा। माधुरी ने बताया कि आर्यन के पिता सौरव और माता प्रीति के साथ साथ दादी कीर्ति की हादसे में मौत के बाद परिवार सदमे में है। ताया गौरव गोयल का करीब बीस दिन पहले तलाक हो गया है और उनके बच्चे उनकी पत्नी के पास हैं। घर में आर्यन की देख भाल करने के लिए कोई महिला नहीं है।
पड़ोसी महिला ने बताया कैसे बचाया आर्यन को
गोयल परिवार के पड़ोसी महिला शिकांती ने बताया कि जब हादसा हुआ तो पूरे इलाके में कोहराम मच गया था। हर कोई अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहा था। जब गोयल कोल्ड डि्रंक स्टोर के बाहर लोग गिर रहे थे तो पड़ोसी महिला घर के अंदर चली गई कि घर के लोगों को जल्द बाहर बुला कर उन्हें बचाए, लेकिन कुदरत को यह मंजूर नहीं था। उन्होंने तुरंत बच्चे को उठाया और बाहर की तरफ दौड़ पड़ी। इसी दौरान वह महिला भी वहां गिर गई। शिकांती ने बताया कि मेरे देवर राज कुमार ने महिला से बच्चा लेकर मुझे पकड़ा दिया और महिला को टेंपो में डालकर नजदीकी अस्पताल ले गया। सारा दिन बच्चा मेरे पास रहा। जब पता चला कि आर्यन की मौसी और अन्य रिश्तेदार अस्पताल पहुंच गए हैं तो उन्होंने आर्यन उन्हें सौंप दिया।