{"_id":"59ec74694f1c1bc9678b6f2b","slug":"varanasi-last-lakha-mela-nag-nathaiya-tomorrow","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"काशी का विश्व प्रसिद्ध नाग नथैया मेला आज, गंगा में कालियानाग के फन पर बंशी बजाएंगे कान्हा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काशी का विश्व प्रसिद्ध नाग नथैया मेला आज, गंगा में कालियानाग के फन पर बंशी बजाएंगे कान्हा
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 23 Oct 2017 02:27 PM IST
विज्ञापन
nag nathaiaya
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कला और संस्कृति की नगरी वाराणसी में सैंकड़ों वर्षों से लगातार हो रही विश्व प्रसिद्ध अद्भुत नाग नथैया लीला का आयोजन आज किया जाएगा। गंगा की मध्यधारा पर यह अनूठी कृष्ण लीला देश-दुनिया के पर्यटकों, श्रद्धालुओं के लिए यादगार होगी। इस लीला को देखने के लिए देश कोने-कोने से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी सैलानी यहां पहुंचते हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें..
nag nathaiaya
- फोटो : अमर उजाला
काशी का यह चौथा और आखिरी आध्यात्मिक लक्खा मेला 23 अक्तूबर की शाम पांच बजे से गंगा की मध्यधारा पर लगेगा। गंगा में कुछ देर के लिए यमुना की झलक पेश की जाएगी। चलायमान लीलाओं, आध्यात्मिक मेलों और लोकोत्सवों के लिए विख्यात तीर्थनगरी में गंगा की मध्यधारा पर अनूठी कृष्ण लीला होगी।
nag nathaiaya
- फोटो : अमर उजाला
तुलसी घाट पर गंगा की धारा में यमुनारूपी कालिय दह बनेगा। गोप-गोपियों के साथ खेलते समय सोने की गेंद दह में गिरेगी और उसे निकालने के लिए कान्हा कदंब की डाल से छलांग लगाएंगे। नाग नथैया की लीला के लिए तुलसी घाट पर तैयारियां अंतिम दौर में हैं। अस्सी-भदैनी के मल्लाह कान्हा की टोली में शामिल होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
nag nathaiaya
- फोटो : अमर उजाला
कला और संस्कृति की नगरी वाराणसी में ये परंपरा 450 वर्ष पुरानी है जो कि कार्तिक मास की नाग चतुर्थी को हर साल यहां होती है। नाग नथैया का ये मेला गोस्वामी तुलसी दास जी के द्वारा शुरू किया गया था, तभी से ये लीला तुलसी घाट पर होती चली आ रही है।
विज्ञापन
nag nathaiaya
- फोटो : अमर उजाला
काशिराज डॉ. अनंत नारायण सिंह शाही वेश में बजड़े पर सवार होकर नाग नथैया लीला के साक्षी बनेंगे। कदंब की डाल से यमुनादह में गेंद खोजने के लिए कान्हा कूदेंगे और कुछ देर में ही कालियानाग के फन पर बंशी बजाते हुए बाहर प्रगट हो जाएंगे। शंखध्वनि, डमरूनाद के साथ पीपे के मंचों से कान्हा की आरती होगी।