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Punjab: विधानसभा में बेअदबी पर संशोधित बिल पास होते ही होगा लागू, राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत नहीं
Sat, 11 Apr 2026 09:20 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Sat, 11 Apr 2026 09:20 AM IST
सार
पंजाब में लगातार सामने आ रहे बेअदबी के मामलों के चलते लंबे समय से सख्त कानून की मांग उठ रही थी। आम आदमी पार्टी सरकार ने इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया हुआ है।
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पंजाब विधानसभा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब सरकार 13 अप्रैल को विशेष सत्र के दौरान धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी रोकने से संबंधित संशोधन विधेयक विधानसभा में पेश करेगी। इस पर चर्चा के बाद इसका निर्विरोध पारित होना तय माना जा रहा है।
यह विधेयक पूरी तरह राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए जरूरी औपचारिकताओं के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजने की जरूरत नहीं होगी और पारित होते ही लागू कर दिया जाएगा।
प्रदेश में लगातार सामने आ रहे बेअदबी के मामलों के चलते लंबे समय से सख्त कानून की मांग उठ रही थी। आम आदमी पार्टी सरकार ने इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया हुआ है। जुलाई 2025 में सरकार ने इस संबंध में एक मसौदा विधानसभा में पेश किया था लेकिन विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के सुझाव लेने के लिए इसे विधायक इंदरबीर सिंह निज्जर की अध्यक्षता वाली सिलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया था। बाद में कमेटी को दो महीने का अतिरिक्त समय भी दिया गया।
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अब खालसा पंथ के सृजन दिवस 13 अप्रैल को सरकार इस अहम विधेयक को सदन में लाने जा रही है। यह संवेदनशील और पंथक मुद्दा होने के कारण किसी भी राजनीतिक दल द्वारा विरोध की संभावना कम मानी जा रही है। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान प्रश्नकाल भी नहीं होगा। इस संबंध में स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने नोटिस जारी कर दिया है।
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यह विधेयक पूरी तरह राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए जरूरी औपचारिकताओं के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजने की जरूरत नहीं होगी और पारित होते ही लागू कर दिया जाएगा।
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प्रदेश में लगातार सामने आ रहे बेअदबी के मामलों के चलते लंबे समय से सख्त कानून की मांग उठ रही थी। आम आदमी पार्टी सरकार ने इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया हुआ है। जुलाई 2025 में सरकार ने इस संबंध में एक मसौदा विधानसभा में पेश किया था लेकिन विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के सुझाव लेने के लिए इसे विधायक इंदरबीर सिंह निज्जर की अध्यक्षता वाली सिलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया था। बाद में कमेटी को दो महीने का अतिरिक्त समय भी दिया गया।
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अब खालसा पंथ के सृजन दिवस 13 अप्रैल को सरकार इस अहम विधेयक को सदन में लाने जा रही है। यह संवेदनशील और पंथक मुद्दा होने के कारण किसी भी राजनीतिक दल द्वारा विरोध की संभावना कम मानी जा रही है। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान प्रश्नकाल भी नहीं होगा। इस संबंध में स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने नोटिस जारी कर दिया है।