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चंडीगढ़ में सबसे बड़ी साइबर ठगी: 15 दिन CBI अधिकारी बन बुजुर्ग दंपती को डराया, सवा दो करोड़ ठगे; ऐसे खुली पोल

Thu, 04 Jun 2026 11:16 AM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Thu, 04 Jun 2026 11:16 AM IST
सार

साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपती को फोन कर डराया कि उनके बैंक खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स तस्करी में हुआ है। दंपती को 15 दिन डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराया गया और उनसे करीब सवा दो करोड़ रुपये ठग लिए गए।

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डिजिटल अरेस्ट कर बुजुर्ग दंपती से ठगी - फोटो : AI

विस्तार

चंडीगढ़ में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी सामने आई है। सेक्टर-47 में रहने वाले एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी और उनकी पत्नी को साइबर अपराधियों ने 15 दिनों तक जांच के नाम पर मानसिक दबाव में रखकर 2 करोड़ 15 लाख 50 हजार रुपये ठग लिए।

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ठगों ने खुद को मुंबई स्थित सीबीआई कार्यालय का अधिकारी बताकर दंपती को मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स तस्करी जैसे गंभीर मामलों में फंसाने तथा गिरफ्तारी की धमकी दी। भय और दबाव के चलते दंपती ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी, नकदी और यहां तक कि सोना बेचकर भी रकम साइबर ठगों के खातों में जमा करा दी।
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साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रही है। 

शातिराना तरीके से फंसाया

शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठगों ने बेहद सुनियोजित तरीके से दंपती को अपने जाल में फंसाया। करीब 15 दिन पहले आई एक कॉल में खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने कहा कि उनके बैंक खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स तस्करी में हुआ है। इसके बाद उन्हें लगातार वीडियो कॉल और फोन के जरिए निगरानी में रखा गया।

ऐसे ठगते गए

पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने दंपती को सख्त हिदायत दी कि वे इस मामले की जानकारी किसी रिश्तेदार, मित्र या पड़ोसी को न दें। गिरफ्तारी से बचाने और जांच में सहयोग का हवाला देकर उनसे अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर करवाई गई। पहले घर में रखी नकदी भेजी गई, फिर रिश्तेदारों से उधार लेकर रकम जमा कराई गई। जब यह पैसा भी खत्म हो गया तो ठगों ने घर में रखे सोने के आभूषण बेचने के लिए कहा। डर के कारण दंपती ने ऐसा भी किया और लाखों रुपये उनके खातों में भेज दिए।

पुलिस के अनुसार ठगों की मांग यहीं नहीं रुकी। बाद में उन्होंने दंपती पर मकान के दस्तावेज गिरवी रखकर बैंक से ऋण लेने और वह राशि भी जमा कराने का दबाव बनाया। इसी दौरान दंपती को शक हुआ। जब उन्होंने आगे पैसे देने से इन्कार किया तो ठगों ने संपर्क तोड़ दिया। इसके बाद पीड़ितों ने परिजनों को पूरी जानकारी दी और साइबर पुलिस के पास पहुंचे।

चंडीगढ़ में अकेले रहते हैं बुजुर्ग

जांच में यह भी सामने आया है कि दंपती का बेटा नौकरी के सिलसिले में दूसरे शहर में रहता है और दोनों बुजुर्ग चंडीगढ़ में अकेले रह रहे थे। घटना के बाद वे गहरे सदमे में हैं। 

साइबर विशेषज्ञ तरुण मल्होत्रा ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को घर में नजरबंद नहीं करती और न ही निजी खातों में पैसा जमा कराने को कहती है। साइबर पुलिस ने लोगों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों से अपील की है कि किसी भी केंद्रीय एजेंसी, पुलिस या जांच अधिकारी के नाम पर आने वाली संदिग्ध कॉल पर भरोसा न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या पुलिस से संपर्क करें।

शहर में डिजिटल अरेस्ट के बड़े मामले

मार्च 2026: एक बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 46 लाख रुपये की ठगी। जांच के दौरान गुजरात के गांधीधाम से तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए।
जनवरी 2026: साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग दंपती को निशाना बनाकर 38 लाख रुपये ऐंठ लिए। मामले में 12 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।
दिसंबर 2025: एक महिला से एक करोड़ रुपये की साइबर ठगी। शिकायत के बाद पुलिस ने 36 लाख रुपये होल्ड कराए और 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
रिटायर्ड कर्नल मामला: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 3.41 करोड़ रुपये की ठगी, यह शहर के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहा।
सेक्टर-10ए मामला: 70 वर्षीय पूर्व चीफ आर्किटेक्ट को झांसे में लेकर 2.50 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की गई।

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