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51 दिनों का संघर्ष खत्म: टावर से नीचे उतरे बुजुर्गों की प्रशासन को दो टूक, अब आश्वसान नहीं ठोस समाधान चाहिए

Tue, 13 Oct 2026 03:30 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट
संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट Published by: शाहिल शर्मा Updated Tue, 13 Oct 2026 03:30 PM IST
सार

टावर से नीचे उतरने पर दोनों बुजुर्गों का कहना था कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

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Both elderly men climbed down from the tower in Pathankot
पठानकोट में टावर से नीचे उतारे गए बुजुर्ग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बैराज संघर्ष ओस्ती समिति जैनी जुगियाल के दो बुजुर्ग संघर्षकारियों का 51 दिनों से चला आ रहा टावर पर धरना मंगलवार को समाप्त हो गया। सरकार और डैम प्रशासन के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर माधोपुर क्षेत्र के गांव सिंघोड़ी में करीब 100 फीट ऊंचे टावर पर चढ़े 83 वर्षीय कुलविंदर सिंह और 87 वर्षीय शरम सिंह को जिला प्रशासन ने मंगलवार दोपहर करीब दो बजे क्रेन की मदद से सुरक्षित नीचे उतार लिया। 

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दोनों बुजुर्गों को नीचे उतारने के बाद मेडिकल जांच और उपचार के लिए अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई। दोनों बुजुर्ग पिछले 51 दिनों से अपनी मांगों के समाधान के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ रहे थे। टावर पर उन्होंने तिरपाल और रस्सियों के सहारे अस्थायी ठिकाना बनाया हुआ था। उनकी जिद थी कि जब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं होता, तब तक वे टावर से नीचे नहीं उतरेंगे। 
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आखिरकार प्रशासनिक अधिकारियों की बातचीत और एक सप्ताह के भीतर पंजाब सरकार के मुख्य सचिव तथा सरकार अन्य अधिकारियों के साथ उनकी मांगों पर बातचीत करवाने के आश्वासन के बाद दोनों बुजुर्ग नीचे उतरने के लिए राजी हुए। 
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रस्सी से ऊपर पहुंचाया जाता था खाना, मुश्किल हालात में गुजारे 51 दिन
टावर पर बैठे दोनों बुजुर्गों के लिए हर दिन किसी चुनौती से कम नहीं था। उन्हें रस्सी के सहारे पन्नी में बांधकर खाना-पानी, जरूरत अनुसार दवा ऊपर पहुंचाई जाती थी। दोनों बुजुर्ग पन्नी में शौच करते थे। धूप-बारिश, आंधी और तूफान के बीच दोनों बुजुर्ग अपनी मांगों पर अडिग रहे। बदलते मौसम और शारीरिक परेशानियों के बावजूद पहले उन्होंने टावर से नीचे उतरने से इनकार कर दिया था। इस दौरान जिला प्रशासन के अधिकारी कई बार उनसे बातचीत करने पहुंचे, लेकिन बुजुर्ग अपनी मांगों के समाधान पर अड़े रहे। उनका स्पष्ट कहना था कि वर्षों से लंबित समस्याओं का निपटारा किए बिना वे अपना संघर्ष समाप्त नहीं करेंगे।

डीसी, एसएसपी और अन्य अधिकारियों ने की बातचीत
सोमवार को पठानकोट की डीसी डॉ. पल्लवी ठाकुर, एसएसपी मनप्रीत सिंह, एडीसी अर्शदीप सिंह, डीएसपी धारकलां राजेश कक्कड़ और आप नेता स्वर्ण सलारिया मौके पर पहुंचे। उन्होंने बैराज संघर्ष समिति के सदस्यों के साथ बातचीत की और उनकी मांगों को पंजाब सरकार तथा मुख्य सचिव के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया। समिति को एक सप्ताह के भीतर बातचीत करवाने का भरोसा दिया गया। इसके बाद संघर्ष समिति के सदस्यों ने टावर पर बैठे दोनों बुजुर्गों से फोन के माध्यम से बात कर उन्हें सुरक्षित नीचे उतरने के लिए मनाने का प्रयास किया। काफी समझाने-बुझाने के बाद दोनों बुजुर्ग नीचे उतरने के लिए तैयार हुए। मंगलवार दोपहर जिला प्रशासन की निगरानी में क्रेन के जरिए उन्हें सुरक्षित नीचे लाया गया। इस दौरान संघर्ष समिति का एक सदस्य भी क्रेन के माध्यम से ऊपर पहुंचा, ताकि दोनों बुजुर्गों को सुरक्षित नीचे लाने में सहायता की जा सके।

