बनारस में विजयादशमी पर रावण का दहन हो गया। बुराई पर अच्छाई की जीत हो गई। लोगों ने एक बार फिर रावण का दहन होते देख लिया। जिला प्रशासन ने रावण दहन के दौरान मेले के आयोजन की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन रावण जलते देखने के लिए भीड़ जुट गई। देखें अगली स्लाइड्स...।
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हाबीर मंदिर पर रावण दहन देखने को उमड़ी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
इस लोगों के बीच में सोशल डिस्टेंसिंग (सामाजिक दूरी) कहीं भी नजर नहीं आई। रावण दहन देखने के लिए बच्चों के साथ पहुंचे थे। कहीं लोगों ने मास्क लगाया था, तो कहीं लापरवाह दिखे। वाराणसी में यूपी कॉलेज के सामने रावण, महाबीर मंदिर सहित कई जगहों पर रावण के पुतले का दहन किया गया। वहीं विजयदशमी पर शहरभर में रावण दहन के लिए 259 लोगों ने रावण दहन की अनुमति प्रशासन से मांगी थी।
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यूपी कालेज के सामने रावण के पुतले को दहन करते भगवान राम।
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रविवार को प्रशासनिक निगरानी में रावण दहन हुआ, लेकिन विजयदशमी पर लगने वाला मेला नहीं लगा। सामूहिक रावण दहन की बजाय सोसइटी और एक व्यक्ति के रूप से लोगों को रावण दहन करने की योजना प्रशासन ने बनाई थी, लेकिन कोरोना गाइडलाइन का कहीं भी पालन नहीं दिखा। लोग एक सात नजर आए और रावण दहन को देखा।
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सोशल डिस्टेंसिंग का नहीं हुआ पालन।
- फोटो : अमर उजाला
एडीएम सिटी गुलाबचंद ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से आयोजकों को सशर्त अनुमति दी गई। कोरोना गाइडलाइन का पालन करने के लिए रावण दहन का आयोजन जिला प्रशासन की निगरानी में कराया गया। इसके लिए मजिस्ट्रेटों को जिम्मेदारी दी गई थी। हर साल की तरह विजयादशमी पर भी वाराणसी में कई जगहों पर रावण दहन का आयोजन किया गया।
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रावण दहन।
- फोटो : अमर उजाला
साल कई स्थानों पर समितियों ने अपने आयोजन निरस्त कर दिए। आवेदन करने वालों को जिला प्रशासन ने सशर्त अनुमति दी थी। परंपरा के अनुसार, रावण के आयोजन में भी 200 से अधिक लोगों के शामिल होने पर रोक लगाई थी।