उत्तराखंड में कांग्रेस के नौ विधायकों के बागी होने के बाद बीते नौ दिनों से रावत सरकार के भविष्य को लेकर जारी सियासी सस्पेंस से पर्दा उठ गया। केंद्र ने राज्य में संवैधानिक व्यवस्था के चरमरा जाने का हवाला देते हुए राज्य की हरीश रावत सरकार को बर्खास्त कर दिया।
लाख जतन के बाद उत्तराखंड में 'अपनों' से ही हार गई कांग्रेस सरकार
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कुछ इस अंदाज में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के साथ नजर आए हरीश रावत
- फोटो : amar ujala
शनिवार देर रात कैबिनेट की आपात बैठक में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने और विधानसभा को निलंबित रखने का फैसला किया गया। इसके बाद कैबिनेट की सिफारिश पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने रविवार को सहमति की मुहर लगा दी।
लाख जतन के बाद उत्तराखंड में 'अपनों' से ही हार गई कांग्रेस सरकार
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राष्ट्रपति शासन लगने के बाद बीजापुर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों को संबोधित करते हरीश रावत
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राज्य में ऐसे समय में अनुच्छेद 356 का उपयोग किया गया है, जब रावत सरकार को एक ही दिन बाद सोमवार को विधानसभा में बहुमत साबित करना था।
लाख जतन के बाद उत्तराखंड में 'अपनों' से ही हार गई कांग्रेस सरकार
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पत्रकारों को संबोधित करते हरीश रावत
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विधानसभा को भंग करने की जगह निलंबित रखे जाने से राज्य में नई सरकार की गठन की संभावना बनी हुई है। भाजपा ने राज्यपाल से निमंत्रण मिलने पर सरकार बनाने की घोषणा भी की।
लाख जतन के बाद उत्तराखंड में 'अपनों' से ही हार गई कांग्रेस सरकार
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बीजापुर स्थित अपने आवास पर हरीश रावत समर्थकों के साथ
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इस बीच राष्ट्रपति शासन लगने के बाद भाजपा और कांग्रेस ने एक दूसरे पर तीखा सियासी निशाना साधा। कांग्रेस ने जहां केंद्र के इस कदम को संविधान और प्रजातंत्र की हत्या बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की घोषणा की है।