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Bank Fraud Case: आप विधायक गज्जनमाजरा की बढ़ी मुश्किलें, ईडी के बाद सीबीआई ने कसा शिकंजा; केस दर्ज

Thu, 16 Apr 2026 09:07 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली Published by: शाहिल शर्मा Updated Thu, 16 Apr 2026 09:07 PM IST
सार

ईडी के बाद अब सीबीआई ने भी इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा के तहत मामला दर्ज किया है।

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AAP MLA Gajjan Majra and four others booked in bank fraud case
जसवंत सिंह गज्जनमाजरा, आप विधायक - फोटो : संवाद

विस्तार

बैंक से करीब 40.02 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में आप विधायक जसवंत सिंह गज्जनमाजरा और उनके तीन करीबी रिश्तेदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बाद अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भी इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। 
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सीबीआई ने विधायक गज्जनमाजरा, उनके भाई बलवंत सिंह, कुलवंत सिंह और तेजिंदर सिंह के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की है। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा के तहत मामला दर्ज किया है।
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मामले में आरोपियों ने सीबीआई की विशेष अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने सीबीआई और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद चारों आरोपियों की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने सभी आरोपियों को अगली सुनवाई की तारीख या उससे पहले अदालत में आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आत्म समर्पण करने पर निचली अदालत उन्हें उचित शर्तों के साथ जमानत दे सकती है।
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मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, बैंक ऑफ इंडिया के डिप्टी जोनल मैनेजर (रिकवरी) प्रमोद चंद्र शर्मा ने 1 दिसंबर 2020 को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में मेसर्स तारा कॉरपोरेशन लिमिटेड को दी गई कैश क्रेडिट सुविधाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था। आरोप है कि इस गड़बड़ी के चलते बैंक को 40.02 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। 

जांच में सामने आया कि संबंधित कंपनी एक पब्लिक लिमिटेड फर्म है। इसकी स्थापना 19 नवंबर 2010 को हुई थी। यह कृषि उत्पादों के व्यापार से जुड़ी थी। कंपनी ने समय-समय पर कोलेट्रल सिक्योरिटी और स्टॉक गिरवी रखकर क्रेडिट सुविधा का लाभ लिया, लेकिन बाद में डिफॉल्ट हो गया। इस मामले में पहले पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच की थी और जांच पूरी होने के बाद अदालत में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा आरोपियों को पहले ही समन जारी किए जा चुके हैं। अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन कर पाया कि जांच पूरी हो चुकी है। आरोपियों ने जांच में सहयोग भी किया है। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें राहत देकर आत्म समर्पण करने के निर्देश जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई में आरोप तय होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
 
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