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Chandigarh: एनएचएम कर्मचारियों को हाईकोर्ट की बड़ी राहत, अब अनुभव अंक जोड़कर बनेगी मेरिट सूची
Mon, 22 Jun 2026 10:39 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Mon, 22 Jun 2026 10:39 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने इसे अनुचित और भेदभावपूर्ण बताया। अदालत ने कहा कि विभाग स्वयं कार्यों और जिम्मेदारियों में समानता स्वीकार कर चुका है। ऐसे में केवल पदनाम के आधार पर अनुभव को अस्वीकार नहीं किया जा सकता।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने बहुद्देश्यीय स्वास्थ्य कर्मचारियों (पुरुष) भर्ती के अभ्यर्थियों को राहत दी है। अदालत ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत काम कर चुके अभ्यर्थियों के अनुभव अंक जोड़कर मेरिट सूची दोबारा बनाने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि केवल पदनाम अलग होने के आधार पर अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जस्टिस संदीप मौदगिल ने 2015 की भर्ती याचिकाओं का निपटारा किया। उन्होंने अधिकारियों को दो महीने में अनुभव अंक जोड़कर मेरिट दोबारा तय करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने एनएचएम में सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर (एसटीएस) और पैरा मेडिकल वर्कर (पीएमडब्ल्यू) जैसे पदों पर काम किया था। उनका दावा था कि अनुभव अंक जोड़ने पर वे चयन सूची में आ सकते थे। राज्य सरकार ने समान पद पर अनुभव की दलील दी जिसे हाई कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।
अदालत ने बताया कि इसी भर्ती में कुछ अन्य उम्मीदवारों को एसटीएस अनुभव के आधार पर अंक दिए गए थे। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्टों में एसटीएस, पीएमडब्ल्यू और एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) के कार्य समान माने गए थे।
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अदालत का तर्क और आदेश
हाईकोर्ट ने इसे अनुचित और भेदभावपूर्ण बताया। अदालत ने कहा कि विभाग स्वयं कार्यों और जिम्मेदारियों में समानता स्वीकार कर चुका है। ऐसे में केवल पदनाम के आधार पर अनुभव को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने अनुभव अंक नहीं देने की सीमा तक परिणाम रद्द कर दिया। पात्र पाए जाने पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति सहित सभी लाभ देने का आदेश दिया गया है।
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जस्टिस संदीप मौदगिल ने 2015 की भर्ती याचिकाओं का निपटारा किया। उन्होंने अधिकारियों को दो महीने में अनुभव अंक जोड़कर मेरिट दोबारा तय करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने एनएचएम में सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर (एसटीएस) और पैरा मेडिकल वर्कर (पीएमडब्ल्यू) जैसे पदों पर काम किया था। उनका दावा था कि अनुभव अंक जोड़ने पर वे चयन सूची में आ सकते थे। राज्य सरकार ने समान पद पर अनुभव की दलील दी जिसे हाई कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।
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अदालत ने बताया कि इसी भर्ती में कुछ अन्य उम्मीदवारों को एसटीएस अनुभव के आधार पर अंक दिए गए थे। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्टों में एसटीएस, पीएमडब्ल्यू और एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) के कार्य समान माने गए थे।
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अदालत का तर्क और आदेश
हाईकोर्ट ने इसे अनुचित और भेदभावपूर्ण बताया। अदालत ने कहा कि विभाग स्वयं कार्यों और जिम्मेदारियों में समानता स्वीकार कर चुका है। ऐसे में केवल पदनाम के आधार पर अनुभव को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने अनुभव अंक नहीं देने की सीमा तक परिणाम रद्द कर दिया। पात्र पाए जाने पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति सहित सभी लाभ देने का आदेश दिया गया है।
हाईकोर्ट ने इसे अनुचित और भेदभावपूर्ण बताया। अदालत ने कहा कि विभाग स्वयं कार्यों और जिम्मेदारियों में समानता स्वीकार कर चुका है। ऐसे में केवल पदनाम के आधार पर अनुभव को अस्वीकार नहीं किया जा सकता।