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Punjab: 80 और 90 साल के बुजुर्ग 120 फीट ऊंचे बिजली के टावर पर चढ़े, मनाने में जुटे SDM, नायब तहसीलदार और पुलिस
Tue, 10 Jun 2025 04:51 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 10 Jun 2025 04:51 PM IST
सार
बैराज ओस्ती संघर्ष कमेटी जेनी जुगियाल के प्रधान दयाल सिंह ने बताया कि वह पिछले 35 सालों से नौकरी की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं मगर शासन एवं प्रशासन की ओर से उन्हें टालमटोल कर गुमराह करने का काम किया जाता रहा।
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बिजली के टावर पर चढ़े दो बुजुर्ग
- फोटो : संवाद
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विस्तार
शाहपुरकंडी बैराज ओस्ती संघर्ष कमेटी जेनी जुगियाल द्वारा रोजगार की मांग पर लगभग दो वर्ष चुप रहने के बाद बड़े संघर्ष का आगाज कर दिया गया। सोमवार देर रात संघर्ष कमेटी के दो बुजुर्ग नेता 90 वर्षीय शर्म सिंह एवं 80 वर्षीय कुलविंदर सिंह शाहपुरकंडी के साथ लगते गांव सदोड़ी स्थित लंबे समय से बंद पड़े बिजली के 120 फुट ऊंचे टावर पर चढ़ गए।
मंगलवार सुबह भी 42 डिग्री तापमान में दोनों बुजुर्ग टावर पर अपनी मांगों संबंधी डटे रहे। हालांकि दोनों बुजुर्गों का खाना पीना टावर पर ही चल रहा है और सूत्रों की माने तो आगे यह भूख हड़ताल भी कर सकते हैं। बुजुर्गों के टावर पर चढ़ने की सूचना मिलते ही प्रशासन के हाथ पांव फूल गए।
बैराज ओस्ती संघर्ष कमेटी जेनी जुगियाल के प्रधान दयाल सिंह ने बताया कि वह पिछले 35 सालों से नौकरी की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं मगर शासन एवं प्रशासन की ओर से उन्हें टालमटोल कर गुमराह करने का काम किया जाता रहा।
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प्रधान दयाल सिंह ने बताया कि बांध प्रशासन द्वारा पिछले समय में शाहपुरकंडी बैराज परियोजना पर नौकरी कर रहे 32 कर्मचारियों को यह कहकर नौकरी से निकाल दिया गया कि इन कर्मचारियों के प्रशासन को शाहपुरकंडी बैराज ओस्ती के संबंध में दिए गए दस्तावेज जाली थे, लेकिन 5-6 महीनों के बाद प्रशासन ने उन्हें दोबारा बहाल कर नौकरी पर रख लिया। इसके संबंध में उन्होंने परियोजना के चीफ इंजीनियर को लिखित तौर पर पूछा कि इन कर्मचारियों को नौकरी पर कैसे रखा गया और पहले क्यों निकाला गया? जिसके चलते उन्होंने इसमें दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन, किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
दयाल सिंह ने बताया कि इस संबंध में जब बुजुर्ग नेता परियोजना की मुख्य अभियंता को मिलने के लिए गए तो उनके कार्यालय के बाहर ही परिवारों की महिलाओं द्वारा पुलिस की मौजूदगी में इन बुजुर्गों पर जूतों से हमला कर दिया गया। इस संबंध में पुलिस को भी लिखित शिकायत की गई। परंतु, उल्टा बुजुर्गों को ही 10 दिन के लिए जेल में बंद कर दिया गया।
दयाल सिंह ने जिलाधीश एवं एसएसपी पठानकोट से मांग करते हुए कहा कि वह इन गरीब ओस्ती परिवारों को न्याय दिलाए। वहीं, शाहपुरकंडी बैराज परियोजना के अधिशासी अभियंता लखविंदर सिंह के मुताबिक इस संबंध में जिला प्रशासन द्वारा ही अगली कार्रवाई की जाएगी। जबकि थाना प्रभारी शाहपुरकंडी अमनप्रीत कौर ने कहा कि वह इस समय मौके पर मौजूद हैं तथा एसडीएम पठानकोट, नायब तहसीलदार सहित बांध परियोजना के कई अधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं तथा टावर पर चढ़े बुजुर्गों को नीचे उतरने का प्रयास चल रहा है।
हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी दोनों संघर्ष कर्मी बुजुर्ग टावर से मंगलवार शाम तक नीचे नहीं उतरे हैं। दूसरी तरफ संघर्ष कमेटी का यह भी कहना है कि अब आर पार की लड़ाई है और हमारी मांगे नहीं मानी तो ओर परिणाम गंभीर निकलेंगे।
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मंगलवार सुबह भी 42 डिग्री तापमान में दोनों बुजुर्ग टावर पर अपनी मांगों संबंधी डटे रहे। हालांकि दोनों बुजुर्गों का खाना पीना टावर पर ही चल रहा है और सूत्रों की माने तो आगे यह भूख हड़ताल भी कर सकते हैं। बुजुर्गों के टावर पर चढ़ने की सूचना मिलते ही प्रशासन के हाथ पांव फूल गए।
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बैराज ओस्ती संघर्ष कमेटी जेनी जुगियाल के प्रधान दयाल सिंह ने बताया कि वह पिछले 35 सालों से नौकरी की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं मगर शासन एवं प्रशासन की ओर से उन्हें टालमटोल कर गुमराह करने का काम किया जाता रहा।
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प्रधान दयाल सिंह ने बताया कि बांध प्रशासन द्वारा पिछले समय में शाहपुरकंडी बैराज परियोजना पर नौकरी कर रहे 32 कर्मचारियों को यह कहकर नौकरी से निकाल दिया गया कि इन कर्मचारियों के प्रशासन को शाहपुरकंडी बैराज ओस्ती के संबंध में दिए गए दस्तावेज जाली थे, लेकिन 5-6 महीनों के बाद प्रशासन ने उन्हें दोबारा बहाल कर नौकरी पर रख लिया। इसके संबंध में उन्होंने परियोजना के चीफ इंजीनियर को लिखित तौर पर पूछा कि इन कर्मचारियों को नौकरी पर कैसे रखा गया और पहले क्यों निकाला गया? जिसके चलते उन्होंने इसमें दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन, किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
दयाल सिंह ने बताया कि इस संबंध में जब बुजुर्ग नेता परियोजना की मुख्य अभियंता को मिलने के लिए गए तो उनके कार्यालय के बाहर ही परिवारों की महिलाओं द्वारा पुलिस की मौजूदगी में इन बुजुर्गों पर जूतों से हमला कर दिया गया। इस संबंध में पुलिस को भी लिखित शिकायत की गई। परंतु, उल्टा बुजुर्गों को ही 10 दिन के लिए जेल में बंद कर दिया गया।
दयाल सिंह ने जिलाधीश एवं एसएसपी पठानकोट से मांग करते हुए कहा कि वह इन गरीब ओस्ती परिवारों को न्याय दिलाए। वहीं, शाहपुरकंडी बैराज परियोजना के अधिशासी अभियंता लखविंदर सिंह के मुताबिक इस संबंध में जिला प्रशासन द्वारा ही अगली कार्रवाई की जाएगी। जबकि थाना प्रभारी शाहपुरकंडी अमनप्रीत कौर ने कहा कि वह इस समय मौके पर मौजूद हैं तथा एसडीएम पठानकोट, नायब तहसीलदार सहित बांध परियोजना के कई अधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं तथा टावर पर चढ़े बुजुर्गों को नीचे उतरने का प्रयास चल रहा है।
हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी दोनों संघर्ष कर्मी बुजुर्ग टावर से मंगलवार शाम तक नीचे नहीं उतरे हैं। दूसरी तरफ संघर्ष कमेटी का यह भी कहना है कि अब आर पार की लड़ाई है और हमारी मांगे नहीं मानी तो ओर परिणाम गंभीर निकलेंगे।