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पंजाब में हर तीसरा बच्चा कुपोषित: लंबाई नहीं बढ़ रही, कम वजन भी बना समस्या.. बाल विकास मंत्रालय की रिपोर्ट
Sat, 15 Mar 2025 01:53 PM IST
निवेदिता वर्मा
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 15 Mar 2025 01:53 PM IST
सार
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पोषण ट्रैकर के डाटा में इसका खुलासा हुआ है। सूबे में इस समय 2274 आंगनबाड़ी हेल्परों व 239 आंगनबाड़ी वर्करों की कमी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब वर्करों की संख्या ही पूरी नहीं है तो सूबे को कुपोषण से मुक्त कैसे किया जाएगा।
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पंजाब में बच्चों में कुपोषण
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
पंजाब में हर तीन में से एक बच्चा कुपोषण का शिकार है। पांच साल तक के 20% बच्चों में स्टंटिंग की समस्या है। इन बच्चों की आयु के साथ लंबाई नहीं बढ़ रही है, जबकि छह फीसदी बच्चे कम वजन का शिकार है।
इसी तरह पांच फीसदी बच्चों का वजन अधिक है, जबकि तीन फीसदी बच्चे वेस्टिंग से जूझ रहे हैं, जो बच्चे अपनी लंबाई के मुताबिक पतले होते हैं, वे वेस्टिंग का शिकार होते हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पोषण ट्रैकर के डाटा में इसका खुलासा हुआ है। सूबे में इस समय 2274 आंगनबाड़ी हेल्परों व 239 आंगनबाड़ी वर्करों की कमी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब वर्करों की संख्या ही पूरी नहीं है तो सूबे को कुपोषण से मुक्त कैसे किया जाएगा।
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प्रदेश के 23 जिलों में 27,313 आंगनबाड़ी केंद्र है, जिन पर 155 परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। इनमें कुल 25,619 आंगनबाड़ी वर्कर काम कर रहे हैं, लेकिन हाल ही में लोकसभा में पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में आंगनबाड़ी वर्करों व हेल्परों दोनों की कमी है। इस कारण आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को जोड़ने के साथ ही सभी योजनाओं का उन तक लाभ पहुंचाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सूबे के 98 प्रतिशत बच्चों के रिकॉर्ड के अनुसार अगर छह साल की आयु के बच्चों की बात की जाए, तो उनमें 19% बच्चों की आयु के साथ लंबाई नहीं बढ़ रही है। सूबे के 14,35,056 बच्चों का यह डाटा तैयार किया जा रहा है।
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इसी तरह पांच फीसदी बच्चों का वजन अधिक है, जबकि तीन फीसदी बच्चे वेस्टिंग से जूझ रहे हैं, जो बच्चे अपनी लंबाई के मुताबिक पतले होते हैं, वे वेस्टिंग का शिकार होते हैं।
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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पोषण ट्रैकर के डाटा में इसका खुलासा हुआ है। सूबे में इस समय 2274 आंगनबाड़ी हेल्परों व 239 आंगनबाड़ी वर्करों की कमी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब वर्करों की संख्या ही पूरी नहीं है तो सूबे को कुपोषण से मुक्त कैसे किया जाएगा।
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प्रदेश के 23 जिलों में 27,313 आंगनबाड़ी केंद्र है, जिन पर 155 परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। इनमें कुल 25,619 आंगनबाड़ी वर्कर काम कर रहे हैं, लेकिन हाल ही में लोकसभा में पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में आंगनबाड़ी वर्करों व हेल्परों दोनों की कमी है। इस कारण आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को जोड़ने के साथ ही सभी योजनाओं का उन तक लाभ पहुंचाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सूबे के 98 प्रतिशत बच्चों के रिकॉर्ड के अनुसार अगर छह साल की आयु के बच्चों की बात की जाए, तो उनमें 19% बच्चों की आयु के साथ लंबाई नहीं बढ़ रही है। सूबे के 14,35,056 बच्चों का यह डाटा तैयार किया जा रहा है।