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पांच महीने में पावरकॉम के एक करोड़ के ट्रांसफार्मर चोरी
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
Updated Tue, 17 Nov 2015 10:20 PM IST
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पावरकॉम अपने संसाधन बचाने में नाकाम साबित हो रहा है। सुरक्षा के अभाव में ट्रांसफार्मर चोरों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।
चोरी हो रहे ट्रांसफार्मरों में से अभी तक एक भी रिकवर नहीं हो पाया है। पावरकॉम के पास ट्रांसफार्मरों की चोरी पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस नीति भी नहीं है।
पावरकॉम कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कपूरथला सर्किल के अधीन छह डिवीजनों कपूरथला सिटी, कपूरथला सब-अर्बन, नकोदर सिटी, नकोदर सब-अर्बन, करतारपुर और कंस्ट्रक्शन डिवीजन में पिछले पांच महीने में 347 ट्रांसफार्मर चोरों के निशाना बने।
इनसे पावरकॉम को करीब 1 करोड़ 03 लाख 52 हजार रुपये का वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा। इनमें सबसे ज्यादा करतारपुर सब डिवीजन में 176 ट्रांसफार्मर चोरी हुए।
इनकी कीमत 45.35 लाख रुपये है। नकोदर सब-अर्बन में 15.09 लाख के 53 ट्रांसफार्मर, नकोदर सिटी में 6.77 लाख के 63 ट्रांसफार्मर, कपूरथला सिटी में 14.54 लाख के 33 ट्रांसफार्मर और कपूरथला सब-अर्बन में 17.84 लाख के 32 ट्रांसफार्मर चोरी हुए। कंस्ट्रक्शन डिवीजन में पिछले पांच माह में कोई ट्रांसफार्मर चोरी नहीं हुआ।
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पिछले तीस साल में कपूरथला सर्किल 6084 ट्रांसफार्मर गंवा चुका हैं। इनमें सबसे ज्यादा करतारपुर में 2692, नकोदर सब-अर्बन में 1304, कपूरथला सिटी में 791, कपूरथला सब-अर्बन 694 और नकोदर सिटी में 691 ट्रांसफार्मर चोरी हुए।
जबकि कंस्ट्रक्शन डिवीजन में इस समय अवधि के दौरान सिर्फ दो ट्रांसफार्मर चोरी हुए। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी कहीं ट्रांसफार्मर इंस्टाल किया जाता है तो सुरक्षा के लिए इसके इर्द-गिर्द सेफ्टी वॉल बनाई जाए, लेकिन कपूरथला में लगे ट्रांसफार्मरों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
चोरी ट्रांसफार्मरों में से 505 की कीमत 10 हजार तक, 850 की कीमत 20 हजार तक, 4620 की कीमत एक लाख तक और 41 की कीमत एक लाख रुपये भी ज्यादा है।
डिप्टी चीफ इंजीनियर कंवर जसवंत सिंह ने बताया कि चोरी होने वाले ट्रांसफार्मरों की शिकायत तुरंत दर्ज करवा दी जाती है। तकनीकी स्टाफ को भी हिदायत की गई है कि ट्रांसफार्मर के इर्द-गिर्द सेफ्टी वॉल बनाई जाए।
चोरी की ज्यादा घटनाएं गांवों में होती हैं। इसके लिए गांवों के सरपंचों व गणमान्य लोगों से सहयोग की अपील की है।
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चोरी हो रहे ट्रांसफार्मरों में से अभी तक एक भी रिकवर नहीं हो पाया है। पावरकॉम के पास ट्रांसफार्मरों की चोरी पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस नीति भी नहीं है।
पावरकॉम कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कपूरथला सर्किल के अधीन छह डिवीजनों कपूरथला सिटी, कपूरथला सब-अर्बन, नकोदर सिटी, नकोदर सब-अर्बन, करतारपुर और कंस्ट्रक्शन डिवीजन में पिछले पांच महीने में 347 ट्रांसफार्मर चोरों के निशाना बने।
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इनसे पावरकॉम को करीब 1 करोड़ 03 लाख 52 हजार रुपये का वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा। इनमें सबसे ज्यादा करतारपुर सब डिवीजन में 176 ट्रांसफार्मर चोरी हुए।
इनकी कीमत 45.35 लाख रुपये है। नकोदर सब-अर्बन में 15.09 लाख के 53 ट्रांसफार्मर, नकोदर सिटी में 6.77 लाख के 63 ट्रांसफार्मर, कपूरथला सिटी में 14.54 लाख के 33 ट्रांसफार्मर और कपूरथला सब-अर्बन में 17.84 लाख के 32 ट्रांसफार्मर चोरी हुए। कंस्ट्रक्शन डिवीजन में पिछले पांच माह में कोई ट्रांसफार्मर चोरी नहीं हुआ।
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पिछले तीस साल में कपूरथला सर्किल 6084 ट्रांसफार्मर गंवा चुका हैं। इनमें सबसे ज्यादा करतारपुर में 2692, नकोदर सब-अर्बन में 1304, कपूरथला सिटी में 791, कपूरथला सब-अर्बन 694 और नकोदर सिटी में 691 ट्रांसफार्मर चोरी हुए।
जबकि कंस्ट्रक्शन डिवीजन में इस समय अवधि के दौरान सिर्फ दो ट्रांसफार्मर चोरी हुए। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी कहीं ट्रांसफार्मर इंस्टाल किया जाता है तो सुरक्षा के लिए इसके इर्द-गिर्द सेफ्टी वॉल बनाई जाए, लेकिन कपूरथला में लगे ट्रांसफार्मरों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
चोरी ट्रांसफार्मरों में से 505 की कीमत 10 हजार तक, 850 की कीमत 20 हजार तक, 4620 की कीमत एक लाख तक और 41 की कीमत एक लाख रुपये भी ज्यादा है।
डिप्टी चीफ इंजीनियर कंवर जसवंत सिंह ने बताया कि चोरी होने वाले ट्रांसफार्मरों की शिकायत तुरंत दर्ज करवा दी जाती है। तकनीकी स्टाफ को भी हिदायत की गई है कि ट्रांसफार्मर के इर्द-गिर्द सेफ्टी वॉल बनाई जाए।
चोरी की ज्यादा घटनाएं गांवों में होती हैं। इसके लिए गांवों के सरपंचों व गणमान्य लोगों से सहयोग की अपील की है।