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वरिष्ठ कांग्रेसी मदन लाल जलालपुर ने दिया इस्तीफा
अमर उजाला, पटियाला
Updated Fri, 03 Jan 2014 10:28 PM IST
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कांग्रेस में प्रदेश प्रधान प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ मोरचाबंदी तेज होती जा रही है। अब पटियाला के विधानसभा हलका घन्नौर से पूर्व विधायक मदन लाल जलालपुर ने कांग्रेस की नई कार्यकारिणी कमेटी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। जलालपुर का आरोप है कि बाजवा ने कुछ ऐसे लीडरों को नई कार्यकारिणी में ओहदेदारियां दी हैं, जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहे हैं।
मदन लाल जलालपुर ने पटियाला में एक बयान जारी करके कहा है कि बाजवा की ओर से उन्हें प्रदेश की नई कार्यकारिणी कमेटी में मेंबर बनाने की खुशी से ज्यादा दुख इस बात है कि इस कमेटी में कई ऐसे लीडरों को ओहदेदारियां दी गई हैं, जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहे हैं।
इन लीडरों ने पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी उम्मीदवारों को हराने के लिए काम किया या फिर उनके खिलाफ आजाद तौर पर चुनाव लड़े। यही नहीं नई कार्यकारिणी में ओहदेदारियां वरिष्ठता को नजरअंदाज करके दी गई हैं। भाई-भतीजावाद को बढ़ावा दिया गया है, जिससे वह काफी असंतुष्ट हैं।
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जलालपुर ने अपने बयान में कहा है कि उन्होंने अब तक पार्टी के लिए पूरी तरह से ईमानदारी और मेहनत से काम किया है। 2007 में विधानसभा चुनाव उन्होंने आजाद उम्मीदवार के तौर पर हलका घन्नौर से लड़ा और जीते भी। तत्कालीन अकाली सरकार ने उन्हें पार्टी में शामिल होने के लिए कई प्रलोभन दिए, लेकिन फिर भी उन्होंने कांग्रेस का साथ दिया।
राष्ट्रपति चुनाव में भी उन्होंने कांग्रेस का साथ दिया। लेकिन अब कांग्रेस में पार्टी के लिए ईमानदारी और मेहनत से काम करने वालों को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसलिए उन्होंने नई कार्यकारिणी की मेंबरशिप से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा उन्होंने प्रदेश प्रधान बाजवा को भेज दिया है। साथ ही जलालपुर ने बाजवा को अपनी कार्यशैली में सुधार के साथ-साथ इस नई कार्यकारिणी कमेटी पर भी दोबारा विचार करने की मांग की है।
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मदन लाल जलालपुर ने पटियाला में एक बयान जारी करके कहा है कि बाजवा की ओर से उन्हें प्रदेश की नई कार्यकारिणी कमेटी में मेंबर बनाने की खुशी से ज्यादा दुख इस बात है कि इस कमेटी में कई ऐसे लीडरों को ओहदेदारियां दी गई हैं, जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहे हैं।
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इन लीडरों ने पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी उम्मीदवारों को हराने के लिए काम किया या फिर उनके खिलाफ आजाद तौर पर चुनाव लड़े। यही नहीं नई कार्यकारिणी में ओहदेदारियां वरिष्ठता को नजरअंदाज करके दी गई हैं। भाई-भतीजावाद को बढ़ावा दिया गया है, जिससे वह काफी असंतुष्ट हैं।
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जलालपुर ने अपने बयान में कहा है कि उन्होंने अब तक पार्टी के लिए पूरी तरह से ईमानदारी और मेहनत से काम किया है। 2007 में विधानसभा चुनाव उन्होंने आजाद उम्मीदवार के तौर पर हलका घन्नौर से लड़ा और जीते भी। तत्कालीन अकाली सरकार ने उन्हें पार्टी में शामिल होने के लिए कई प्रलोभन दिए, लेकिन फिर भी उन्होंने कांग्रेस का साथ दिया।
राष्ट्रपति चुनाव में भी उन्होंने कांग्रेस का साथ दिया। लेकिन अब कांग्रेस में पार्टी के लिए ईमानदारी और मेहनत से काम करने वालों को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसलिए उन्होंने नई कार्यकारिणी की मेंबरशिप से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा उन्होंने प्रदेश प्रधान बाजवा को भेज दिया है। साथ ही जलालपुर ने बाजवा को अपनी कार्यशैली में सुधार के साथ-साथ इस नई कार्यकारिणी कमेटी पर भी दोबारा विचार करने की मांग की है।