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15 वर्षों से संघर्ष कर रही है समिति
बैराज संघर्ष समिति जुगियाल के सदस्य अपनी मांगों को लेकर पिछले करीब 15 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। समिति के अनुसार, लंबे समय से समस्याओं के समाधान की मांग उठाई जा रही है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें बार-बार आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। दोनों बुजुर्ग पहले भी अपनी मांगों के समर्थन में टावरों पर चढ़कर विरोध जता चुके हैं। इस बार कुलविंदर सिंह और शरम सिंह ने लगातार 51 दिनों तक करीब 100 फीट की ऊंचाई पर रहकर प्रशासन और सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचने का प्रयास किया। उनके इस कदम ने समिति की मांगों को लेकर चल रहे संघर्ष को एक बार फिर चर्चा में ला दिया। 

एक सप्ताह में समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
टावर से नीचे उतरने के बावजूद संघर्ष समिति ने अपना आंदोलन पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा नहीं की है। समिति के सदस्यों का कहना है कि उन्हें एक सप्ताह के भीतर सरकार के साथ बातचीत करवाने का आश्वासन मिला है। यदि निर्धारित समय में उनकी मांगों के समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई, तो वे इससे भी कड़ा रुख अपनाने के लिए मजबूर होंगे। 51 दिन तक टावर पर डटे रहने के बाद दोनों बुजुर्ग सुरक्षित नीचे तो उतर आए हैं, लेकिन बैराज संघर्ष समिति की असली लड़ाई अब सरकार के साथ होने वाली बातचीत और मांगों के समाधान पर टिकी है।

दोनों बुजुर्ग अपनी मांगों पर अडिग
51 दिनों तक टावर पर डटे रहने के बाद नीचे उतरे बैराज संघर्ष समिति के दोनों बुजुर्गों ने अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर जिला प्रशासन के सामने आवाज बुलंद की। टावर से सुरक्षित नीचे आने के बावजूद दोनों बुजुर्ग अपनी मांगों पर अडिग रहे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिला प्रशासन के साथ बातचीत होने के बाद ही वे मेडिकल उपचार के लिए जाएंगे।
 इस दौरान एक बुजुर्ग की आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने पानी पीते हुए अपनी पीड़ा जाहिर की। 

वहीं, दूसरे बुजुर्ग ने भी जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बातचीत करने और अपनी मांगों का समाधान करने पर जोर दिया। दोनों बुजुर्गों का कहना था कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। मौके पर मौजूद जिला प्रशासन के अधिकारियों ने दोनों बुजुर्गों को काफी समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने उन्हें पहले मेडिकल जांच और उपचार करवाने के लिए कहा तथा भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को लेकर सरकार के साथ बातचीत करवाने का प्रयास किया जाएगा। काफी समझाने-बुझाने के बाद दोनों बुजुर्ग एंबुलेंस में बैठकर उपचार के लिए जाने को तैयार हुए।
 

मेडिकल जांच के बाद घर भेजे जाएंगे दोनों बुजुर्ग
नायब तहसीलदार अंकित माजन ने बताया कि 51 दिनों से टावर पर बैठे दोनों बुजुर्गों कुलविंदर सिंह और शरम सिंह को जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षित नीचे उतार लिया गया है। अब दोनों का मेडिकल चेकअप करवाया जाएगा, जिसके बाद उन्हें उनके घरों के लिए रवाना किया जाएगा। इस दौरान उनके परिवार के सदस्य भी मौके पर मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से एक सप्ताह के भीतर दोनों बुजुर्गों की मांगों को लेकर पंजाब सरकार के साथ बातचीत करवाने का प्रयास किया जाएगा। बातचीत के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि समिति की मांगों पर सरकार का क्या रुख रहता है और किन लोगों को नौकरी का अधिकार बनता है। नौकरी के हक तथा अन्य मांगों की जायजता पर अंतिम फैसला सरकार की ओर से ही लिया जाएगा। प्रशासन का प्रयास है कि बातचीत के माध्यम से लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद का समाधान निकाला जा सके।
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