तंबाकू और सिगरेट के सेवन से मुंह के कैंसर के साथ ही टीबी की तीन गुना और हृदय की बीमारियां होने की दो आशंका दोगुनी बढ़ जाती है। मगर,इस बात से बनारस के लोग बेपरवाह हैं। जानकारों की मानें तो बनारसी हर रोज 50 लाख रुपये का गुटके पर खर्च करते हैं। इसके अलावा शहर में हर दिन करीब 40 लाख रुपये का सिगरेट बिक जाता है। बनारस में 68 प्रतिशत पुरुष और 22 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू का सेवन कर रही हैं। आगी की स्लाइड्स में जानें...
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- फोटो : अमर उजाला
बनारस शहर में नशाखोरी खत्म करने के लिए चल रहा राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम उदासीनता का शिकार है। शासन ने स्कूल-कॉलेजों के 100 मीटर के दायरे में पान, गुटका-बीड़ी और सिगरेट की दूकान नहीं खोलने का आदेश दिया है लेकिन दूकानें धड़ल्ले से चल रही हैं। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के परिप्रेक्ष्य में इस बात को समझने की जरूरत है कि लापरवाही से बच्चे भी व्यसनों की चपेट में आ रहे हैं।
इसी साल जनवरी शासन के निर्देश के बाद डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जिले में तंबाकू निषेध अधिनियम का पालन कराने के लिए पांच टीमों का गठन किया गया था लेकिन टीमों ने कुछ नहीं किया। नतीजा, स्थिति जस की तस बनी है। अभी भी जिले के स्कूल-कॉलेजों के 100 मीटर की दुकानों पर गुटका, सिगरेट, गुल आदि की दुकानें चल रही है।
दूसरी ओर एसीएम चतुर्थ त्रिभुवन कहते हैं कि तंबाकू नियंत्रण अधिनियम का पालन कराने के लिए बनी टीमों की ओर से समय-समय पर छापेमारी की जाती हैं। छापेमारी अभियान एक बार फिर तेज किया जाएगा।
मंडलीय अस्पताल में संचालित तंबाकू नियंत्रण केंद्र और बीएचयू की ओपीडी के आंकड़ों के मुताबिक 14 से 40 साल तक के लोगों को तंबाकू की लत अधिक है। कार्यक्रम के जिला सलाहकार डॉ. सौरभ प्रताप सिंह ने बताया कि इसे छोड़ने के लिए परामर्श लेने वालों में 25 से 60 साल तक के लोग आ रहे हैं। डेढ़ साल में छह हजार लोगों ने नशा छोड़ने के लिए परामर्श लिया और 100 लोग छोड़ भी चुके हैं।