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राजनीति: नशा तस्करी, बेअदबी पर क्या कार्रवाई?, चुनावी बिसात पर सियासी दलों की मुद्दों-विवादों पर घेराबंदी तेज

Sun, 27 Sep 2026 03:32 PM IST
Sharukh Khan मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Sharukh Khan Updated Sun, 27 Sep 2026 03:32 PM IST
सार

विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में सभी राजनीतिक पार्टियां विभिन्न मुद्दों पर एक-दूसरे को घेर रहीं है। कई मुद्दे चुनावी मिजाज से इतर हैं, सोशल मीडिया से लेकर जनता के बीच तक खूब मुद्दे उछाले जा रहे हैं।

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punjab assembly election 2027 Political parties intensify their offensive over issues and controversies
पंजाब विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पंजाब में सजी चुनावी बिसात पर सियासी दलों ने विभिन्न मुद्दों और विवादों पर एक-दूसरे की घेराबंदी तेज कर दी है। ये राजनीतिक पार्टियां अपने विरोधियों को चुनावी ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत मुद्दों पर भी घेर रही हैं। पंजाब में ऐसा पहली बार नहीं है। 
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पिछले चुनावों का ट्रेंड देखें तो पार्टियां सूबे में चुनाव से इतर मुद्दों का इस्तेमाल अपने विरोधियों के खिलाफ सियासी हथियार के रूप में करती आई हैं। सोशल मीडिया से लेकर जनता के बीच इन मुद्दों को खूब उछाला जा रहा है। 
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सूबे की सियासत का मिजाज देखें तो इस तरह के मुद्दे और विवाद चुनाव के दौरान असरदार साबित होते हैं। चुनावी मुद्दों से अलग व्यक्तिगत विवादों, निजी बयानों और गैर-पारंपरिक मुद्दों का चुनावों पर काफी गहरा और निर्णायक असर पड़ता है। 
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राजनीतिक मामलों के जानकार जगतार सिंह कहते हैं कि ऐसे मुद्दे और विवाद चुनाव के दौरान मतदाताओं के बीच एक धारणा बनाते हैं और इससे संबंधित उम्मीदवार व पार्टी को जूझना पड़ता है। चूंकि इस समय सोशल मीडिया का खासा प्रभाव है, लिहाजा ये मुद्दे मतदाताओं, खासकर युवाओं पर अपना प्रभाव छोड़ते हैं।

 

वे कहते हैं कि चूंकि पंजाब एक पंथक सूबा है, इसलिए पंथ से जुड़े मुद्दे व विवाद यहां चुनाव के दौरान ज्यादा संवेदनशील बनते हैं। इन दिनों सभी राजनीतिक दल ऐसे ही मुद्दों और विवादों के सहारे अपनी-अपनी चुनावी जमीन तैयार कर रहे हैं।

 

नशा तस्करी-कानून व्यवस्था का मुद्दा उछाल रही भाजपा
भाजपा ने इन दिनों आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को विभिन्न मुद्दों के जरिये निशाने पर लिया हुआ है। इनमें नशा तस्करी प्रमुख है। 30 सितंबर तक नशा मुक्त पंजाब यात्राएं निकाली जा रही हैं। 

 

इसके अलावा कानून-व्यवस्था और अपराध, भ्रष्टाचार और कथित प्रशासनिक अनियमितताएं, पंजाब पर बढ़ता कर्ज, रोजगार और युवाओं का भविष्य जैसे मुद्दे भी खूब उछाले जा रहे हैं। उधर, भाजपा नेता एचएस फूल्का ने 1984 के सिख दंगों का मुद्दा छेड़कर कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर भी भाजपा खूब तंज कस रही है।

बेअदबी पर क्या कार्रवाई? पूछ रहा शिअद
शिअद इन दिनों पंजाब बचाओ रैलियों के दौरान लोगों को अपने कार्यकाल के शासन की याद दिलाते हुए आप को नशा, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और कल्याण योजनाओं का श्रेय लेने के आरोपों में घेर रही है। आप सरकार से बेअदबी के मामलों में कार्रवाई और जवाबदेही का सवाल भी पूछा जा रहा है। शिअद ने कांग्रेस को भी इसी मुद्दे पर घेरा है, क्योंकि साल 2017 में कांग्रेस भी इसी मुद्दे को भुनाते हुए सत्ता में आई थी। किसान व किसानी, पंजाब के अधिकार और केंद्र की नीतियों के मुद्दों पर भाजपा भी शिअद के निशाने पर है।

 

गुलजार, मोहनजीत के मुद्दे पर कांग्रेस आक्रामक
कांग्रेस ने नशा तस्करी, कानून-व्यवस्था के साथ-साथ अपने-अपने इलाकों में नशे का विरोध करने वाले गुलजार सिंह आत्महत्या प्रकरण व सीएम के कार्यक्रम में काला झंडा दिखाने के बाद मोहनजीत सिंह के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को बड़ा मुद्दा बनाया है। पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी सरकार पर दलित हितों की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं।

कर्मचारियों के बकाया डीए व भ्रष्टाचार पर भी सरकार को घेरा जा रहा है। कांग्रेस के एक नेता ने तो अब आप नेताओं पर व्यक्तिगत हमले शुरू कर दिए हैं, जिसकी आप ने कड़े शब्दों में निंदा की है। जबकि एक महिला नेत्री ने कांग्रेस नेता को जेल भिजवाने तक चुप न बैठने की बात कही है।

नशे को शिअद-भाजपा गठबंधन की देन बता रही आप
आम आदमी पार्टी सूबे में ड्रग्स के मुद्दे पर पलटवार करते हुए इसे शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार की देन बता रही है। इसके अलावा शिअद सरकार के कार्यकाल में हुईं बेअदबी की घटनाओं पर एसआईटी जांच के जरिये शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल की घेराबंदी जारी है। 

 

इसके अलावा आप चंडीगढ़ पर अधिकार, भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड, एसवाईएल, ग्रामीण विकास फंड और बॉर्डर एरिया फंड जैसे मुद्दे भाजपा के खिलाफ उठा रही है। नशे पर काउंटर करते हुए आप दावा कर रही है कि पंजाब में अधिकतर नशे की आपूर्ति गुजरात के रास्ते हो रही है। ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप भी केंद्र पर मढ़ा जा रहा है।
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