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जत्थेदार श्री अकाल तख्त के सम्मान को बहाल करना हमारी प्राथमिकता: ढींढसा

Thu, 09 Jul 2020 09:09 PM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2020 09:09 PM IST
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Restoring the honor of Jathedar Shri Akal Takht is our priority: Dhindsa
नई बनाई शिरोमणि अकाली दल पार्टी के मुखी व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव ढींढसा अपने समर्थकों के स? - फोटो : AMRITSAR
बादल परिवार के साथ पांच दशकों की राजनितिक सांझ तोड़ कर बागी हुए पंथक नेता व सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा नई पार्टी का गठन करने के बाद अपने साथियों के साथ वीरवार को श्री हरमंदिर साहिब में शुकराने की अरदास के लिए पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सिख संगत को विश्वास दिलाया कि जिस प्रकार शिअद ने गुरुद्वारा साहिबान की आजादी और इमरजेंसी के दौरान लड़ाई लड़ी थी, इसी प्रकार उनका दल एसजीपीसी व शिअद को बादल परिवार से मुक्त करवाने के लिए एक नई पंथक लहर शुरू करेगा। उनका दल श्री अकाल साहिब के जत्थेदार को बादल परिवार के दबाव से मुक्त कर उनकी साख बहाल करेगा।
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उन्होंने आरोप लगाया कि एसजीपीसी खुद श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी कर रही है। एसजीपीसी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 267 पावन स्वरूपों का गायब कर दिया, लेकिन इस बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं दी। पावन स्वरूप अग्नि भेंट हुए। चुपके से गोइंदवाल साहिब में स्वरूपों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। स्वरूपों के अग्निभेंट होने के बावजूद एसजीपीसी ने न कोई पछतावा किया और न पाठ करवाए। श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी केवल कोटकपूरा, बरगाड़ी में ही नहीं एसजीपीसी परिसर में भी हो रही है। उन्होंने कहा कि बादल परिवार गुरु साहिब की हाजिरी में साबित करे कि उन्होंने कभी कहा हो कि वह अपने बेटे को सीएम बनाना चाहते हैं। यह लड़ाई सीएम पद के लिए नहीं है। लड़ाई एसजीपीसी व शिअद को बादल परिवार से मुक्त करवाने की है। वह बड़े बादल का सम्मान करते हैं। राजनीति में उन्होंने पांच दशक से अधिक समय उनके साथ बिताया है।
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एक सवाल के जवाब में ढींढसा ने कहा कि जत्थेदार ब्रह्मपुरा ने उनको शिअद (टकसाली) के अध्यक्ष पद की ऑफर दी थी। उन्होंने इस बाबत अपने समर्थकों से बातचीत की तो उनकी राय थी कि टकसाली अकाली दल के अध्यक्ष पद को स्वीकार न कर नए अकाली दल का गठन किया जाए। उनके समर्थक मेरे पास आ गए, इसमें मेरा क्या कसूर है। ढींढसा ने शिअद (टकसाली) के अध्यक्ष रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा को शिअद (डी) के सरपस्त पद पर काम करने का ऑफर दिया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुरा नवगठित शिअद (डी) के साथ मिल कर काम करें। ब्रह्मपुरा की पीठ पर छुरा किसने घोंपा इस बाबत वह उन्हीं से बात करें, जो शिअद (टकसाली) को छोड़ कर उनके साथ आए हैं।
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