फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Chandigarh-Punjab News ›   Former SP sentenced to 10 years imprisonment in fake encounter case 33 years ago Mohali CBI court

33 साल बाद इंसाफ: फर्जी एनकाउंटर...अपने ही विभाग के दो मुलाजिमों को आतंकी बता मारा, पूर्व एसपी को 10 साल कैद

Wed, 23 Jul 2025 09:39 PM IST
अंकेश ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली/अमृतसर
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली/अमृतसर Published by: अंकेश ठाकुर Updated Wed, 23 Jul 2025 09:39 PM IST
सार

पंजाब के अमृतसर में 33 साल पहले फर्जी एनकाउंटर में दो पुलिस मुलाजिमों को आतंकी बता उन्हें मार दिया गया था। मामले में मोहाली सीबीआई कोर्ट ने दोषी पूर्व एसपी को 10 साल की कैद की सजा सुनाई है। 

विज्ञापन
Former SP sentenced to 10 years imprisonment in fake encounter case 33 years ago Mohali CBI court
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

मोहाली स्थित सीबीआई अदालत ने बुधवार को 1993 के एक फर्जी मुठभेड़ मामले में अहम फैसला सुनाया। इस मामले में पंजाब पुलिस के पूर्व एसपी परमजीत सिंह (67) को 10 साल की कैद व 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इस मामले में सहआरोपी रहे एएसआई रामलुभाया की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। अदालत ने इस मामले में पुलिस मुलाजिम धर्म सिंह, कश्मीर सिंह व दरबारा सिंह को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

विज्ञापन


उन पर आरोप था कि उन्होंने पंजाब पुलिस में तैनात दो मुलाजिमों को घर से उठाया और अवैध हिरासत में रखा। बाद में एक फर्जी मुठभेड़ में मार कर शवों का लावारिस के रूप में अंतिम संस्कार कर दिया गया। बलजिंदर सिंह सरा की अदालत ने पूर्व इंस्पेक्टर परमजीत सिंह, तत्कालीन एसएचओ ब्यास को आईपीसी की धारा 343 यानी गलत तरीके से बंधक बनाने और आईपीसी की धारा 364 यानी हत्या के उद्देश्य से अपहरण करने का दोषी ठहराया।
विज्ञापन


सीबीआई के लोक अभियोजक अनमोल नारंग ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने इस मामले की जांच की जिसमें पाया गया कि सुरमुख सिंह निवासी गांव मुच्छल तहसील बाबा बकाला (अमृतसर) पंजाब पुलिस में कांस्टेबल थे। उनको 18 अप्रैल 1993 को सुबह लगभग 6 बजे थाना ब्यास के तत्कालीन एसएचओ परमजीत सिंह के नेतृत्व वाली पुलिस पार्टी ने घर से उठा लिया था। उसी दिन दोपहर लगभग 2 बजे एक अन्य पुलिस कांस्टेबल सुखविंदर सिंह निवासी खेला (अमृतसर) को थाना ब्यास के तत्कालीन एसआई राम लुभाया के नेतृत्व में पुलिस पार्टी ने घर से उठाया था। सीबीआई जांच में यह भी पता चला कि अगले दिन यानी 19 अप्रैल 1993 को सुखविंदर सिंह की मां बलबीर कौर अपने पति दिलदार सिंह के साथ थाना ब्यास गई लेकिन राम लुभाया ने उन्हें सुखविंदर सिंह से मिलने की अनुमति नहीं दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

आतंकवादी बता मारा, लावारिस बता कर किया अंतिम संस्कार
22 अप्रैल, 1993 को जिला मजीठा पुलिस ने अमृतसर के लोपोके थाना के तत्कालीन एसएचओ धर्म सिंह के नेतृत्व में पुलिस पार्टी, सीआईए स्टाफ और सीआरपीएफ पार्टी के साथ मुठभेड़ में दो अज्ञात आतंकवादियों को मारने का दावा किया। इस संबंध में 23 अप्रैल 1993 को थाना लोपोके में मामला दर्ज किया गया। उनके शवों का लावारिस के रूप में अंतिम संस्कार कर दिया गया। हैरानी की बात है कि इस कथित मुठभेड़ मामले में एक सप्ताह के भीतर ही इंस्पेक्टर धर्म सिंह, तत्कालीन एसएचओ थाना लोपोके ने अनट्रेस रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें उल्लेख किया गया कि शवों की पहचान नहीं की गई है और आगे जांच की कोई आवश्यकता नहीं है।

पुलिस ने दस्तावेजों में भी की हेराफेरी
सीबीआई जांच में यह साफ हुआ कि लोपोके पुलिस की ओर से 22 अप्रैल 1993 को मुठभेड़ में मारे गए दिखाए गए दो युवक वास्तव में सुखविंदर सिंह और सुरमुख सिंह थे। सीबीआई जांच में यह भी साबित हुआ कि मुठभेड़ को वास्तविक साबित करने के लिए पुलिस ने दस्तावेजों में हेराफेरी की थी। सीबीआई ने 26 दिसंबर 1995 को प्रारंभिक जांच दर्ज की। दिलदार सिंह की पत्नी बलबीर कौर ने आरोप लगाया कि उसके बेटे सुखविंदर सिंह की हत्या कर दी गई है। 28 फरवरी 1997 को मामला दर्ज किया गया। जांच में मुठभेड़ को फर्जी पाया गया। अब कोर्ट ने पूर्व एसपी को 10 साल की कैद की सजा सुनाई है जबकि तीन पुलिसकर्मी सबूतों के अभाव में बरी हो गए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed