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Ludhiana West By Poll: क्या गुटबाजी का शिकार बने आशु.... जानें क्यों शिअद की जगह ले रही भाजपा

Tue, 24 Jun 2025 11:04 AM IST
निवेदिता वर्मा विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़
विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 24 Jun 2025 11:04 AM IST
सार

आप के संजीव अरोड़ा की जीत के पीछे की चार अहम वजहों की अगर बात करें तो उप चुनाव ज्यादातर सत्तापक्ष के हक में रहता है। दूसरा केजरीवाल और सीएम मान की उद्योगपतियों को गारंटी और अरोड़ा को कैबिनेट मंत्री बनाने के वायदे से भी जनता को अपने हलके में विकास की उम्मीद बंधी।

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Ludhiana West By Poll Congress Candidate Bharat Bhushan Ashu lost
संजीव अरोड़ा, भारत भूषण आशु, जीवन गुप्ता और परउपकार सिंह घुम्मण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लुधियाना पश्चिम उप चुनाव में भारत भूषण आशु की हार को सीधे तौर पर कांग्रेस की गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है। पंजाब कांग्रेस के कई बड़े चेहरे उप चुनाव में प्रचार के दौरान आशु के साथ खुलकर नहीं आए। प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा सिर्फ नामांकन के दौरान ही एकसाथ दिखाई दिए। 

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आशु की हार के पीछे एक कारण और बताया जा रहा है कि उनके करीबी सिमरजीत सिंह बैंस के कट्टर विरोधी कमलजीत सिंह कड़वल को आशु ने पार्टी जॉइन कराई, जिसका उन्हें चुनाव में खामियाजा भुगतना पड़ता। आशु की हार के पीछे केजरीवाल का उप चुनाव से पहले उद्योग जगत के लिए खोला गया पिटारा भी बताया जा रहा है।

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अंतिम पायदान पर अकाली दल

वहीं क्षेत्रीय पार्टी का टैग लगाकर हरेक चुनाव में उतरने वाला शिरोमणि अकाली दल इस बार अंतिम पायदान पर नजर आया। शिअद को महज 8,203 वोट मिले, गठंबधन की राह छोड़कर पंजाब में अपनी डगर तय कर रही भाजपा 12 हजार वोटों से आगे रही, यानी पंजाब में अब भाजपा शिअद की जगह लेती जा रही है।

संजीव अरोड़ा को मिला कई बातों का फायदा

आप के संजीव अरोड़ा की जीत के पीछे की चार अहम वजहों की अगर बात करें तो उप चुनाव ज्यादातर सत्तापक्ष के हक में रहता है। दूसरा केजरीवाल और सीएम मान की उद्योगपतियों को गारंटी और अरोड़ा को कैबिनेट मंत्री बनाने के वायदे से भी जनता को अपने हलके में विकास की उम्मीद बंधी। तीसरा प्रतिद्वंदियों में अंतर्कलह और चौथा मान सरकार के तीन साल के कामकाज के बूते जनता के बीच उतरना अहम कारण है।

कांग्रेस को दूर करनी होगी अंतर्कलह, भाजपा अपना सेटअप बनाने में जुटी

2027 के चुनाव में अगर कांग्रेस को सत्ता पर काबिज होना है, तो इसके लिए प्रदेश इकाई के बड़े नेताओं को आपसी गुटबाजी व अंतर्कलह को दूर करना होगा। यूं तो पंजाब कांग्रेस के नेताओं की आपसी गुटबाजी व अंतर्कलह की झलक प्रभारी भूपेष बघेल देख चुके हैं। बघेल ने उस समय नेताओं को चेतावनी दी थी, लेकिन उसका कोई खास असर नहीं दिखाई पड़ा। भाजपा के प्रत्याशी जीवन गुप्ता का नाम चुनाव के लिए एकदम आखिर में तय हुआ, कम समय मिलने के बावजूद जीवन गुप्ता ने वोटों की गिनती में कई बार कांग्रेस के आशु को तीसरे पायदान पर लाकर खड़ा किया। हालांकि चुनाव के अंत में जीवन गुप्ता 20,323 वोट से तीसरे स्थान पर रहे, जो बीजेपी को शिअद से ऊपर करता है।
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