सावन के प्रथम सोमवार पर मोक्षनगरी में आस्था का उत्सव सज गया। रिमझिम फुहारों के बीच कांवरिया भोले भक्तों की लंबी कतारें लगीं तो यादव बंधुओं ने पारंपरिक वेश में घड़ा-गगरा में गंगा जल भर कर शोभायात्रा निकाली और बाबा का जलाभिषेक किया।
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sawan in varanasi
- फोटो : अमर उजाला
देर रात तक 1.50 लाख भक्तों ने बाबा का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की। सड़कों से गलियों तक कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच भक्तों ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई। गेंदा, गुलाब, बेला, रजनीगंधा के फूलों, हरी पत्तियों से सजे देवाधिदेव के दरबार में मंगला आरती के बाद से ही दर्शन आरंभ हो गया।
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सुबह छह बजे दशाश्वमेध से गिरजाघर होते हुए बांसफाटक से छत्ताद्वार तक भक्तों की कतार लग गई थी। बोल बम और हर हर महादेव के जयकारों के साथ श्रद्धालु बारिश में भी आस्था पथ पर आगे बढ़ते रहे। केसरिया वस्त्रों में कांवर लेकर तीर्थराज प्रयाग से निकले भोले भक्तों ने देर शाम तक बाबा के दरबार में पहुंचकर जलाभिषेक किया।
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सुबह छह बजे गौरी केदारेश्वर से आंखों में सूरमा लगाए गंजी गमछा पहनकर कंधे पर गगरा में गंगा जल लेकर यादव बंधु निकले तो सड़कों की छटा ही बदल गई। गोदौलिया, बांसफाटक, चौक, नीचीबाग तक लगे सेवा शिविरों में नंगे पैर जलाभिषेक के लिए कतार में लगे शिव भक्तों को चाय, बिस्कुट और पानी वितरित किया जा रहा था।
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भोग आरती के दौरान श्रद्धालुओं को काफी देर तक रोके रखा गया। इससे हंगामा भी हुआ। छत्ताद्वार पर उमस की वजह से एक महिला श्रद्धालु बेहेशो हो गई। जानकारी मिलने के बाद सीएमओ के निर्देश पर मौके पर पहुंची चिकित्सकों की टीम ने उपचार किया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।