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पंजाब सरकार का फैसला: रणजीत सागर झील में नहीं चलेंगी वाटर बस, सुखबीर बादल का ड्रीम प्रोजेक्ट बंद
Wed, 22 Jan 2025 08:48 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 22 Jan 2025 08:48 AM IST
सार
अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार में 2016 में वाटर बस सेवा शुरू की थी, लेकिन इसके नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर भ्रष्टाचार किया गया। 8.63 करोड़ रुपये की लागत से यह वाटर बस सेवा शुरू की गई थी। अब सरकार का कहना है कि जो बसें खरीदी गई थी, वह पूरी तरह खराब हो चुकी है।
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पंजाब
- फोटो : फाइल
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विस्तार
रणजीत सागर झील में वाटर बस सेवा शुरू नहीं होगी। पंजाब के पर्यटन और सांस्कृतिक मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि वाटर बस सेवा शुरू करना लोगों की जान को जोखिम में डालने के बराबर है, क्योंकि जो बसें खरीदी गई थी, वह पूरी तरह खराब हो चुकी है। अगर इन बसों को रणजीत सागर झील में उतारा गया तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है। ऐसे में सरकार ने तत्काल प्रभाव से इस पर रोक लगा दी है।
पर्यटन मंत्री सौंद ने कहा कि अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार में 2016 में यह सुविधा शुरू की गई थी, लेकिन इसके नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर भ्रष्टाचार किया गया। 8.63 करोड़ रुपये की लागत से यह वाटर बस सेवा शुरू की गई थी। रणजीत सागर झील में इस सेवा को बहुत ही कम समय के लिए संचालित किया गया। इस भ्रष्टाचार के मामले में विभाग ने जांच शुरू कर दी है। इसमें जो भी अधिकारी संलिप्त थे और सरकार के समय किस फर्म के जरिये यह वाटर बस सेवा शुरू की गई थी, उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
मंत्री सौंद ने स्पष्ट किया है कि इस योजना पर 8.63 करोड़ खर्च करना गलत निर्णय था। मंत्री ने कहा कि यह वाटर बस योजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, जबकि आमदनी नाममात्र की थी। यह ‘सुपर फेल’ परियोजना पिछली सरकारों के गलत निर्णयों का परिणाम है, जिससे जनता के धन की बर्बादी हुई। यह धन जनकल्याण योजनाओं में इस्तेमाल किया जा सकता था।
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पर्यटन मंत्री सौंद ने कहा कि अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार में 2016 में यह सुविधा शुरू की गई थी, लेकिन इसके नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर भ्रष्टाचार किया गया। 8.63 करोड़ रुपये की लागत से यह वाटर बस सेवा शुरू की गई थी। रणजीत सागर झील में इस सेवा को बहुत ही कम समय के लिए संचालित किया गया। इस भ्रष्टाचार के मामले में विभाग ने जांच शुरू कर दी है। इसमें जो भी अधिकारी संलिप्त थे और सरकार के समय किस फर्म के जरिये यह वाटर बस सेवा शुरू की गई थी, उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
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मंत्री सौंद ने स्पष्ट किया है कि इस योजना पर 8.63 करोड़ खर्च करना गलत निर्णय था। मंत्री ने कहा कि यह वाटर बस योजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, जबकि आमदनी नाममात्र की थी। यह ‘सुपर फेल’ परियोजना पिछली सरकारों के गलत निर्णयों का परिणाम है, जिससे जनता के धन की बर्बादी हुई। यह धन जनकल्याण योजनाओं में इस्तेमाल किया जा सकता था।
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